राफेल से होती थी तुलना, अब हंगरी में क्रैश हुआ यह घातक फाइटर जेट; बाल-बाल बचा पायलट

राफेल से होती थी तुलना, अब हंगरी में क्रैश हुआ यह घातक फाइटर जेट; बाल-बाल बचा पायलट

अंतरराष्ट्रीय रक्षा जगत और एविएशन सेक्टर से एक बेहद चौंकाने वाली बड़ी खबर सामने आ रही है। दुनिया भर में अपनी मारक क्षमता, आधुनिक तकनीक और बेजोड़ एयरक्राफ्ट इंजीनियरिंग के लिए मशहूर एक घातक फाइटर जेट अचानक यूरोप के आसमान में दुर्घटना का शिकार होकर क्रैश हो गया। इस खतरनाक हादसे के दौरान विमान का पायलट समय रहते इजेक्ट (Eject) होने में कामयाब रहा, जिससे उसकी जान बाल-बाल बच गई। इस लड़ाकू विमान की तुलना अक्सर दुनिया के बेहतरीन फाइटर जेट्स जैसे ‘राफेल’ (Rafale) से की जाती थी, ऐसे में इसके इस तरह अचानक दुर्घटनाग्रस्त होने से वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों के बीच हड़कंप मच गया है।

हंगरी के एयरबेस के पास हुआ खौफनाक हादसा

यह पूरा हादसा यूरोपीय देश हंगरी (Hungary) के एक सैन्य एयरबेस के पास उस दौरान पेश आया जब यह फाइटर जेट नियमित प्रशिक्षण उड़ान (Routine Training Flight) पर था। स्थानीय रक्षा सूत्रों और चश्मदीदों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद विमान में तकनीकी खराबी (Technical Malfunction) आ गई। पायलट ने स्थिति को भांपते हुए विमान को आबादी वाले क्षेत्र से दूर ले जाने की पूरी कोशिश की, लेकिन नियंत्रण पूरी तरह खो जाने के कारण यह विमान एक खुले मैदान या सुनसान इलाके में जोरदार धमाके के साथ नीचे आ गिरा। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि विमान के परखच्चे उड़ गए और मौके पर धुएं का गुबार उठने लगा।

राफेल जैसी खूबियों वाले इस जेट की दुर्घटना ने बढ़ाई चिंता

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस फाइटर जेट की डिजाइन, एवियोनिक्स और युद्धक क्षमताएं काफी हद तक आधुनिक राफेल विमानों जैसी ही मानी जाती हैं। एयरोस्पेस इंडस्ट्री में इस जेट को इसकी फुर्ती और सटीक निशाना लगाने की क्षमता के लिए विशेष स्थान प्राप्त है। ऐसे उच्च तकनीक वाले और सुरक्षित माने जाने वाले विमान का अचानक क्रैश हो जाना सैन्य निर्माताओं और वायु सेना के रखरखाव (Maintenance) पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या इस दुर्घटना के पीछे कोई यांत्रिक विफलता थी या फिर मौसम और सॉफ्टवेयर से जुड़ी कोई अन्य तकनीकी समस्या? इन तमाम पहलुओं की जांच के लिए हंगरी की वायु सेना ने एक उच्च स्तरीय तकनीकी जांच बोर्ड (Board of Inquiry) का गठन कर दिया है जो ब्लैक बॉक्स के आंकड़ों की समीक्षा कर रहा है।

पायलट की सूझबूझ और चमत्कारिक बचाव

इस भीषण हादसे के बीच सबसे राहत भरी बात यह रही कि फाइटर जेट के पायलट ने अंतिम क्षणों में अपनी असाधारण सूझबूझ का परिचय दिया। जैसे ही पायलट को यह अहसास हुआ कि विमान अब उनके नियंत्रण से पूरी तरह बाहर हो चुका है, उन्होंने बिना एक पल गंवाए इजेक्ट सीट (Ejection Seat) का बटन दबा दिया। पैराशूट की मदद से पायलट सुरक्षित रूप से जमीन पर उतरने में सफल रहे। हालांकि, उन्हें मामूली चोटें आई हैं और एहतियात के तौर पर तुरंत नजदीकी सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति पूरी तरह खतरे से बाहर बताई जा रही है। यदि पायलट थोड़ी भी देर करते, तो यह हादसा एक बड़े मानवीय जीवन के नुकसान में बदल सकता था।

वैश्विक रक्षा बाजार और वायु सेनाओं पर पड़ने वाले प्रभाव

इस दुर्घटना के बाद से उन तमाम देशों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं जो इस विशेष श्रेणी के लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल कर रहे हैं या इन्हें अपनी सेना में शामिल करने की योजना बना रहे हैं। रक्षा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि इस तरह के हादसों के बाद संबंधित एयरक्राफ्ट के पूरे बेड़े (Fleet) की गहन सुरक्षा जांच की जाती है, जिससे कुछ समय के लिए उनकी उड़ानों पर रोक लग सकती है। वैश्विक स्तर पर आधुनिक रक्षा उपकरणों की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए यह घटना निर्माताओं के लिए एक बड़ी चेतावनी साबित हुई है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह पूरी तरह साफ हो पाएगा कि इस घातक हादसे के पीछे आखिर असली तकनीकी वजह क्या रही थी।