भारतीयों से ज्यादा थे पाकिस्तानी', ध्रुव राठी के लंदन में प्रदर्शन पर BJP नेता का बड़ा दावा
लंदन के ऐतिहासिक पार्लियामेंट स्क्वायर पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन को लेकर भारत से लेकर ब्रिटेन तक सियासी पारा चढ़ गया है। भारतीय चुनाव प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित इस प्रदर्शन के बाद बीजेपी के ओवरसीज नेताओं ने इस पर तीखे हमले बोले हैं। ब्रिटेन में बीजेपी के ओवरसीज विंग से जुड़े नेता कुलदीप सिंह शेखावत ने दावा किया है कि इस विरोध प्रदर्शन में शामिल भीड़ में भारतीय प्रवासियों की संख्या बहुत कम थी, जबकि पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़े लोगों की मौजूदगी कहीं ज्यादा देखी गई। हालांकि, बीजेपी नेता ने इस दावे के पक्ष में कोई पुख्ता सबूत या दस्तावेज पेश नहीं किए हैं।
लंदन में ध्रुव राठी का प्रदर्शन और 'वोट चोरी' का मुद्दा
ध्रुव राठी ने लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर पर 'स्टॉप वोट थेफ्ट' और लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर इस प्रदर्शन का आह्वान किया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने भारतीय चुनावी व्यवस्था में हेरफेर के आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। ध्रुव राठी ने इसे 'अंतरराष्ट्रीय डंका' बजाने की पहल बताते हुए विदेशों में रह रहे भारतीयों से लोकतंत्र के समर्थन में आवाज उठाने की अपील की थी। इस आयोजन के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के वीडियो वायरल हुए, जिनमें अलग-अलग दावों को लेकर बहस छिड़ गई।
बीजेपी नेता का बड़ा आरोप: "भीड़ में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी शामिल थे"
बीजेपी नेता कुलदीप सिंह शेखावत ने एक इंटरव्यू के दौरान आरोप लगाया कि इस प्रदर्शन को भारत विरोधी ताकतों द्वारा बढ़ावा दिया गया था। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद अधिकांश लोग पाकिस्तान और बांग्लादेश से थे, जिनमें से कुछ पूर्व में अवैध रूप से भारत में रहने से जुड़े रहे हैं। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि विदेश में इस तरह के बड़े प्रदर्शन का खर्च कौन उठा रहा है और इसके पीछे की वित्तीय व्यवस्था क्या है? लेकिन इसके साथ ही शेखावत ने खुद यह स्वीकार किया कि उनके पास इन दावों और वित्तीय आरोपों का फिलहाल कोई आधिकारिक या प्रत्यक्ष सबूत मौजूद नहीं है।
भारतीय समुदाय का जवाबी प्रदर्शन और कूटनीतिक असर की चिंता
बीजेपी समर्थक प्रवासी भारतीयों का कहना है कि उन्होंने इस आयोजन के जवाब में अचानक एक काउंटर-प्रोटेस्ट आयोजित किया, ताकि भारत की छवि को नुकसान न पहुंचे। बीजेपी नेताओं का तर्क है कि भारत के आंतरिक चुनावी और संवैधानिक मुद्दों को सात समंदर पार ब्रिटेन की सड़कों पर घसीटने से भारत-यूके (India-UK) के राजनयिक और द्विपक्षीय संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
पक्ष-विपक्ष की बहस और सोशल मीडिया पर घमासान
इस पूरी घटना के बाद इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ध्रुव राठी के प्रशंसकों और उनके आलोचकों के बीच तीखी जंग छिड़ी हुई है। समर्थकों का कहना है कि प्रवासी नागरिकों को अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार है, जबकि आलोचकों का मानना है कि विदेशी सरजमीं का इस्तेमाल भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों को कमजोर करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। बिना किसी सबूत के लगाए गए इन राजनीतिक आरोपों ने इस मुद्दे को और अधिक तूल दे दिया है।