देश को दहलाने वाले चर्चित निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत
देशभर में अपनी क्रूरता और भयावहता के कारण सुर्खियों में रहे बहुचर्चित निठारी कांड (Nithari Kand) के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में अब एक बहुत बड़ा और अहम मोड़ आ गया है। इस सनसनीखेज मामले में जेल प्रशासन और न्यायिक जांच के बीच अब सुरेंद्र कोली की आधिकारिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट (Postmortem Report) सार्वजनिक कर दी गई है, जिससे उसकी मौत के कारणों को लेकर चल रहे तमाम कयासों और रहस्यों से पर्दा उठने लगा है। डॉक्टरों के एक विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड द्वारा की गई इस वीडियोग्राफी आधारित पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसकी मौत की असल वजह का खुलासा किया गया है, जिसने एक बार फिर से इस पूरे मामले को देश भर की सुर्खियों में ला खड़ा किया है। आखिर निठारी के दरिंदे के रूप में कुख्यात रहे सुरेंद्र कोली की जेल के भीतर अचानक कैसे मौत हुई और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कौन-कौन से चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, आइए इस लेख के माध्यम से पूरे घटनाक्रम और रिपोर्ट की हर एक बात को विस्तार से जानते हैं।
निठारी कांड और सुरेंद्र कोली की आपराधिक पृष्ठभूमि का संक्षिप्त सफर
दैनिक जीवन और अपराध जगत के इतिहास में जब भी देश के सबसे वीभत्स और डरावने मामलों का जिक्र होता है, तो नोएडा के निठारी कांड का नाम सबसे पहले लिया जाता है। आज से लगभग दो दशक पहले नोएडा के सेक्टर-31 स्थित एक कोठी (सुरेंद्र कोली के मालिक मोंइंदर सिंह पंढेर का घर) के पीछे बने नाले से जो नरकंकाल और बच्चों के अवशेष बरामद हुए थे, उसने पूरी मानवता को झकझोर कर रख दिया था। उस समय इस खौफनाक कांड में मासूम बच्चों और महिलाओं के साथ जिस अमानवीय तरीके से बर्बरता, हत्या और आपराधिक कृत्य किए गए थे, उसके मुख्य दोषियों में सुरेंद्र कोली का नाम सामने आया था। लंबी कानूनी लड़ाई, अदालतों के फेर और मुकदमों की सुनवाई के बाद निचली अदालत से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक ने सुरेंद्र कोली को उसके घृणित अपराधों के लिए फांसी की सजा सुनाई थी, जो बाद में आजीवन कारावास में तब्दील हो गई थी और वह अपनी बाकी की सजा जेल में काट रहा था।
जेल के भीतर अचानक हुई संदिग्ध मौत और प्रशासनिक हलचल
कुछ समय पहले जब अचानक यह खबर सामने आई कि सीरियल किलर सुरेंद्र कोली की तबीयत जेल के अंदर अचानक बिगड़ गई है और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई है, तो पूरे देश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया था। लोग यह सोचकर हैरान थे कि कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और जेल के पहरे के बीच आखिरकार इस तरह की घटना कैसे घटित हो सकती है। मानवाधिकार संगठनों, वकीलों और मीडिया की नजरों में यह मामला तुरंत एक संवेदनशील मुद्दा बन गया। जेल अधिकारियों की शुरुआती बयानों के बाद जब यह तय किया गया कि मौत के कारणों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए नियमों के तहत एक उच्च स्तरीय मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया जाएगा, तो सबकी निगाहें इसी रिपोर्ट पर टिकी हुई थीं कि आखिर इस मौत के पीछे की असली मेडिकल मिस्ट्री क्या है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के चौंकाने वाले खुलासे और डॉक्टरों की राय
सुरेंद्र कोली की मौत के बाद विशेषज्ञों के एक पैनल द्वारा तैयार की गई विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब सामने आ चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों ने मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए शव का गहन आंतरिक और बाहरी परीक्षण किया। शुरुआती निष्कर्षों में यह बात सामने आई है कि उसकी मौत किसी बाहरी हिंसक हमले या संघर्ष के कारण नहीं हुई है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जटिलताओं या अचानक आए किसी अंदरूनी शारीरिक आघात (Internal Medical Complications) के कारण उसकी सांसें थमी हैं। हालांकि, रिपोर्ट में बिसरा (Viscera) सुरक्षित रखने की बात भी कही गई है ताकि किसी भी तरह के जहर या अन्य केमिकल एंगल की संभावना को पूरी तरह नकारा न जा सके। फॉरेंसिक विशेषज्ञों और डॉक्टरों का यह पैनल इस बात की भी गहराई से जांच कर रहा है कि क्या उसे पहले से कोई ऐसी गंभीर पुरानी बीमारी थी जिसकी अनदेखी हुई या फिर तनाव के कारण उसकी यह स्थिति बनी।
न्यायिक जांच और भविष्य के कानूनी पहलुओं पर इसका क्या होगा असर?
किसी भी सजायाफ्ता या विचाराधीन कैदी की जेल के भीतर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने पर कानूनन मजिस्ट्रेटी जांच (Magisterial Inquiry) और मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होता है। सुरेंद्र कोली के मामले में भी न्यायिक मजिस्ट्रेट की देखरेख में पूरी विधिक प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। इस पोस्टमार्टम रिपोर्ट के सामने आने के बाद अब यह स्पष्ट होता जा रहा है कि मौत के तकनीकी कारण क्या थे, लेकिन फिर भी परिजनों, वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा इस पूरी घटना की स्वतंत्र जांच की मांग जारी है। निठारी कांड के इस अध्याय के अंत के साथ ही एक बार फिर से जेलों के भीतर कैदियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्थाओं को लेकर समाज में एक गंभीर बहस छिड़ गई है, जिसके दूरगामी परिणाम प्रशासनिक स्तर पर देखने को मिल सकते हैं।