सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नीतू बिष्ट कौन हैं और क्यों घिरी हैं बड़े विवाद में

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नीतू बिष्ट कौन हैं और क्यों घिरी हैं बड़े विवाद में

आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रातों-रात स्टार बनने की होड़ में कई बार कंटेंट क्रिएटर्स ऐसे कदम उठा लेते हैं जो विवादों की आंधी खड़ी कर देते हैं। उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के प्रवेश द्वार और प्रमुख शहर हल्द्वानी से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे राज्य के साथ-साथ सोशल मीडिया जगत में हलचल मचा दी है। मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और कंटेंट क्रिएटर नीतू बिष्ट (Neetu Bisht) इन दिनों अपनी किसी वीडियो या व्लॉग के कारण नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मामले को लेकर चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। नीतू बिष्ट देश के जाने-माने डिजिटल क्रिएटर्स में शुमार हैं, जिनके यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर लाखों फॉलोअर्स हैं। अपनी डेली लाइफ और पारिवारिक व्लॉग्स के जरिए लोकप्रियता हासिल करने वाली नीतू बिष्ट जब अपने पैतृक राज्य उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर की सड़कों और बाजारों में मां काली का स्वांग रचकर रील बनाती नजर आईं, तो मामला तुरंत तूल पकड़ गया।

हल्द्वानी के व्यस्त बाजार में मां काली बनकर घूमने का वायरल वीडियो और स्थानीय लोगों का गुस्सा

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब नीतू बिष्ट ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक नया वीडियो अपलोड किया, जिसमें वे हिंदू धर्म की आराध्य देवी महाकाली (मां काली) का रूप धारण करके हल्द्वानी के एक भीड़भाड़ वाले मुख्य बाजार और सार्वजनिक स्थानों पर घूमती हुई दिखाई दे रही हैं। उनके साथ कैमरापर्सन और क्रू के अन्य सदस्य भी मौजूद थे जो इस पूरे घटनाक्रम को रिकॉर्ड कर रहे थे। जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ, स्थानीय निवासियों, सनातन प्रेमियों और विभिन्न हिंदू संगठनों की नजर इस पर पड़ी। लोगों का गुस्सा इस बात को लेकर भड़क उठा कि किसी भी सोशल मीडिया रील या वीडियो व्यूज पाने के लिए धर्म और देवी-देवताओं के स्वरूप का इस तरह का व्यावसायिक और नाटकीय इस्तेमाल करना पूरी तरह अनुचित है। हल्द्वानी के स्थानीय बाजारों में इस बात को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और लोगों ने खुलेआम इस प्रकार की हरकतों पर आपत्ति जताई।

धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप, पुलिस प्रशासन से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग

हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों में इस वीडियो के सामने आने के बाद विभिन्न धार्मिक व सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कड़ा रुख अपना लिया है। संगठनों का आरोप है कि नीतू बिष्ट और उनकी टीम ने पब्लिसिटी और लाइक्स पाने के लिए धार्मिक आस्था का अनादर किया है, जिससे सनातन धर्मावलंबियों की भावनाएं आहत हुई हैं। कई हिंदूवादी संगठनों ने स्थानीय पुलिस प्रशासन और साइबर सेल को लिखित शिकायत सौंपते हुए मांग की है कि इस मामले में तुरंत संज्ञान लिया जाए और इन्फ्लुएंसर नीतू बिष्ट तथा उनके सहयोगियों के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने व सार्वजनिक शांति में खलल डालने के आरोप में एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया की आड़ में धर्म और देवी-देवताओं का इस तरह मजाक उड़ाने की संस्कृति पर रोक लगाना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि भविष्य में कोई अन्य क्रिएटर ऐसी हरकत करने की हिम्मत न जुटा सके।

सोशल मीडिया क्रिएटर्स की बढ़ती जिम्मेदारी और नैतिकता पर उठते गंभीर सवाल

यह घटना केवल एक इन्फ्लुएंसर के विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आज के दौर के डिजिटल क्रिएटर्स की सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान लगाती है। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए जिस प्रकार लगातार धर्म, संस्कृति और संवेदनाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह समाज के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। कंटेंट क्रिएटर्स को यह समझने की आवश्यकता है कि उनके वीडियो करोड़ों लोग देखते हैं, और मनोरंजन या व्यूज की भूख में किसी की आस्था को ठेस पहुंचाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में नहीं आता। हल्द्वानी की इस घटना के बाद से पुलिस और प्रशासन भी सतर्क हो गए हैं और सोशल मीडिया पर नजर रखी जा रही है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कानूनी कदम उठाता है और नीतू बिष्ट इस पूरे विवाद पर क्या सफाई देती हैं।