पाकिस्तान ने खाड़ी में बढ़ाया अपना दबदबा, अब कुवैत के साथ कर ली बड़ी डील

पाकिस्तान ने खाड़ी में बढ़ाया अपना दबदबा, अब कुवैत के साथ कर ली बड़ी डील

गरीबी और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहे पाकिस्तान ने खाड़ी देशों में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। सऊदी अरब और तुर्की के साथ त्रिपक्षीय रक्षा साझेदारी को आगे बढ़ाने के बाद अब पाकिस्तान ने कुवैत के साथ औपचारिक रक्षा संधि की है।

दोनों देशों ने रणनीतिक और सैन्य संबंधों को विस्तार देने के लिए ‘प्रोटोकॉल एग्रीमेंट-2026’ पर हस्ताक्षर किए हैं। इस्लामाबाद में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के दौरान कुवैत के रक्षा मंत्री शेख अब्दुल्ला अली अब्दुल्ला अल-सालेम अल-सबाह और पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने इस द्विपक्षीय समझौते को अंतिम रूप दिया।

कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने इस समझौते को पश्चिम एशिया की क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण कदम बताया है। यह रक्षा समझौता आगामी पांच वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा और दोनों पक्षों की सहमति से इसका स्वतः विस्तार भी संभव होगा।

सैन्य प्रशिक्षण और खुफिया साझेदारी पर रहेगा मुख्य फोकस

इस नए रक्षा समझौते का मूल उद्देश्य दोनों मुल्कों के बीच रक्षा तंत्र को तकनीकी और रणनीतिक स्तर पर जोड़ना है। इसके तहत पाकिस्तानी सेना और कुवैती सशस्त्र बल नियमित संयुक्त सैन्य अभ्यास करेंगे और सैन्य शिक्षा के आदान-प्रदान को बढ़ावा देंगे।

दोनों देशों की सेनाएं लॉजिस्टिक्स सपोर्ट और खुफिया सूचनाओं को साझा करने पर भी सहमत हुई हैं। इसके अलावा पाकिस्तानी सैन्य प्रशिक्षक कुवैती सैनिकों को आधुनिक कॉम्बैट और सुरक्षा ऑपरेशंस का विशेष प्रशिक्षण देंगे, जिससे कुवैत के रक्षा बलों की क्षमता में इजाफा हो सके।

मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव के बीच समझौते की अहमियत

यह सैन्य सहयोग ऐसे नाजुक मोड़ पर सामने आया है जब पश्चिम एशिया में गंभीर सैन्य तनाव बना हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष का सीधा प्रभाव खाड़ी के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर पड़ा है। कुवैत के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को हुए नुकसान और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर मंडराते खतरे ने कुवैत की चिंताएं बढ़ा दी हैं क्योंकि उसका कच्चा तेल निर्यात काफी हद तक इसी समुद्री मार्ग से होता है। ऐसे अनिश्चित सुरक्षा माहौल में कुवैत अपने सुरक्षा विकल्पों में विविधता लाने के लिए पाकिस्तान के साथ नजदीकी बढ़ा रहा है।

खाड़ी देशों में पाकिस्तान का बढ़ता नेटवर्क और सऊदी-तुर्की गठजोड़

इस्लामाबाद पिछले कुछ समय से खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य कूटनीति को लगातार धार दे रहा है। इससे पहले पाकिस्तान ने सऊदी अरब और तुर्की के साथ मिलकर एक मजबूत रक्षा ढांचा तैयार किया था, जिसमें किसी एक देश पर हमले को सामूहिक सुरक्षा से जोड़ने जैसे कड़े प्रावधान शामिल किए गए थे। सऊदी अरब के साथ पुराने रक्षा समझौतों के बाद अब कुवैत को अपने नेटवर्क में शामिल करके पाकिस्तान अरब जगत में अपनी सैन्य और कूटनीतिक प्रासंगिकता को नए सिरे से स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

भारत की सुरक्षा और समुद्री रणनीति पर क्या होगा इसका प्रभाव?

सैन्य विश्लेषकों के अनुसार कुवैत और पाकिस्तान के बीच हुआ यह समझौता भारत की संप्रभुता के लिए कोई तात्कालिक खतरा पैदा नहीं करता है। सऊदी-तुर्की समझौते के विपरीत कुवैत के साथ किए गए इस करार में किसी भी प्रकार का 'म्युचुअल डिफेंस क्लॉज' (एक पर हमला सब पर हमला) शामिल नहीं है। यह समझौता मुख्य रूप से ट्रेनिंग, क्षमता निर्माण और लॉजिस्टिक्स तक ही सीमित है। हालांकि खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख समुद्री व्यापारिक मार्गों पर पाकिस्तान के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारतीय नौसेना और सुरक्षा रणनीतिकारों को अरब सागर और खाड़ी के शिपिंग रूट्स पर सतर्कता बनाए रखनी होगी ताकि रणनीतिक संतुलन भारत के पक्ष में बना रहे।

Tags: