जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण नौटियाल की कांग्रेस में घर वापसी
उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। बॉलीवुड के मशहूर और लोकप्रिय पार्श्व गायक जुबिन नौटियाल के पिता तथा पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को अलविदा कहते हुए एक बार फिर से अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस का दामन थाम लिया है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले हुए इस बड़े राजनीतिक उलटफेर ने राज्य की सत्तारूढ़ बीजेपी को एक तगड़ा झटका दिया है, वहीं कांग्रेस खेमे में भारी उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर रामशरण नौटियाल ने अपनी ऐतिहासिक 'घर वापसी' की पटकथा लिख दी है, जिसके बाद जौनसार-बावर और गढ़वाल क्षेत्र के समीकरण पूरी तरह से गरमा गए हैं।
बीजेपी से दिया इस्तीफा और दिल्ली में थमा कांग्रेस का दामन
रामशरण नौटियाल का बीजेपी छोड़ना अचानक उठाया गया कदम नहीं माना जा रहा है, बल्कि पिछले कुछ समय से उनके पार्टी से मोहभंग होने की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। उन्होंने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा सौंप दिया था। इसके बाद राजधानी दिल्ली पहुंचकर उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और प्रदेश प्रभारियों की उपस्थिति में कांग्रेस की सदस्यता ली। कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित इस खास कार्यक्रम के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। रामशरण नौटियाल ने इस अवसर पर कहा कि वे अपनी पुरानी विचारधारा और परिवार में वापस लौटकर बेहद सुकून और गर्व महसूस कर रहे हैं।
2022 चुनाव में चकराता से रहे थे बीजेपी उम्मीदवार, अब क्यों बदला पाला?
गौरतलब है कि रामशरण नौटियाल ने साल 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के रूप में चकराता (ST) विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। हालांकि, उस कड़े मुकाबले में उन्हें कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह से हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन वे दूसरे नंबर पर रहकर भारी मत हासिल करने में सफल रहे थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ समय से बीजेपी के स्थानीय संगठन में उनकी अनदेखी की जा रही थी और वे खुद को असहज महसूस कर रहे थे। जौनसार-बावर क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ और जनसमर्थन के बावजूद तवज्जो न मिलने से नाराज होकर उन्होंने आखिरकार अपनी पुरानी पार्टी में लौटने का कठोर फैसला लिया।
उत्तराखंड की राजनीति और आगामी चुनाव पर क्या पड़ेगा असर?
रामशरण नौटियाल केवल एक मशहूर गायक के पिता ही नहीं हैं, बल्कि वे देहरादून जिला पंचायत के अध्यक्ष रह चुके हैं और उनका गढ़वाल तथा मैदानी इलाकों में मजबूत सामाजिक आधार है। चकराता, विकासनगर और सहसपुर विधानसभा क्षेत्रों में उनके समर्थकों की एक बड़ी तादाद मौजूद है जो चुनावी नतीजों का रुख पलटने में सक्षम है। उनके कांग्रेस में आने से पार्टी को जौनसार-बावर इलाके में एक बड़ा और अनुभवी चेहरा मिल गया है। माना जा रहा है कि आगामी चुनाव में कांग्रेस उन्हें विकासनगर, सहसपुर या चकराता क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतारकर बीजेपी को कड़ी चुनौती दे सकती है।
समर्थकों में भारी उत्साह, बीजेपी खेमे में मची खलबली
रामशरण नौटियाल की कांग्रेस में वापसी की खबर फैलते ही उनके गृह क्षेत्र में ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया गया और कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटीं। समर्थकों का कहना है कि नौटियाल जी का यह फैसला जनहित और क्षेत्र के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। दूसरी ओर, चुनाव से ठीक पहले एक मजबूत और जनाधार वाले नेता का हाथ झटकना बीजेपी के लिए एक बड़ी रणनीतिक क्षति माना जा रहा है। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि रामशरण नौटियाल के आने से उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर की अंदरूनी गुटबाजी किस हद तक दूर होती है और पार्टी आने वाले चुनावों में इसका कितना फायदा उठा पाती है।