अमेरिकी रक्षा मंत्री का अचानक गुप्त इजरायल दौरा और नेतन्याहू से सीक्रेट मुलाकात
मध्य पूर्व (Middle East) के सुलगते भू-राजनीतिक गलियारों से एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने एक पूरी तरह से अघोषित और गुप्त दौरे पर इजरायल पहुंचकर सभी को चौंका दिया। इस गोपनीय यात्रा के दौरान उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक बेहद लंबी और संवेदनशील उच्चस्तरीय बैठक की है। यह गुप्त मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब इजरायल में बेहद महत्वपूर्ण चुनाव सिर पर हैं और तेहरान के साथ जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ ले चुका है। वैश्विक रक्षा विश्लेषकों का यह मानना है कि अमेरिका और इजरायल के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई इस गुपचुप मंत्रणा के पीछे ईरान के खिलाफ किसी नए और बड़े संयुक्त सैन्य अभियान (Joint Military Attack) की रूपरेखा तैयार होना है। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी है और हर कोई यह कयास लगा रहा है कि क्या पश्चिम एशिया एक बार फिर भीषण जंग की आग में झुलसने वाला है।
ओवदा एयर बेस पर हुई गुप्त मंत्रणा और अमेरिकी युद्धक विमानों की मौजूदगी के गहरे मायने
प्राप्त रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा प्रमुख पीट हेगसेथ और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच यह गोपनीय बैठक इजरायल के एक अत्यंत सुरक्षित और सामरिक रूप से संवेदनशील ओवदा एयर बेस (Ovda Air Base) पर आयोजित की गई। इस एयर बेस पर अमेरिकी वायुसेना के अत्याधुनिक युद्धक विमान और रक्षा संसाधन भी तैनात रहते हैं। सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आई है कि दोनों नेताओं के बीच यह बैठक सामान्य कूटनीतिक बातचीत से कहीं अधिक लंबी और आक्रामक रणनीतिक योजनाओं पर केंद्रित थी। इस गुप्त मुलाकात में क्षेत्रीय सुरक्षा के हालातों, खुफिया रिपोर्टों और संभावित सैन्य कार्रवाइयों के हर एक पहलू पर बारीकी से मंथन किया गया है। पेंटागन और इजरायली रक्षा बलों (IDF) द्वारा इस दौरे को पूरी तरह से मीडिया की नज़रों से दूर रखने के पीछे एक बड़ा सैन्य एजेंडा माना जा रहा है, ताकि विरोधी ताकतों को इसकी भनक न लग सके।
ईरान के परमाणु ठिकानों और क्षेत्रीय गतिविधियों पर कसता शिकंजा: क्या वाशिंगटन बदलने वाला है अपनी नीति?
पिछले कुछ समय से अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान के सैन्य ढांचे और उसकी विवादित परमाणु गतिविधियों को लेकर रणनीतिक समन्वय में लगातार तेजी आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति प्रशासन द्वारा हाल ही में इजरायली नेतृत्व की खुलकर सराहना किए जाने और राजनीतिक समर्थन मिलने के बाद से इन अटकलों को और हवा मिल गई है कि अमेरिका परोक्ष रूप से इजरायल के सैन्य कदमों का पूरा समर्थन कर रहा है। रक्षा जानकारों का कहना है कि ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों और उसके मिसाइल कार्यक्रमों पर लगाम कसने के लिए वाशिंगटन और तेल अवीव अब एक साझा और कड़ा रुख अपनाने की तैयारी कर चुके हैं। यदि अमेरिका इस संभावित सैन्य कार्रवाई में प्रत्यक्ष रूप से इजरायल का साथ देता है, तो मध्य पूर्व का शक्ति संतुलन पूरी तरह से बदल सकता है और इसके वैश्विक स्तर पर बेहद दूरगामी व गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
इजरायली चुनावों की दहलीज पर कूटनीतिक उथल-पुथल और युद्ध के मुहाने पर खड़ा मध्य पूर्व
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे वक्त पर सामने आया है जब इजरायल में कुछ ही दिनों में आम चुनाव होने वाले हैं, और वहां की घरेलू राजनीति में सुरक्षा के मुद्दे हमेशा से सबसे ऊपर रहे हैं। प्रधानमंत्री नेतन्याहू अपनी आक्रामक राष्ट्र सुरक्षा नीतियों के बल पर राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्री का यह गुप्त दौरा उनके राजनीतिक और सैन्य प्रभाव को और अधिक बल देता नजर आ रहा है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय और खाड़ी के अन्य देश इस बढ़ती सैन्य सुगबुगाहट को लेकर खासे चिंतित हैं, क्योंकि किसी भी प्रकार का नया क्षेत्रीय संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था, कच्चे तेल की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय शांति को गहरे संकट में डाल सकता है। बहरहाल, दुनिया भर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिकी रक्षा मंत्री के इस सीक्रेट मिशन के बाद आने वाले दिनों में वाशिंगटन और तेल अवीव की ओर से कौन सा बड़ा सैन्य या कूटनीतिक कदम उठाया जाता है।