भारत के चीतल हिरण अमेरिका में मचा रहे तांडव, 158 साल पहले मिला था तोहफा
भारतीय उपमहाद्वीप के खूबसूरत और शांत जीव माने जाने वाले चित्तीदार चीतल (Axis Deer) इस समय अमेरिका के जंगलों, खेतों और कृषि क्षेत्रों में बड़ा संकट बन चुके हैं। लगभग 158 वर्ष पहले यानी 1868 के आसपास राजा कामेहामेहा पंचम को उपहार स्वरूप दिए गए और बाद में शिकारी फार्मों के लिए अमेरिका लाए गए ये हिरण आज वहां आक्रामक प्रजाति (Invasive Species) घोषित हो चुके हैं। प्राकृतिक शिकारियों की कमी, सालभर प्रजनन करने की क्षमता और प्रचुर भोजन के कारण इनकी आबादी लाखों में पहुंच गई है। अमेरिका के टेक्सस और हवाई जैसे राज्यों में ये हिरण स्थानीय पारिस्थिकी तंत्र, फसलों और स्वदेशी जीवों के लिए काल साबित हो रहे हैं।
158 साल पुराना इतिहास: कैसे पहुंचे अमेरिका और क्यों बने संकट?
इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि 19वीं सदी के मध्य में अंग्रेजों और भारतीय राजाओं द्वारा विदेशी भूमि पर चीतल भेजे गए थे। हवाई द्वीप के तत्कालीन राजा को यह तोहफा दिया गया था ताकि वहां शिकार और सुंदरता बढ़ सके। इसके बाद 1930 के दशक में टेक्सस के रेंच मालिकों ने बंद बाड़ों में शिकार के लिए इन्हें भारत से आयात किया। लेकिन समय के साथ बाढ़ और तूफान के कारण ये बाड़ों से निकलकर खुले जंगलों में फैल गए। अमेरिका का मौसम और प्रचुर घास इनके अनुकूल साबित हुई। भारत में बाघ, तेंदुए और शिकारियों के कारण इनकी आबादी संतुलित रहती है, लेकिन अमेरिका में इनका कोई प्राकृतिक शिकारी (Predator) न होने की वजह से इनकी वृद्धि दर अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई।
अमेरिकी कृषि और स्थानीय वन्यजीवों पर चीतल का भयानक प्रभाव
अमेरिका के टेक्सस हिल कंट्री और हवाई के माउई द्वीपों पर चीतल हिरणों की भीड़ ने तबाही मचा रखी है। ये हिरण स्थानीय सफेद पूंछ वाले हिरणों (White-tailed deer) का भोजन और पानी का स्रोत छीन रहे हैं। चीतल किसी भी प्रकार की घास, पत्तियां और छाल खाने में सक्षम होते हैं, जिससे स्थानीय वनस्पति पूरी तरह नष्ट हो रही है। किसान और पशुपालक इनसे सबसे ज्यादा परेशान हैं क्योंकि चीतल की झुंड फसलों को चर जाते हैं और खेतों की बाड़ तोड़ देते हैं। इसके अलावा सड़कों पर इनके अचानक आ जाने से रोजाना सैकड़ों भयानक कार दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिससे इंसानी जान-माल का भी भारी नुकसान हो रहा है।
अमेरिकी सरकार के उपाय और नियंत्रण की विफलता
हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि हवाई के गवर्नर को चीतल की बढ़ती आबादी के कारण आपातकाल तक घोषित करना पड़ा है। अमेरिकी पर्यावरण विभाग (US Fish and Wildlife Service) और टेक्सस वाइल्डलाइफ अथॉरिटी इन्हें नियंत्रित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। शिकारियों को बिना किसी दैनिक सीमा के चीतल मारने की खुली अनुमति दी गई है। व्यावसायिक स्तर पर इनके मांस (Venison) को बेचने को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि आबादी कम की जा सके। इसके बावजूद इनकी तेज प्रजनन दर के सामने ये सभी सरकारी प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।
पारिस्थितिक संतुलन का कड़वा सच और भविष्य की राह
यह घटनाक्रम दुनिया को यह संदेश देता है कि किसी भी जीव को उसके मूल प्राकृतिक आवास से निकालकर किसी दूसरे पारिस्थितिकी तंत्र में स्थापित करना कितना घातक हो सकता है। भारत में जहां चीतल जंगलों की सुंदरता और खाद्य श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, वहीं अमेरिका में यह एक गंभीर जैविक संकट बन चुके हैं। पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि जल्द ही कोई वैज्ञानिक और व्यापक नियंत्रण रणनीति नहीं अपनाई गई, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या अमेरिकी कृषि और स्वदेशी जैव विविधता के लिए अपूरणीय क्षति का कारण बन जाएगी।