पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवाद में 195% का भारी उछाल
पड़ोसी देश पाकिस्तान में आंतरिक आतंकवाद और अशांति का ग्राफ इस कदर बढ़ गया है कि वहां की सरकार और सेना के हाथ से नियंत्रण पूरी तरह छूटता नजर आ रहा है। पाकिस्तान के संवेदनशील प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवादी गतिविधियों और हमलों में हाल ही में रिकॉर्ड 195 प्रतिशत का भयानक इजाफा दर्ज किया गया है। प्रांत के भीतर लगातार हो रहे बम धमाकों, सुरक्षा बलों पर हमलों और अशांति ने पाकिस्तानी हुक्मरानों की नींद उड़ा रखी है। अपनी ही जमीन पर उग्रवाद और आतंकवाद पर लगाम लगाने में बुरी तरह विफल रहने के बाद, पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने हमेशा की तरह अपनी नाकामी का ठीकरा भारत के सिर फोड़ने की पुरानी और घिसी-पिसी चाल चली है। इस सनसनीखेज घटनाक्रम ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के दोहरे चरित्र और उसकी लाचारी को बेनकाब कर दिया है।
खैबर पख्तूनख्वा में बेकाबू हालात और चरमपंथियों का बढ़ता दायरा
पाकिस्तान का खैबर पख्तूनख्वा प्रांत इस समय बारूद के ढेर पर बैठा हुआ है। स्थानीय प्रशासन और खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में इस क्षेत्र के भीतर आतंकी हमलों की संख्या में लगभग 195% की अभूतपूर्व बढ़ोतरी देखने को मिली है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि पाकिस्तानी सेना और पुलिस बल आए दिन आतंकवादियों के आसान शिकार बन रहे हैं। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और अन्य विद्रोही गुटों ने सुरक्षा बलों की नाक में दम कर रखा है। प्रांत के कई इलाकों में अब पाकिस्तानी सरकार का प्रशासनिक नियंत्रण नाममात्र का रह गया है और आतंकवादियों ने खुलेआम अपनी पैठ मजबूत कर ली है। आम नागरिकों का जीवन नर्क बन चुका है और लोग लगातार खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं।
अपनी आंतरिक विफलताओं को छुपाने के लिए भारत विरोधी राग का पुराना पैंतरा
जब भी पाकिस्तान के भीतर हालात पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर होते हैं और वहां की सेना देश की अवाम को सुरक्षा देने में नाकाम साबित होती है, तो रावलपिंडी और इस्लामाबाद के हुक्मरानों को तुरंत भारत की याद आ जाती है। खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवाद के मामलों में आई इस 195% की बेतहाशा बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर ने अपनी झल्लाहट मिटाने के लिए भारत पर मनगढ़ंत और बेबुनियाद आरोप लगाने शुरू कर दिए। अपनी विफलताओं का ठीकरा भारत पर फोड़ते हुए उन्होंने भारत के खिलाफ जहर उगला और गीदड़ भभकियां दीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह और कुछ नहीं बल्कि पाकिस्तानी जनता का ध्यान भटकाने और अपनी खुफिया व सैन्य नाकामी को छुपाने का एक बेहद घटिया और पुराना हथकंडा है, जिसे दुनिया अब अच्छी तरह समझ चुकी है।
वैश्विक मंचों पर बेनकाब हो रहा पाकिस्तान का आतंकवाद समर्थक चेहरा
दुनियाभर के देश अब इस सच्चाई से अच्छी तरह वाकिफ हो चुके हैं कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद की फैक्टरी रहा है। खुद अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स यह कहती आई हैं कि पाकिस्तान ने जिस 'आतंकवाद के पालने' की नीति को वर्षों तक बढ़ावा दिया था, आज वही जहरीले सांप उसी के देश को डंस रहे हैं। खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान की सुलगती आग इसी गलत नीतियों का परिणाम है। ऐसे में, जब पश्चिमी देशों और वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान पर आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने का दबाव बढ़ता है, तो वहां के सैन्य जनरल भारत के खिलाफ निराधार बयानबाजी करके अपनी घरेलू जनता को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। भारत सरकार और कूटनीतिक जानकारों ने हमेशा से स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान जब तक अपनी सरजमीं से संचालित होने वाले आतंकवाद को पूरी तरह नेस्तनाबूद नहीं करता, तब तक उसकी इन खोखली धमकियों का कोई मतलब नहीं है।
भारत की मजबूत कूटनीति और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ हमेशा 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है। नई दिल्ली ने दुनिया के सामने बार-बार यह साबित किया है कि भारत क्षेत्रीय शांति का समर्थक है, लेकिन देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले किसी भी षड्यंत्र का मुंहतोड़ जवाब देना अच्छी तरह जानता है। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में भड़की हिंसा और वहां के जनरलों की बौखलाहट यह साफ दिखाती है कि पाकिस्तान अपने आंतरिक बोझ के तले खुद ही दबा जा रहा है। भारत के खिलाफ झूठे नैरेटिव गढ़ने से पाकिस्तान के हालात सुधरने वाले नहीं हैं, बल्कि इससे उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रही-सही किरकिरी ही हो रही है। आने वाले समय में पाकिस्तान की यह आंतरिक अस्थिरता और आतंकवाद का यह भयानक विस्फोट उसके अपने वजूद के लिए ही सबसे बड़ा खतरा साबित होने वाला है।