ओआईसी ने संयुक्त राष्ट्र का हवाला देकर कश्मीर पर उगला जहर

ओआईसी ने संयुक्त राष्ट्र का हवाला देकर कश्मीर पर उगला जहर

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर एक बार फिर भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने की ओछी हरकत सामने आई है। इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने एक बार फिर पाकिस्तान की शह पर कश्मीर का राग अलापा है और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का हवाला देते हुए तथाकथित 'आत्मनिर्णय के अधिकार' का समर्थन किया है। ओआईसी के इस बयान ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यह संगठन निष्पक्ष वैश्विक मंच होने के बजाय पाकिस्तान के हाथों की कठपुतली बनकर रह गया है। भारत इस तरह के बयानों को पहले ही सिरे से खारिज करता रहा है और इसे देश की संप्रभुता तथा आंतरिक मामलों में खुला हस्तक्षेप मानता है। जम्मू-कश्मीर में लगातार मजबूत हो रहे लोकतंत्र, शांति और विकास से बौखलाए पाकिस्तान समर्थित मंच वैश्विक समुदाय के सामने एक बार फिर बेनकाब हो चुके हैं।

इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) का पुराना और घिसा-पिटा प्रोपोगंडा

इस्लामिक सहयोग संगठन लंबे समय से पाकिस्तान के इशारे पर भारत विरोधी और भड़काऊ बयान जारी करता रहा है। ओआईसी के प्रतिनिधियों ने एक बार फिर पाकिस्तान के साथ अपनी बैठकों में कश्मीर के विशेष संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रस्तावों को आधार बनाने की बात कही है। इस तरह के बयानों का जमीन पर कोई वजूद नहीं है क्योंकि अनुच्छेद 370 के हटने के बाद से जम्मू-कश्मीर में विकास की एक नई बयार बह रही है। आतंकवाद की कमर टूट चुकी है और वहां की आम जनता लोकतांत्रिक प्रणालियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है। इसके बावजूद ओआईसी का बार-बार वही पुराना राग अलापना यह दर्शाता है कि यह संगठन जमीनी सच्चाइयों से कोसों दूर है और केवल कुछ खास देशों के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है।

पाकिस्तान की कूटनीतिक विफलता और ओआईसी का दुरुपयोग

पाकिस्तान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग पड़ चुका है। अपने देश की बदहाल अर्थव्यवस्था, आतंकवाद के वित्तपोषण और आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता से जनता का ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तानी हुक्मरान हर बार कश्मीर कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। ओआईसी जैसे मंचों का दुरुपयोग करके पाकिस्तान भारत के खिलाफ झूठा और भड़काऊ नैरेटिव गढ़ने की कोशिश करता रहता है। हालांकि, दुनिया के तमाम बड़े और जिम्मेदार देश अब पाकिस्तान की इन चालों को अच्छी तरह समझ चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय यह भली-भांति जानता है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और वहां के लोग शांति, समृद्धि और प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ चुके हैं, जिसे किसी भी बाहरी प्रोपोगंडा से डिगाया नहीं जा सकता है।

भारत का सख्त रुख और स्पष्ट कूटनीतिक जवाब

भारत सरकार ने हमेशा से यह स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा केंद्रशासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। भारत ने ओआईसी और पाकिस्तान जैसे मंचों को कई बार दो टूक जवाब दिया है कि देश के आंतरिक मामलों में किसी भी बाहरी संगठन या तीसरे पक्ष को टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। ओआईसी को भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने के बजाय अपने सदस्य देशों के मानवाधिकारों और आंतरिक संकटों पर ध्यान देना चाहिए। नई दिल्ली की मजबूत और आक्रामक विदेश नीति का ही असर है कि आज दुनिया का कोई भी बड़ा देश पाकिस्तान और ओआईसी के इन बेबुनियाद बयानों को तवज्जो नहीं देता है।

जम्मू-कश्मीर में बदलती तस्वीर और विकास के नए आयाम

ओआईसी के इन खोखले बयानों के विपरीत आज जम्मू-कश्मीर की जमीनी हकीकत पूरी तरह बदल चुकी है। पर्यटन के क्षेत्र में रिकॉर्ड तोड़ पर्यटकों का आना, शिक्षा और स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास होना, और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होना इस बात का प्रमाण है कि कश्मीर घाटी अब आतंकवाद के साये से बाहर निकलकर विकास के पथ पर दौड़ रही है। चुनाव के दौरान भारी मतदान ने यह साबित कर दिया है कि वहां की जनता अलगाववाद को नकार चुकी है और लोकतंत्र तथा शांति के साथ खड़ी है। ऐसे में ओआईसी द्वारा कश्मीरियों के अधिकारों की दुहाई देना केवल एक राजनीतिक पाखंड के सिवा कुछ नहीं है, जिसे भारत की जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय पूरी तरह से खारिज कर चुका है।