अल्बानिया में ट्रंप के दामाद के $1.4 बिलियन प्रोजेक्ट से भड़की भीषण राजनीतिक आग
दक्षिण-पूर्वी यूरोपीय देश अल्बानिया में इस समय अभूतपूर्व राजनीतिक और सामाजिक संकट पैदा हो गया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और उनकी पत्नी इवांका ट्रंप से जुड़ी एक अरबों डॉलर की रियल एस्टेट डील ने पूरे देश में विरोध की ऐसी लहर पैदा कर दी है, जिससे सरकार की नींव हिल गई है। साज़ान द्वीप (Sazan Island) और ज़्वर्नेक (Zvërnec) के संरक्षित तटीय क्षेत्रों में $1.4 बिलियन की लागत से बनने वाले अल्ट्रा-लग्जरी रिज़ॉर्ट प्रोजेक्ट को लेकर देश की राजधानी तिराना (Tirana) सहित कई प्रमुख शहरों में हिंसक झड़पें और भारी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस विवाद ने पिछले 13 वर्षों से देश के प्रधानमंत्री पद पर काबिज एदी रामा (Edi Rama) के सामने सबसे बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है।
संरक्षित तटीय पर्यावरण और राष्ट्रीय धरोहर का सौदा: 'फ्लेमिंगो क्रांति' का उभार
विवाद की सबसे बड़ी वजह इस प्रोजेक्ट का स्थान है। अल्बानिया के पर्यावरणविदों, स्थानीय नागरिकों और विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार ने इस रिज़ॉर्ट को मंजूरी देने के लिए पर्यावरण नियमों को ताक पर रख दिया। जिस क्षेत्र में रिसॉर्ट का निर्माण प्रस्तावित है, वह दुर्लभ पक्षियों, फ्लेमिंगो (Flamingos) और समुद्री जीवन के लिए संरक्षित प्राकृतिक अभयारण्य रहा है। जब निजी सुरक्षाकर्मियों और भारी बुलडोजरों ने निर्माण कार्य शुरू किया, तो जनता का गुस्सा फूट पड़ा। इस जनआंदोलन को अब देश में 'फ्लेमिंगो रिवोल्यूशन' (Flamingo Revolution) का नाम दिया गया है, जहाँ हज़ारों प्रदर्शनकारी गुलाबी फ्लेमिंगो के प्रतीक लेकर सड़कों पर उतर आए हैं और सार्वजनिक संपत्ति के निजीकरण का कड़ा विरोध कर रहे हैं।
यूरोपीय संघ की कड़ी चेतावनी और भ्रष्टाचार की विशेष जांच: चौतरफा घिरे पीएम रामा
इस विवाद ने केवल घरेलू राजनीति में ही तहलका नहीं मचाया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अल्बानिया की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यूरोपीय संसद के प्रतिनिधियों ने अल्बानियाई सरकार पर विदेशी निवेशकों को फायदा पहुंचाने के लिए मनमाने तरीके से कानून बदलने और पारदर्शिता न बरतने का गंभीर आरोप लगाया है। यूरोपीय संघ (EU) ने स्पष्ट किया है कि यदि नियमों का उल्लंघन कर इस तरह के विवादास्पद प्रोजेक्ट आगे बढ़ाए गए, तो अल्बानिया की ईयू में शामिल होने की उम्मीदों को बड़ा झटका लग सकता है। इसके साथ ही, अल्बानिया की विशेष भ्रष्टाचार विरोधी जांच एजेंसी (SPAK) ने कानून में किए गए संशोधनों और इस सौदे से जुड़ी प्रक्रियाओं की आधिकारिक जांच शुरू कर दी है।
जनता का आक्रोश और कुर्सी बचाने का संघर्ष: क्या गिर जाएगी 13 साल पुरानी सरकार?
राजधानी तिराना में विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों का घेराव कर दिया है तथा प्रधानमंत्री एदी रामा के तत्काल इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। जनता का मानना है कि यह प्रोजेक्ट आम नागरिकों के लाभ या देश के विकास के लिए नहीं, बल्कि चुनिंदा शक्तिशाली अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को लाभ पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है। यद्यपि प्रधानमंत्री रामा इस परियोजना का बचाव करते हुए दावा कर रहे हैं कि इससे देश में उच्चस्तरीय पर्यटन और आर्थिक समृद्धि आएगी, लेकिन सड़कों पर उतरा जनसैलाब और यूरोपीय संघ का बढ़ता कूटनीतिक दबाव उनकी 13 साल पुरानी सत्ता को गिराने के कगार पर ले आया है।