बांग्लादेश में सियासी उलटफेर के बाद पाकिस्तान की बड़ी साजिश नाकाम

बांग्लादेश में सियासी उलटफेर के बाद पाकिस्तान की बड़ी साजिश नाकाम

बांग्लादेश में पिछले कुछ समय से चल रहे राजनीतिक उठापटक और सत्ता परिवर्तन के बाद दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में लगातार नए समीकरण बनते और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। इस बदलते घटनाक्रम के बीच एक बेहद चौंकाने वाली अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट सामने आई है, जिससे यह साफ हो गया है कि कैसे क्षेत्रीय प्रभुत्व और कूटनीतिक चालबाजियों के तहत बांग्लादेश को अस्थिर करने या वैश्विक सप्लाई चेन को बाधित करने के तमाम प्रयास किए जा रहे थे। इस पूरी कूटनीति के केंद्र में भारत का पड़ोसी और पारंपरिक रूप से भारत विरोधी रुख अपनाने वाला देश पाकिस्तान रहा है, जिसने अपनी गुप्त रणनीतियों के तहत बांग्लादेश को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में मिलने वाली जरूरी सामग्रियों और महत्वपूर्ण रसद आपूर्ति को रोकने के लिए खतरनाक खेल खेला था। हालांकि, भारत के कूटनीतिक सहयोग, रूस की दृढ़ इच्छाशक्ति और मजबूत अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स के आगे पाकिस्तान की यह तमाम कुटिल चालें पूरी तरह से नाकाम साबित हुईं। पाकिस्तान और उसके परदे के पीछे के आकाओं द्वारा बिछाए गए कूटनीतिक जाल को मात देते हुए रूस ने तमाम प्रतिबंधों और एयरस्पेस से जुड़े अवरोधों को दरकिनार करते हुए आखिरकार बांग्लादेश के रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए यूरेनियम की सुरक्षित खेप पहुंचा दी। इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आधुनिक वैश्विक राजनीति में एयरस्पेस और जियोपॉलिटिकल दबाव कितने मायने रखते हैं और कैसे तकनीकी तथा ऊर्जा सुरक्षा के मामलों में बड़ी महाशक्तियां अपने सामरिक हितों को साधने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं।

बांग्लादेश में सियासी बदलाव और पाकिस्तान की गुप्त साजिश का पर्दाफाश

जब से बांग्लादेश में तख्तापलट हुआ और वहां की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता छोड़कर देश छोड़ना पड़ा, तब से वहां की अंतरिम सरकार और देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार विदेशी ताकतों का साया मंडरा रहा है। पश्चिमी देशों और खाड़ी के कुछ कूटनीतिक गलियारों से यह खबरें लगातार आ रही थीं कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और वहां का सैन्य तंत्र बांग्लादेश की नई व्यवस्था का फायदा उठाकर अपनी जड़ें मजबूत करना चाहता है। पाकिस्तान का मुख्य उद्देश्य यह था कि किसी तरह से बांग्लादेश को भारत के प्रभाव क्षेत्र से दूर किया जाए और वहां चल रही महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजनाओं को बाधित किया जाए। इसी बड़ी साजिश के तहत, जब रूस से रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए यूरेनियम की खेप बांग्लादेश भेजी जा रही थी, तो उसे रोकने या उसमें भारी व्यवधान डालने के लिए पर्दे के पीछे से बड़े पैमाने पर लॉबिंग की गई। पाकिस्तान ने क्षेत्रीय स्तर पर अपने कूटनीतिक संपर्कों का इस्तेमाल करते हुए इस बात का पूरा प्रयास किया कि इस संवेदनशील सामग्री की ढुलाई में बाधा उत्पन्न हो, ताकि बांग्लादेश की ऊर्जा जरूरतें अधूरी रह जाएं और वहां आर्थिक संकट और अधिक गहरा जाए। इस नापाक मंसूबे के पीछे पाकिस्तान की यह सोच थी कि बांग्लादेश ऊर्जा के मोर्चे पर कमजोर होगा तो वह पूरी तरह से पश्चिम या अन्य बाहरी ताकतों पर निर्भर हो जाएगा, जिससे दक्षिण एशिया में भारत की रणनीतिक स्थिति को भी नुकसान पहुंचाया जा सके।

रूस और भारत के कूटनीतिक समन्वय से धराशायी हुई पाकिस्तानी चाल

पाकिस्तान की इस सुनियोजित साजिश की भनक जैसे ही मॉस्को और नई दिल्ली के रणनीतिकारों को लगी, उन्होंने तुरंत एक संयुक्त और ठोस कूटनीति के तहत इसका तोड़ निकालना शुरू कर दिया। रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र रूस के तकनीकी और वित्तीय सहयोग से बनाया जा रहा एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है, जिस पर रूस ने अरबों डॉलर का निवेश किया है। रूस किसी भी कीमत पर यह नहीं चाहता था कि उसकी इस फ्लैगशिप परियोजना में किसी भी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न हो, और न ही वह क्षेत्रीय भू-राजनीति के दबाव में आकर अपने सामरिक प्रोजेक्ट को अधूरा छोड़ सकता था। दूसरी ओर, भारत ने भी इस पूरे घटनाक्रम में अपनी स्थिति को बहुत ही परिपक्वता और दूरदर्शिता के साथ संभाला, क्योंकि भारत कभी नहीं चाहेगा कि उसके पड़ोसी देश में परमाणु सामग्री की सुरक्षा को लेकर कोई भी खतरा पैदा हो या वहां अराजकता फैले। जब पाकिस्तान और उसके सहयोगियों ने इस यूरेनियम की खेप को ले जाने वाले मालवाहक विमानों के लिए एयरस्पेस ब्लॉक करने या उसमें तकनीकी अड़ंगे डालने की कोशिश की, तो रूस ने अपने पारंपरिक और वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय एयर कॉरिडोर्स का इस्तेमाल किया। रूसी विदेश मंत्रालय और ऊर्जा निगम रोसाटोम ने तमाम बाधाओं को दरकिनार करते हुए अत्यधिक सुरक्षा के बीच यूरेनियम की खेप को उसके तय समय पर बांग्लादेश की सीमा तक पहुंचा दिया। इस पूरी प्रक्रिया में भारत के उस सामरिक और भौगोलिक सहयोग को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जिसने पूर्वी मोर्चे पर स्थिरता बनाए रखने में अपनी अहम भूमिका निभाई, जिससे पाकिस्तान के नापाक मंसूबे कागजों पर ही धरे के धरे रह गए।

एयरस्पेस ब्लॉक करने के दावों और अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्गों की असलियत

अंतरराष्ट्रीय मीडिया और रक्षा विश्लेषकों के बीच इस बात की बड़ी चर्चा है कि कैसे पाकिस्तान और कुछ अन्य पश्चिमी ताकतों ने मिलकर रूसी विमानों के लिए एयरस्पेस बंद करने या पाबंदियां लगाने का षड्यंत्र रचा था। आधुनिक उड्डयन और भू-राजनीतिक नियमों के अनुसार, किसी भी देश के ऊपर से गुजरने वाले एयरस्पेस को बंद करना या प्रतिबंधित करना एक बड़ा कूटनीतिक कदम माना जाता है, जिससे वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। पाकिस्तान ने अपनी सामरिक धौंस दिखाने और बांग्लादेश पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाने के उद्देश्य से यह संकेत देने की कोशिश की थी कि उसकी मर्जी के बिना दक्षिण एशियाई क्षेत्र में कोई भी भारी परिवहन विमान सुरक्षित आवाजाही नहीं कर सकता। लेकिन रूस एक ऐसी महाशक्ति है जो अपनी परमाणु और रक्षा सप्लाई चेन के मामलों में किसी भी देश की धौंस को कभी स्वीकार नहीं करती है। रूसी विमानों ने पाकिस्तान और अन्य पारंपरिक रूटों के अवरोधों को दरकिनार करते हुए मध्य एशिया और वैकल्पिक समुद्री तथा हवाई मार्गों का बेहतरीन तालमेल बिठाते हुए इस मिशन को शत-प्रतिशत सफलता के साथ पूरा किया। इस घटना ने यह भी उजागर कर दिया कि पाकिस्तान की कूटनीतिक ताकत अब केवल बयानों तक ही सीमित रह गई है, जबकि धरातल पर रूस और भारत जैसे देश मिलकर किसी भी बड़े संकट को आसानी से हल करने की क्षमता रखते हैं। इस प्रकार, एयरस्पेस ब्लॉक करने के तमाम हथकंडे पूरी तरह से फेल साबित हुए और रूस का विमान बिना किसी बड़ी रुकावट के ढाका के निकट अपनी मंजिल तक पहुंच गया।

रूपपुर परमाणु संयंत्र और दक्षिण एशिया की ऊर्जा सुरक्षा का भविष्य

रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र बांग्लादेश का अब तक का सबसे बड़ा और महत्वाकांक्षी ऊर्जा प्रोजेक्ट है, जिससे देश की एक बहुत बड़ी आबादी को बिजली मिलने की उम्मीद है। इस संयंत्र के चालू हो जाने से बांग्लादेश अपनी पारंपरिक कोयला और गैस आधारित ऊर्जा पर निर्भरता कम कर सकेगा और पर्यावरण के अनुकूल स्वच्छ ऊर्जा की तरफ एक बड़ा कदम बढ़ा पाएगा। ऐसे समय में जब बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पहले से ही विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रही है, ऊर्जा सुरक्षा उसके लिए जीवन-मरण का प्रश्न बन चुकी है। पाकिस्तान की यह साजिश थी कि इस यूरेनियम की आपूर्ति को रोककर या विलंब करवाकर इस प्रोजेक्ट को ठप कर दिया जाए, जिससे बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पूरी तरह से दबाव में आ जाए। लेकिन रूस द्वारा यूरेनियम की सुरक्षित सुपुर्दगी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बांग्लादेश की ऊर्जा जरूरतें अब अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत पूरी होकर रहेंगी। इस पूरी कूटनीतिक जंग में पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़ गया है, क्योंकि उसकी इस हरकत से यह साबित हो गया है कि वह पड़ोसी देशों में शांति और विकास देखने के बजाय केवल अस्थिरता और संकट पैदा करने की राजनीति में विश्वास रखता है। भविष्य के लिहाज से यह घटना दक्षिण एशिया के अन्य देशों को भी यह संदेश देती है कि बाहरी ताकतों के बहकावे में आकर अपनी क्षेत्रीय स्थिरता और विकास को दांव पर लगाना कितना खतरनाक साबित हो सकता है।