कच्चे तेल की कीमतों में आएगी भारी गिरावट...अमेरिका और ईरान महाडील पर हुए राजी, होर्मुज जलडमरूमध्य से हटेगी नाकेबंदी और परमाणु हथियारों पर झुका तेहरान
पिछले काफी समय से पश्चिम एशिया में जारी भीषण सैन्य संघर्ष और युद्ध की विभीषिका के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद राहत भरी और सबसे बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को रोकने के लिए दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है। ताजा अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के मुताबिक, अमेरिकी और ईरानी अधिकारी एक दूरगामी 60 दिनों के समझौता ज्ञापन (MoU) को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए राजी हो गए हैं। वाशिंगटन के उच्च पदस्थ सूत्रों ने इस बेहद गोपनीय समझौते के मसौदे की पुष्टि की है। अब इस महाडील को अंतिम रूप देने और युद्ध पर पूरी तरह से विराम लगाने के लिए केवल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आखिरी हस्ताक्षरों की औपचारिकता बाकी रह गई है। अगर डोनाल्ड ट्रंप इस पर अपनी अंतिम मुहर लगा देते हैं, तो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में जारी जानलेवा तनाव हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दोबारा खुलने से भारत को मिलेगी बड़ी राहत, पेट्रोल-डीजल की कीमतें होंगी कम
इस ऐतिहासिक शांति समझौते का सबसे बड़ा और मुख्य बिंदु सामरिक रूप से संवेदनशील 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही के लिए दोबारा पूरी तरह से खोलना है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह खबर भारत के आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से सबसे महत्वपूर्ण साबित होने वाली है। ईरान युद्ध के कारण इस प्रमुख समुद्री रास्ते के बंद होने से पूरी दुनिया में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई ठप पड़ गई थी, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट चरम पर पहुंच गया था। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) के दाम आसमान छू रहे थे, जिसके दबाव में भारतीय तेल कंपनियों को भी घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ानी पड़ी थीं। होर्मुज जलडमरूमध्य से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही दोबारा सुरक्षित शुरू होने से भारत के एनर्जी सेक्टर पर बना भारी दबाव तुरंत खत्म हो जाएगा। आपको बता दें कि इस युद्ध के भड़कने से पहले पूरी दुनिया के कुल तेल और गैस व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा अकेले इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता था, जिसे ईरान पर अमेरिकी हमलों के बाद तेहरान ने ब्लॉक कर दिया था और बदले में अमेरिकी नौसेना ने भी वहां पूरी तरह नाकेबंदी कर दी थी।
होर्मुज में नहीं लगेगा कोई गुंडा टैक्स, 30 दिनों के भीतर बारूदी सुरंगें साफ करेगा ईरान
अमेरिकी रक्षा और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस नए प्रस्तावित एमओयू के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों को बिना किसी सैन्य या कूटनीतिक रोक-टोक के स्वतंत्र रूप से गुजरने की आजादी दी जाएगी। अमेरिका ने पूरी तरह साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय जहाजों से किसी भी प्रकार का अवैध टोल टैक्स (गुंडा टैक्स) वसूलने की इजाजत नहीं होगी और न ही जहाजों को डराया-धमकाया जाएगा। इसके बदले में ईरान को अगले 30 दिनों के भीतर इस पूरे समुद्री इलाके में बिछाई गई अपनी सभी घातक नौसैनिक बारूदी सुरंगों (Naval Mines) को पूरी तरह से हटाकर रास्ता साफ करना होगा। जैसे ही ईरान अपनी इन प्रतिबद्धताओं को पूरा करेगा, अमेरिकी नौसेना भी ईरानी बंदरगाहों पर की गई अपनी सख्त आर्थिक और सैन्य नाकेबंदी को चरणबद्ध तरीके से धीरे-धीरे पूरी तरह हटा लेगी।
परमाणु हथियारों से तौबा करने को तैयार हुआ ईरान, यूरेनियम भंडार पर होगी सीधी बात
इस शांति समझौते के मसौदे में जो सबसे चौंकाने वाली और ऐतिहासिक बात सामने आई है, वह यह है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय मंच पर परमाणु हथियार न बनाने और अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को सीमित करने की लिखित प्रतिबद्धता देने पर सहमत हो गया है। समझौता ज्ञापन के आधिकारिक रूप से लागू होने के बाद शुरुआती 60 दिनों तक दोनों परमाणु विशेषज्ञों के बीच इस विषय पर सघन बातचीत का दौर चलेगा। पहले चरण की हाई-लेवल मीटिंग्स में मुख्य रूप से ईरान के पास मौजूद अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के विशाल भंडार के भविष्य को तय करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके बदले में सुपरपावर अमेरिका भी ईरान पर लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में बड़ी ढील देने, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बैंकों में जब्त किए गए ईरान के अरबों डॉलर के फंड को वापस रिलीज करने और मानवीय सहायता के साथ-साथ जरूरी जीवनरक्षक उत्पादों को तेहरान तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए एक विशेष कूटनीतिक प्लान तैयार करने पर राजी हुआ है।
कैबिनेट मीटिंग में बोले डोनाल्ड ट्रंप: अगर ईरान ने डील नहीं मानी, तो कर देंगे पूरी तरह खत्म
वैश्विक स्तर पर डील फाइनल होने की सकारात्मक खबरों के बीच अब भी इस महासमझौते पर पूरी तरह संकट के बादल छंटे नहीं हैं। व्हाइट हाउस में आयोजित एक बेहद महत्वपूर्ण कैबिनेट मीटिंग के दौरान पत्रकारों से तीखे संवाद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और युद्ध मंत्री (रक्षा मंत्री) पीट हेगसेथ ने स्पष्ट संकेत दिए कि अगर ईरान ने ऐन वक्त पर चालाकी दिखाई या समझौता करने से पीछे हटा, तो अमेरिकी सेना के हमले पहले से कहीं ज्यादा घातक और तेज कर दिए जाएंगे। डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया के सामने बेहद कड़े लहजे में पीट हेगसेथ की तरफ इशारा करते हुए कहा कि अगर ईरान के साथ यह समझौता सफल नहीं हुआ, तो मेरे बाईं ओर बैठा यह आदमी उन्हें धरती से पूरी तरह खत्म कर देगा। इसी बैठक के दौरान विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कूटनीतिक प्रगति की बात स्वीकार करते हुए कहा कि मामले में कुछ सकारात्मक विकास हुआ है और अगले कुछ घंटे बेहद निर्णायक रहने वाले हैं। रूबियो ने यह भी साफ किया कि समझौते पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सटीक रूप से कब दस्तखत करेंगे, इसकी समयसीमा अभी तय नहीं की जा सकती।
ईरानी अर्थव्यवस्था को आजाद कराने का आखिरी मौका, कोई गुप्त शर्त नहीं होगी शामिल
इस महासौदे के बीच एक शीर्ष अमेरिकी अधिकारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह प्रस्तावित शांति समझौता असल में ईरान के लिए अपनी बर्बाद हो चुकी अर्थव्यवस्था को दोबारा वैश्विक मंच पर आजाद कराने का एक शानदार और आखिरी मौका है। उन्होंने कहा कि ईरानी शासन व्यवस्था के भीतर भी कुछ ऐसे समझदार लोग मौजूद हैं जो भली-भांति समझते हैं कि युद्ध के रास्ते को छोड़कर एक अलग और शांतिपूर्ण दिशा में आगे बढ़ना ही उनके देश के हित में है। अमेरिकी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को आश्वस्त करते हुए इस बात पर विशेष जोर दिया है कि इस पूरे शांति समझौते में प्रतिबंधों को हटाने या किसी भी प्रकार की आर्थिक रियायतें देने से जुड़ी कोई भी छिपी हुई या गुप्त शर्त (Secret Clause) शामिल नहीं की गई है। वाशिंगटन ने सीधे शब्दों में तेहरान को संदेश दिया है कि ईरानी पक्ष शांति के लिए जितना अधिक त्याग करने और कदम बढ़ाने को तैयार होगा, अमेरिका की तरफ से उन्हें आर्थिक और कूटनीतिक मोर्चे पर उतना ही बड़ा फायदा और रियायतें दी जाएंगी।