यूएनजीए के मंच पर अमेरिका और ईरान के बीच हुई गोपनीय और हाई-लेवल बैठक

यूएनजीए के मंच पर अमेरिका और ईरान के बीच हुई गोपनीय और हाई-लेवल बैठक

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के सबसे बड़े मंच संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठकों के बीच से एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। वैश्विक राजनीति में दशकों से एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जाने वाले अमेरिका और ईरान के बीच न्यूयॉर्क में एक उच्चस्तरीय और बेहद गोपनीय बैठक आयोजित की गई। इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग में ईरान के शीर्ष राजनयिक और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी प्रतिनिधियों स्टीवन विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ करीब तीन घंटे तक लंबी और मैराथन बातचीत की। इस गुप्त बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु मध्य पूर्व का तनाव और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा रहा है। ईरान की तरफ से इस बैठक में अपनी कुछ कड़ी शर्तें रखी गई हैं, जिसके बाद वैश्विक भू-राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है।

यूएनजीए के इतर हुई इस गुप्त और हाई-लेवल बैठक के मायने

संयुक्त राष्ट्र महासभा का सत्र भले ही औपचारिक भाषणों और वैश्विक मंचों पर एक-दूसरे पर बयानबाजी के लिए जाना जाता है, लेकिन इसके पीछे पर्दे के पीछे चलने वाली कूटनीति हमेशा से इतिहास बदलती रही है। अमेरिका और ईरान के बीच प्रत्यक्ष तौर पर उच्च स्तर की बातचीत लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ी थी। ऐसे में अराघची की अमेरिकी दल के साथ यह तीन घंटे लंबी बैठक इस बात का साफ संकेत देती है कि दोनों देश परदे के पीछे से किसी बड़े भू-राजनीतिक गतिरोध को सुलझाने की कोशिश में जुटे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे व्यस्त और संवेदनशील तेल व्यापार मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग पर किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला सकता है, और यही वजह है कि अमेरिका और ईरान के बीच इस सामरिक बिंदु पर सीधी बात होना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए सबसे बड़ी खबर बन गया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और ईरान की तरफ से रखी गई शर्तें

इस मैराथन बैठक के दौरान ईरानी प्रतिनिधि अब्बास अराघची ने अमेरिका के सामने स्पष्ट कर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिरता और जहाजों की आवाजाही तभी पूरी तरह सुरक्षित रह सकती है जब क्षेत्रीय प्रतिबंधों में ढील दी जाए और ईरान के रणनीतिक हितों का सम्मान किया जाए। ईरान लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि अमेरिकी नौसेना की खाड़ी देशों में मौजूदगी और आर्थिक प्रतिबंधों के कारण वहां अनावश्यक तनाव पैदा होता है। अराघची ने स्पष्ट शब्दों में तेहरान की शर्तें रखी हैं कि यदि अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगी क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर वास्तव में गंभीर हैं, तो उन्हें एकतरफा दबाव की राजनीति को छोड़कर कूटनीतिक और आर्थिक समझौतों का रास्ता अपनाना होगा। अमेरिकी प्रतिनिधियों ने ईरान के इन प्रस्तावों को सुना है और इसे अपने शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने का भरोसा दिया है, हालांकि इस पर आधिकारिक बयान आना अभी बाकी है।

मध्य पूर्व के बदलते कूटनीतिक समीकरण और अमेरिका का रुख

पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया (Middle East) के हालात बेहद विस्फोटक हो चुके हैं। गाजा संघर्ष, लेबनान संकट और लाल सागर से लेकर फारस की खाड़ी तक मंडराते युद्ध के बादलों ने दुनिया भर के देशों की नींद उड़ा दी है। ऐसे में अमेरिका का ईरान के साथ सीधे इस स्तर पर संवाद करना यह बताता है कि बाइडन प्रशासन या अमेरिकी रणनीतिकार युद्ध के दायरे को और अधिक फैलने से रोकने के लिए हरसंभव कूटनीतिक हथकंडे अपना रहे हैं। अमेरिकी प्रतिनिधि स्टीवन विटकॉफ और जेरेड कुशनर की इस बैठक में उपस्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि इसमें केवल पारंपरिक कूटनीति ही नहीं, बल्कि आर्थिक और व्यापारिक गलियारों की सुरक्षा से जुड़े बड़े कारोबारी और रणनीतिक हित भी जुड़े हुए हैं। अमेरिका यह अच्छी तरह जानता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में यदि ईरान ने किसी भी तरह का बड़ा व्यवधान पैदा किया, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था और आगामी राजनीतिक समीकरणों पर पड़ेगा।

वैश्विक शांति और भविष्य की कूटनीतिक वार्ताओं की दिशा

अमेरिका और ईरान के बीच संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई यह तीन घंटे की उच्चस्तरीय बैठक आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति का रुख तय करने में बहुत बड़ी भूमिका निभा सकती है। हालांकि दोनों देशों के बीच दशकों पुराना अविश्वास रातों-रात खत्म नहीं हो सकता, लेकिन इस तरह के संवाद चैनल का खुलना इस बात का प्रमाण है कि कूटनीति अभी भी जिंदा है। यदि ये गुप्त वार्ताएं सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती हैं, तो न केवल फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम होगा, बल्कि ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में ढील और परमाणु समझौते (JCPOA) को पुनर्जीवित करने की दिशा में भी कोई बड़ा रास्ता निकल सकता है। पूरी दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका इस ईरानी शर्त पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या यह बैठक आने वाले दिनों में किसी बड़े शांति समझौते की नींव साबित होगी।