अरामको के तेल ठिकानों और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों को बनाया निशाना

अरामको के तेल ठिकानों और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों को बनाया निशाना

पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र के भू-राजनीतिक पटल पर एक बार फिर तनाव अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक और सामरिक ठिकानों पर विनाशकारी ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए हैं। इन हमलों में दुनिया की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी 'सऊदी अरामको' के प्रमुख रिफाइनरी परिसरों और राजधानी रियाद स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों को सीधा निशाना बनाया गया है। भीषण सुरक्षा चिंताओं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की सुरक्षा का आकलन करते हुए सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की महत्वाकांक्षी योजना 'फ़्यूचर इनवेस्टमेंट इनिशिएटिव' (FII), जिसे 'रेगिस्तान का दावोस' भी कहा जाता है, को आनन-फानन में स्थगित करना पड़ा है। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने वैश्विक शेयर बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारी हलचल पैदा कर दी है।

ऊर्जा ढांचे पर करारा प्रहार: अरामको रिफाइनरी में लगी भीषण आग और हवाई जहाजों का आवागमन पूरी तरह ठप

हूती प्रवक्ता द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयानों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हूती सैन्य बलों ने एक साथ कई क्रूज़ मिसाइलों और लंबी दूरी के आत्मघाती ड्रोन विमानों से सऊदी अरब के ऊर्जा अवसंरचना पर एक साथ हमला बोला। इस हमले के चलते सऊदी अरामको के प्रमुख तेल शोधन संयंत्रों के करीब जोरदार विस्फोट हुए और आग के विशाल गुबार उठते देखे गए। इसके साथ ही यनबू बंदरगाह और रियाद हवाई अड्डे के आसपास के क्षेत्रों में कई ड्रोन टकराए, जिसके बाद देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर उड़ानों का संचालन पूरी तरह से रोक दिया गया और अंतरराष्ट्रीय हवाई जहाजों को पड़ोसी देशों जैसे बहरीन की तरफ डायवर्ट करना पड़ा। यद्यपि सऊदी वायु रक्षा प्रणाली (Air Defence System) ने रेड सी और रियाद के ऊपर आ रहे कई मिसाइलों व ड्रोनों को हवा में ही मार गिराने का दावा किया है, लेकिन फिर भी इस संगठित हमले ने देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में बड़े छिद्र उजागर कर दिए हैं।

'डेजर्ट का दावोस' स्थगित: 10वें मील के पत्थर वाले इनवेस्टमेंट सम्मेलन पर सुरक्षा का साया

सऊदी अरब के आर्थिक परिवर्तन और 'विजन 2030' का सबसे बड़ा मंच माना जाने वाला 'फ्यूचर इनवेस्टमेंट इनिशिएटिव' (FII) सम्मेलन इस माह आयोजित होना तय हुआ था। इस सम्मेलन में अमेरिका के वॉल स्ट्रीट के दिग्गज बैंकों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs), टेक दिग्गजों और दुनिया भर के उद्योगपतियों का बड़ा जमावड़ा लगने वाला था। हालांकि, हवाई अड्डों पर उड़ानों की अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय मेहमानों पर मंडराते सुरक्षा खतरों को देखते हुए आयोजकों ने एक अत्यंत कठिन फैसला लेते हुए इस 10वें ऐतिहासिक सम्मेलन को सीधे वर्ष 2027 तक के लिए टालने की घोषणा कर दी है। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि वे अपने वैश्विक सहयोगियों और आगंतुकों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं कर सकते, इसलिए हालात सामान्य होने तक इस मेगा इवेंट को स्थगित किया जा रहा है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की कीमतों पर असर: क्या महायुद्ध की ओर बढ़ रहा है मिडिल ईस्ट?

सऊदी अरब पर हुए इस ताजा और आक्रामक हमले का सीधा और गंभीर असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर देखने को मिल रहा है। कच्चे तेल (Brent Crude Oil) की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में अचानक बड़ा उछाल देखा गया है, जिससे वैश्विक मुद्रास्फीति और सप्लाई चेन संकट गहराने का खतरा पैदा हो गया है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि हूतियों का यह कदम केवल एक क्षेत्रीय झड़प नहीं है, बल्कि यह लाल सागर (Red Sea) और फारस की खाड़ी के पूरे समुद्री व्यापार मार्ग को ठप करने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। यदि अमेरिका, सऊदी अरब और उनके सहयोगी देश हूती विद्रोहियों के खिलाफ कोई बड़ा जवाबी सैन्य ऑपरेशन शुरू करते हैं, तो पूरा पश्चिम एशिया एक ऐसे बहु-आयामी युद्ध की चपेट में आ सकता है, जिसके परिणाम पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी सिद्ध होंगे।