क्या शहबाज शरीफ और जनरल असीम मुनीर ने बेच दी पाकिस्तान की संप्रभुता

क्या शहबाज शरीफ और जनरल असीम मुनीर ने बेच दी पाकिस्तान की संप्रभुता

पड़ोसी देश पाकिस्तान में एक बार फिर राजनीतिक संकट और जन-आक्रोश अपने चरम पर पहुंच गया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के एक संयुक्त फैसले ने पूरे देश में भूचाल ला दिया है। खैबर पख्तूनख्वा (Khyber Pakhtunkhwa) प्रांत में अचानक आपातकाल (इमरजेंसी) और राज्यपाल शासन लागू करने के पीछे अब एक सनसनीखेज अमेरिकी सौदे का दावा किया जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और विपक्षी नेताओं का सीधा आरोप है कि पाकिस्तान के हुक्मरानों ने विदेशी ताकतों के आगे घुटने टेक दिए हैं और देश की संप्रभुता का सौदा कर दिया है। इस फैसले के बाद से न केवल खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय सरकार को निलंबित कर दिया गया है, बल्कि सड़कों पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।

खनिज संपदा और बहुमूल्य संसाधनों पर कब्जा: क्यों लगाया गया खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर राज?

इस पूरे विवाद की जड़ में खैबर पख्तूनख्वा में पाए जाने वाले खरबों डॉलर मूल्य के प्राकृतिक खनिज संसाधन और महत्वपूर्ण रेयर अर्थ एलिमेंट्स (Rare Earth Minerals) हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इमरान खान की पार्टी की प्रांतीय सरकार अमेरिकी कंपनियों और पश्चिमी निवेशकों को इन प्राकृतिक संसाधनों का मनमाना दोहन करने की अनुमति देने के सख्त खिलाफ थी। आरोप है कि शहबाज शरीफ सरकार और सेना प्रमुख ने विदेशी कर्ज चुकाने तथा अमेरिकी आर्थिक और कूटनीतिक समर्थन पाने के लिए एक बड़ा समझौता किया है। प्रांतीय सरकार के कड़े रुख के कारण कानून-व्यवस्था और आतंकवाद का बहाना बनाकर प्रांत में इमरजेंसी लगा दी गई ताकि केंद्र सरकार सीधे तौर पर अमेरिकी कंपनियों के साथ खनन समझौतों और लीज डील्स को बिना किसी स्थानीय संवैधानिक बाधा के अमलीजामा पहना सके।

'हमें दूसरा सर रेडक्लिफ नहीं चाहिए': पीटीआई और पश्तून नेताओं ने खोला असीम मुनीर के खिलाफ मोर्चा

संघीय सरकार और सेना के इस कदम ने पश्तून बहुल प्रांत में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। पीटीआई नेताओं और प्रांतीय वकीलों ने पेशावर से लेकर इस्लामाबाद तक इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पीटीआई नेताओं ने जनरल असीम मुनीर की तुलना औपनिवेशिक दौर के अंग्रेज अफसर सर रेडक्लिफ से करते हुए कहा कि वे देश को दोबारा बांटने और प्रांतीय स्वायत्तता पर डाका डालने का काम कर रहे हैं। नेताओं का कहना है कि खैबर पख्तूनख्वा की जनता का जनादेश छीनकर और जबरन सेना तैनात करके पाकिस्तान के संविधान की धज्जियां उड़ाई गई हैं। विपक्षी दलों ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान की राष्ट्रीय संप्रभुता को बेचकर किया जाने वाला कोई भी विदेशी समझौता वहां के नागरिक कभी स्वीकार नहीं करेंगे।

गृहयुद्ध और विखंडन की कगार पर पाकिस्तान: क्षेत्रीय सुरक्षा पर मंडराता बड़ा खतरा

खैबर पख्तूनख्वा में उपजे इस असंतोष ने पाकिस्तान को गृहयुद्ध जैसी खतरनाक स्थिति में ला खड़ा किया है। एक तरफ जहां तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे उग्रवादी संगठन पहले से ही सीमावर्ती इलाकों में लगातार हमले कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रांतीय स्वायत्तता छीनने से आम नागरिक भी सेना के सीधे विरोध में उतर आए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि शहबाज-मुनीर की जोड़ी ने विदेशी सौदों के चक्कर में स्थानीय आबादी और प्रांतीय सरकारों को इसी तरह नजरअंदाज करना जारी रखा, तो यह असंतोष 1971 जैसे किसी बड़े नए विखंडन की वजह बन सकता है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट के संभावित रुख और सड़कों पर जारी पश्तून विरोध प्रदर्शनों पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।