क्या सऊदी अरब और UAE के शासकों ने ट्रंप के दामाद को दिए थे अरबों रुपये
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और अमेरिकी सत्ता के गलियारों में इस समय एक ऐसी विस्फोटक खबर ने तहलका मचा रखा है, जिसने व्हाइट हाउस से लेकर खाड़ी देशों तक खलबली पैदा कर दी है। हाल ही में सामने आई एक बहुचर्चित किताब और मीडिया रिपोर्ट्स के दावे के अनुसार, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और उनके वरिष्ठ सलाहकार रहे जेरेड कुशनर का फोन कथित तौर पर हैक कर लिया गया था। इस फोन के डेटा और जासूसी खुलासों से यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि सऊदी अरब के वली अहद (Crown Prince) मोहम्मद बिन सलमान (MBS) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद (MBZ) द्वारा कुशनर को गुप्त रूप से भारी-भरकम धनराशि और निवेश के जरिए लाभ पहुंचाया गया था। इस खुलासे के बाद वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में भ्रष्टाचार और हितों के टकराव के गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
किताब और मीडिया रिपोर्ट्स में गुप्त बैंक खातों और अरबों के लेनदेन का दावा
मीडिया रिपोर्ट्स और एक नई आने वाली सनसनीखेज किताब के मुताबिक, जब जासूसी एजेंसियों या तकनीकी स्रोतों के जरिए जेरेड कुशनर के संचार माध्यमों और डिजिटल गतिविधियों को खंगाला गया, तो कई गुप्त विदेशी बैंक खातों के तार जुड़े मिले। दावों के अनुसार, इन खातों के जरिए अरबों डॉलर के ट्रांजैक्शन हुए हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा कथित तौर पर खाड़ी देशों यानी सऊदी अरब और यूएई के शीर्ष नेतृत्व से जुड़ा हुआ था। रिपोर्ट में यह आरोप लगाया गया है कि मध्य पूर्व की नीतियों को अपने पक्ष में मोड़ने और कूटनीतिक रूप से अपने प्रभाव का दायरा बढ़ाने के लिए इन खाड़ी देशों ने परोक्ष रूप से भारी वित्तीय फंड का इस्तेमाल किया। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका में राजनीतिक पारदर्शिता और विदेशी दखल को लेकर पहले से ही काफी गहमागहमी बनी हुई है।
जेरेड कुशनर और उनके वकीलों का कड़ा पलटवार: दावों को बताया मनगढ़ंत
इन तमाम गंभीर और विस्फोटक आरोपों के सामने आने के तुरंत बाद जेरेड कुशनर और उनके कानूनी सलाहकारों ने पूरी ताकत के साथ इन दावों को खारिज कर दिया है। कुशनर ने मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इन सभी रिपोर्टों को "पूरी तरह से पागलों जैसी बकवास" और "सरासर मनगढ़ंत" करार दिया है। उनके वकीलों का कहना है कि जिन गुप्त खातों और करोड़ों डॉलर के लेन-देन का दावा किया जा रहा है, उनका वास्तविकता से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है और इस तरह की कहानियां केवल राजनीतिक द्वेष और सनसनी फैलाने के लिए रची जा रही हैं। कुशनर के समर्थकों का तर्क है कि उनके द्वारा मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने के लिए किए गए 'अब्राहम अकॉर्ड' (Abraham Accords) और अन्य ऐतिहासिक समझौतों की सफलता से जलने वाले लोग इस प्रकार के बेबुनियाद आरोप लगाकर उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
मध्य पूर्व की भू-राजनीति और अमेरिका के बीच रिश्तों की अंदरूनी परतें
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस MBS और यूएई के MBZ के साथ ट्रंप परिवार और विशेषकर जेरेड कुशनर के संबंध हमेशा से वैश्विक मीडिया की सुर्खियों में रहे हैं। जब ट्रंप प्रशासन सत्ता में था, तब कुशनर ने अमेरिका की मध्य पूर्व नीति में एक केंद्रीय और बेहद शक्तिशाली भूमिका निभाई थी। उस दौरान भी विश्लेषकों द्वारा यह सवाल उठाया जाता रहा था कि खाड़ी देशों के साथ उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक संबंध किस हद तक अमेरिकी विदेश नीति को प्रभावित कर रहे हैं। इस ताजा खुलासे और किताब के अंशों ने पुरानी बहसों को एक बार फिर से जिंदा कर दिया है। भले ही कुशनर पक्ष ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया हो, लेकिन इस तरह की रिपोर्ट्स ने अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों के वित्तीय हित अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को कैसे प्रभावित करते हैं।
आने वाले दिनों में अमेरिकी राजनीति पर पड़ेगा इस विवाद का गहरा असर
यह विवाद ऐसे समय में तूल पकड़ रहा है जब अमेरिकी राजनीतिक मंच पर एक बार फिर से सरगर्मी तेज हो गई है। विपक्षी दलों और सरकारी watchdog संस्थाओं ने इस मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच की मांग उठानी शुरू कर दी है। जानकारों का मानना है कि भले ही यह मामला फिलहाल एक किताब के दावों और मीडिया रिपोर्ट्स तक सीमित हो, लेकिन आने वाले दिनों में यह अमेरिकी संसद और अदालतों में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। मध्य पूर्व के ताकतवर मुल्कों और अमेरिकी हुक्मरानों के बीच के वित्तीय समीकरणों की सच्चाई क्या है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इस खुलासे ने दुनिया भर के मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।