1 साल में 1 लाख यमनी सैनिकों को युद्ध में उतारने की तैयारी, मध्य पूर्व में मचेगा कोहराम

1 साल में 1 लाख यमनी सैनिकों को युद्ध में उतारने की तैयारी, मध्य पूर्व में मचेगा कोहराम

मध्य पूर्व यानी मिडिल ईस्ट के भू-राजनीतिक गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली और सनसनीखेज अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट सामने आ रही है, जिसने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। पिछले कुछ वर्षों से यमन के गृहयुद्ध और लाल सागर के जलमार्गों पर आतंक का पर्याय बन चुके हूती विद्रोहियों (Houthis) के बढ़ते हमलों से परेशान होकर अब सऊदी अरब ने उनके खिलाफ एक बहुत बड़े और निर्णायक सैन्य अभियान का गुप्त प्लान तैयार कर लिया है। खुफिया रिपोर्ट्स और रक्षा सूत्रों के हवाले से यह बड़ा खुलासा हुआ है कि सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने आगामी एक से डेढ़ साल के भीतर लगभग 1 लाख प्रशिक्षित यमनी सैनिकों को सीधे तौर पर मैदान-ए-जंग में उतारने की विशाल योजना बनाई है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन से तैयार किए जा रहे इस भारी-भरकम सैन्य बल का एकमात्र और मुख्य उद्देश्य यमन की सरजमीं से हूती विद्रोहियों के प्रभाव को पूरी तरह से नेस्तनाबूद करना और क्षेत्रीय व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित करना है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब हूती लड़ाके लगातार सऊदी अरब की तेल रिफाइनरियों, सामरिक ठिकानों और लाल सागर से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल जहाजों को अपने मिसाइल व ड्रोन हमलों का निशाना बना रहे हैं। इस मेगा मिलिट्री प्लान के सामने आने के बाद से ही अरब जगत और पश्चिमी देशों की सरकारों में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि यदि यह युद्ध बड़े पैमाने पर छिड़ता है, तो इसके भू-राजनीतिक और आर्थिक परिणाम पूरी दुनिया पर भारी पड़ सकते हैं।

सऊदी अरब की यह बड़ी रणनीति और हूती विद्रोहियों का बढ़ताखतरनाक आतंक

सऊदी अरब और यमन के बीच का यह संघर्ष कोई नया नहीं है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में हूती विद्रोहियों ने जिस तरह से अपनी सैन्य क्षमताओं और मिसाइल स्ट्राइक का दायरा बढ़ाया है, उसने रियाद की सुरक्षा व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। यमन के एक बड़े हिस्से पर कब्जा जमाए बैठे हूती विद्रोही लगातार ईरान समर्थित प्रॉक्सी वार के जरिए सऊदी सीमाओं और वैश्विक आर्थिक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करने का काम कर रहे हैं। लाल सागर और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों पर उनके आए दिन होने वाले हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार को खरबों डॉलर का नुकसान हो चुका है। सऊदी अरब और उसके सहयोगी देश अब यह अच्छी तरह समझ चुके हैं कि केवल रक्षात्मक रुख अपनाने या कूटनीतिक वार्ताओं से इन जिद्दी विद्रोहियों पर लगाम नहीं लगाई जा सकती है। इसी कड़वी सच्चाई को स्वीकार करते हुए सऊदी हुक्मरानों ने अब आक्रामक रुख अख्तियार करने का मन बना लिया है। इस नई सैन्य योजना के तहत यमन के भीतर ही एक मजबूत, अनुशासित और भारी हथियारों से लैस यमनी नेशनल आर्मी का गठन किया जा रहा है, जिसे सऊदी अरब द्वारा आधुनिक हथियार, अत्याधुनिक प्रशिक्षण और खुफिया सहायता प्रदान की जाएगी ताकि वे हूतियों को सीधे मैदान में चुनौती दे सकें।

एक लाख यमनी सैनिकों की नई फौज का गठन और ट्रेनिंग का ब्लूप्रिंट

इस विशाल सैन्य योजना के तहत सऊदी सैन्य अधिकारियों और यमनी रक्षा मंत्रालय के बीच उच्च स्तरीय समन्वय स्थापित किया गया है, जिसके अंतर्गत लगभग 1,00,000 समर्पित सैनिकों की एक नई रेजिमेंट तैयार की जा रही है। इन सैनिकों को आधुनिक युद्धकौशल, छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare), एंटी-ड्रोन डिफेंस सिस्टम और उन्नत हथियारों के संचालन का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। रियाद प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि इस बार के सैन्य अभियान में साजो-सामान या रसद की कोई कमी न रहे, क्योंकि पिछली लड़ाइयों में यमनी सरकारी बलों को कई बार संसाधनों के अभाव के कारण पीछे हटना पड़ा था। इस एक लाख सैनिकों की फौज को कई रणनीतिक डिवीजनों में बांटा जाएगा, जो यमन के पहाड़ी इलाकों, तटीय क्षेत्रों और हूतियों के मुख्य गढ़ माने जाने वाले सादा (Sa'dah) प्रांत पर एक साथ चारों तरफ से चौतरफा हमला बोलेंगे। इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में आधुनिक डिजिटल वॉरफेयर और इंटेलिजेंस गैदरिंग को भी प्राथमिकता दी गई है, ताकि हूती विद्रोहियों के छिपने के ठिकानों और उनके ड्रोन लॉन्च पैड्स को सटीक निशाना बनाया जा सके। इस प्रकार, सऊदी अरब इस बार कोई भी कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहता है और वह यमन की धरती पर एक ऐसा निर्णायक युद्ध लड़ने की तैयारी में है जो हमेशा के लिए हूती आतंक के अध्याय को समाप्त कर सके।

क्षेत्रीय भू-राजनीति, ईरान की भूमिका और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर प्रभाव

सऊदी अरब द्वारा इतनी बड़ी सैन्य ताकत को मैदान में उतारने के इस कदम के पीछे एक बहुत बड़ा भू-राजनीतिक गणित काम कर रहा है, जिसका सीधा संबंध ईरान के साथ है। हूती विद्रोहियों को वैचारिक, वित्तीय और सैन्य रूप से तेहरान यानी ईरान का खुला समर्थन प्राप्त रहा है, और ईरान इस प्रॉक्सी नेटवर्क के जरिए मध्य पूर्व में अपनी धमक बनाए रखना चाहता है। सऊदी अरब के इस बड़े कदम से यह भी साफ हो गया है कि रियाद अब ईरान समर्थित ताकतों को और अधिक रियायत देने के मूड में नहीं है। हालांकि, कुछ अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिज्ञों का यह भी मानना है कि यदि 1 लाख सैनिकों का यह महा-अभियान शुरू होता है, तो इससे यमन का मानवीय संकट और अधिक गहरा सकता है, जिससे लाखों बेकसूर नागरिकों को विस्थापन और भुखमरी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, वैश्विक ऊर्जा बाजार और कच्चे तेल की कीमतों पर भी इस संभावित युद्ध का गहरा असर पड़ सकता है, क्योंकि सऊदी अरब की तेल आधारित अर्थव्यवस्था इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की लंबी अस्थिरता को बर्दाश्त नहीं कर सकती है। यही कारण है कि अमेरिका और यूरोपीय देश भी इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद बारीकी से नजर बनाए हुए हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस सैन्य कार्रवाई से वैश्विक तेल आपूर्ति पर कोई स्थायी संकट न आए।

आने वाले समय में युद्ध के परिणाम और शांति की उम्मीदों का भविष्य

जैसे-जैसे सऊदी अरब के इस बड़े सैन्य प्लान की परतें खुल रही हैं, वैसे-वैसे यमन के राजनीतिक गलियारों और विद्रोही शिविरों में भी खलबली मच गई है। हूती नेतृत्व ने सऊदी अरब की इस चेतावनी और नई सैन्य तैयारियों के जवाब में अपनी ओर से भी जवाबी हमलों की धमकी दी है, जिससे आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में भयंकर रक्तपात और जंग छिड़ने की आशंकाएं और अधिक बढ़ गई हैं। हालांकि, सऊदी नीति निर्माताओं का मानना है कि यदि हूतियों को सैन्य रूप से निर्णायक शिकस्त नहीं दी गई, तो वे कभी भी शांति समझौते की मेज पर नहीं आएंगे और क्षेत्र में आतंकवाद का यह साया हमेशा मंडराता रहेगा। यमन के आम नागरिक, जो पिछले एक दशक से अधिक समय से गृहयुद्ध की विभीषिका झेल रहे हैं, वे अब इस अंतहीन संघर्ष के स्थायी समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं। चाहे यह युद्ध विनाशक साबित हो या फिर शांति स्थापना का जरिया बने, लेकिन इतना तय है कि सऊदी अरब का यह 1 लाख सैनिकों को उतारने का प्लान आने वाले महीनों में मध्य पूर्व की राजनीति की दिशा और दशा दोनों को पूरी तरह से बदलकर रख देगा, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।