कौन हैं सुबोध उनियाल? दलेर मेहंदी को भरे मंच पर लताड़ा
देहरादून (विशेष संवाददाता): उत्तराखंड की राजनीति में जब भी कभी दोटूक और बेबाक बयानबाजी करने वाले नेताओं का जिक्र होता है, तो कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल का नाम सबसे पहले शुमार किया जाता है। वर्तमान में उत्तराखंड सरकार में वन, तकनीकी शिक्षा और भाषा विभाग जैसी अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे सुबोध उनियाल अपने राजनीतिक रसूख और प्रशासनिक पकड़ के साथ-साथ अपने तीखे तेवरों के लिए भी पूरे राज्य में जाने जाते हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की थी और वह लंबे समय तक उत्तराखंड की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले दिवंगत एनडी तिवारी के बेहद करीबी सहयोगियों में गिने जाते थे। साल 2016 में उत्तराखंड कांग्रेस में हुए बड़े राजनीतिक उथल-पुथल और बगावत के दौरान सुबोध उनियाल उन प्रमुख विधायकों में शामिल थे जिन्होंने हरीश रावत सरकार के खिलाफ बगावत का झंडा उठाया था और बाद में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थाम लिया था। बीजेपी में आने के बाद से ही वह लगातार नरेंद्रनगर विधानसभा सीट से विधायक चुने जा रहे हैं और पार्टी संगठन तथा सरकार दोनों ही स्तरों पर उनका प्रभाव लगातार मजबूत रहा है। उनकी गिनती उत्तराखंड के उन चुनिंदा नेताओं में होती है जो किसी भी मंच पर या जनता के बीच अपनी बात को बिना किसी लाग-लपेट के सीधे और दोटूक अंदाज में रखना अच्छी तरह जानते हैं।
दलेर मेहंदी विवाद: जब उत्तराखंड के मंच पर भड़क उठे कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल
इन दिनों सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल का एक ऐसा ही वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह देश के जाने-माने और लोकप्रिय पंजाबी गायक दलेर मेहंदी को भरे मंच पर लताड़ते हुए साफ नजर आ रहे हैं। यह पूरा वाकया एक सांस्कृतिक और सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान का है, जहां दलेर मेहंदी बतौर मुख्य कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देने के लिए पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान जब माहौल अपनी सुरीली रफ्तार पकड़ रहा था, तभी मंच पर कुछ ऐसा हुआ जिसने वहां मौजूद हर शख्स को चौंका कर रख दिया। मंत्री सुबोध उनियाल का यह अंदाज देखकर वहां मौजूद अधिकारी, आयोजक और आम दर्शक सभी हक्के-बक्के रह गए कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक वरिष्ठ राजनेता को मंच से ही सरेआम एक सेलिब्रिटी गायक को इतनी कड़ी फटकार लगानी पड़ गई। इस घटना का वीडियो सामने आते ही राजनीतिक गलियारों से लेकर फिल्मी और संगीत जगत तक में खलबली मच गई है और लोग इस बात की तह तक जाने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर इस पूरे विवाद की असली जड़ क्या थी।
'नशे में धुत्त हो, जुबान लड़खड़ा रही है, जनता के सामने गाना क्या गाओगे?'
वायरल हो रहे इस वीडियो में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल बेहद गुस्से और नाराजगी के मुद्रा में नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि जब मंच पर दलेर मेहंदी अपनी परफॉर्मेंस देने पहुंचे, तो उनकी शारीरिक भाषा और हाव-भाव को देखकर मंत्री को आभास हुआ कि वह सामान्य स्थिति में नहीं हैं। मंच पर माइक संभालते ही सुबोध उनियाल ने बिना किसी झिझक के सीधे तौर पर गायक दलेर मेहंदी पर निशाना साधा और सार्वजनिक रूप से खरी-खोटी सुनानी शुरू कर दी। वीडियो में मंत्री यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि इस तरह का गैर-जिम्मेदाराना बर्ताव कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि जब आप मंच पर खड़े होकर अपने मुंह से साफ-सुथरे बोल तक नहीं बोल पा रहे हैं और आपकी जुबान बुरी तरह लड़खड़ा रही है, तो आप उत्तराखंड की इस देवभूमि की जनता के सामने क्या संदेश देंगे और यहां आकर गाना क्या गाओगे? मंत्री ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि देश और दुनिया से लोग एक बेहतरीन सांस्कृतिक संध्या का आनंद लेने के लिए बड़ी उम्मीदों के साथ पहुंचते हैं, लेकिन अगर कोई कलाकार इस तरह की स्थिति में मंच पर उतरकर अपनी गरिमा और अनुशासन को भूल जाता है, तो यह वहां बैठे हजारों दर्शकों के साथ-साथ उस महान मंच का भी बहुत बड़ा अपमान है।
सार्वजनिक मंचों पर कलाकारों की गरिमा और आयोजकों की जवाबदेही पर उठे बड़े सवाल
सुबोध उनियाल द्वारा दलेर मेहंदी को मंच पर इस तरह लताड़े जाने की इस घटना के बाद से उत्तराखंड में एक बार फिर से इस बात पर गंभीर बहस छिड़ गई है कि क्या सार्वजनिक और सरकारी आयोजनों में आमंत्रित किए जाने वाले कलाकारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए या नहीं। जानकारों का मानना है कि उत्तराखंड जैसी पवित्र देवभूमि में संस्कृति और कला के संरक्षण के लिए ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जहां बड़ी संख्या में परिवार, महिलाएं और युवा भी मौजूद रहते हैं। ऐसे में मंच की एक अपनी सांस्कृतिक और नैतिक मर्यादा होती है। यदि कोई नामचीन हस्ती इस प्रकार की अनुशासनहीनता का परिचय देती है, तो वह पूरे समाज और आयोजकों के सामने एक बहुत ही गलत मिसाल पेश करता है। दूसरी ओर, कुछ लोगों का यह भी कहना है कि इस तरह के मामलों को सुलझाने के लिए परदे के पीछे या आंतरिक बैठकों का सहारा लिया जा सकता था, लेकिन सुबोध उनियाल की शैली हमेशा से ही बेबाक और पारदर्शी रही है, इसलिए उन्होंने गलत को गलत कहते हुए मंच पर ही अपनी प्रतिक्रिया देना उचित समझा।
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाओं का दौर जारी, वीडियो हुआ धड़ल्ले से वायरल
जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर अपलोड हुआ, यह जंगल की आग की तरह चारों तरफ फैल गया। यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस वीडियो के क्लिप्स को लाखों लोग देख चुके हैं और इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। जहां एक वर्ग सुबोध उनियाल के इस कड़े रुख की सराहना कर रहा है और कह रहा है कि राजनेताओं को इस प्रकार की अनुशासनहीनता के खिलाफ खुलकर आवाज उठानी चाहिए, वहीं दूसरा वर्ग दलेर मेहंदी के समर्थन में भी उतरा है और उनके फैंस का कहना है कि किसी भी कलाकार की स्थिति को बिना पूरी तरह समझे इस तरह सार्वजनिक रूप से मंच पर अपमानित करना उचित नहीं है। हालांकि, इस पूरे विवाद के बीच उत्तराखंड के राजनीतिक और सांस्कृतिक गलियारों में यह खबर एक हॉट टॉपिक बन चुकी है। आम जनता से लेकर राजनीतिक विश्लेषक तक इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में इस घटना का दोनों पक्षों पर क्या असर पड़ेगा। फिलहाल, सुबोध उनियाल का यह बेबाक अंदाज और उनका यह वीडियो सोशल मीडिया की सुर्खियों में सबसे ऊपर बना हुआ है और हर कोई यही जानना चाहता है कि इस पूरे वाकये पर आगे क्या नया मोड़ सामने आता है।