एलन मस्क ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट पर लगाई पाबंदी
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक कूटनीति और युद्धक्षेत्र में एक बहुत बड़ा मोड़ा गया है, जिसने पूरी दुनिया के सुरक्षा विश्लेषकों को चौंका दिया है। अरबपति एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) ने यूक्रेन की सेना द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे 'स्टारलिंक' और सैन्य ग्रेड 'स्टारशील्ड' (Starshield) सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं पर अचानक गति और उपयोग की पाबंदियां लगा दी हैं। इस फैसले के बाद यूक्रेनी सेना के ड्रोन ऑपरेशन्स, एयर डिफेंस सिस्टम और फ्रंटलाइन कम्यूनिकेशन पूरी तरह ठप पड़ गए, जिससे कीव को रूसी हमलों के सामने भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इस कदम से आगबबूला हुए राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने खुले तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि वाशिंगटन रूस के साथ मिलकर यूक्रेन के साथ विश्वासघात कर रहा है। इस पूरे ड्रामे ने दुनिया को दिखा दिया है कि कैसे एक निजी विदेशी कंपनी या महाशक्ति किसी भी देश के संचार तंत्र को पल भर में पंगु बना सकती है, जो भारत जैसे देश के लिए अपनी स्वदेशी तकनीक को मजबूत करने का बहुत बड़ा सबक है।
स्टारलिंक पर क्यों लगी पाबंदी और एलन मस्क-ट्रंप की क्या है दलील?
यूक्रेन की सेना के 7th एयर असॉल्ट कॉर्प्स और रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने खुलासा किया कि युद्ध के दौरान हाई-स्पीड पर चल रहे ड्रोन्स और मिसाइल ट्रैकिंग डिवाइसेज में स्टारलिंक सिग्नल अचानक 10 से 20 सेकंड के लिए कटने लगे। मस्क ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि स्टारलिंक एक कमर्शियल सेवा है जिसका इस्तेमाल आक्रामक सैन्य अभियानों के लिए नहीं किया जा सकता, जबकि सरकारी 'स्टारशील्ड' प्रणाली का नियंत्रण अमेरिकी सरकार और राष्ट्रपति के हाथों में है। असल में, डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस के साथ हाल ही में किए गए समझौतों और यूक्रेन को दी जाने वाली अमेरिकी सैन्य मदद को कम करने के संकेतों के बाद ही यह पाबंदी लागू की गई है। जेलेंस्की ने बेहद दर्दभरे अंदाज में कहा कि ट्रंप इतिहास के गलत पक्ष को चुन रहे हैं और अपने सलाहकारों के बहकावे में आकर यूक्रेन की पीठ में छुरा घोंप रहे हैं।
डिजिटल गुलामी का खतरा: भारत के लिए क्यों है यह सबसे बड़ी चेतावनी?
यूक्रेन के इस कड़वे अनुभव ने साबित कर दिया है कि किसी विदेशी तकनीक या निजी कंपनी पर राष्ट्रीय सुरक्षा और युद्धकालीन संचार के लिए निर्भर रहना कितना घातक हो सकता है। भारत के लिए यह घटनाक्रम एक बहुत बड़ी आंखें खोलने वाली चेतावनी (Eye-Opener) है। अगर भारत अपनी रक्षा ज़रूरतों या सैटेलाइट कम्यूनिकेशन (Satcom) के लिए एलन मस्क के स्टारलिंक या किसी विदेशी प्रोवाइडर पर आंख मूंदकर भरोसा करता है, तो भविष्य में किसी रणनीतिक संकट या कूटनीतिक गतिरोध के दौरान भारत के साथ भी ऐसा ही स्विच-ऑफ का खेल खेला जा सकता है। यही वजह है कि भारत सरकार अब अपने स्वदेशी सैटेलाइट नेटवर्क, इसरो (ISRO) के NavIC सिस्टम, और घरेलू दूरसंचार कंपनियों (जैसे जियो और एयरटेल सैटेलाइट) को प्राथमिकता दे रही है ताकि देश की रणनीतिक स्वायत्तता पर कभी कोई आंच न आ सके।