क्या है अमेरिका का खतरनाक 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट'? दी पूरी दुनिया को दो टूक
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था के गलियारों से इस वक्त एक बेहद बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने दुनिया भर के देशों की नींद उड़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ईरान के खिलाफ एक बेहद आक्रामक और अभूतपूर्व आर्थिक जंग का ऐलान कर दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग (वित्त विभाग) द्वारा शुरू किए गए इस नए अभियान को 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' (Operation Economic Outcast) का नाम दिया गया है। इसे अमेरिका के इतिहास में किसी भी विरोधी देश के खिलाफ शुरू की गई सबसे बड़ी वित्तीय और आर्थिक घेराबंदी बताया जा रहा है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था को वैश्विक व्यापार और वित्तीय तंत्र से पूरी तरह से काटना है, ताकि तेहरान सरकार अपने परमाणु कार्यक्रमों और क्षेत्रीय गतिविधियों के लिए धन न जुटा सके। अमेरिकी प्रशासन की इस कड़ी चेतावनी के बाद से मध्य पूर्व समेत पूरी दुनिया में कूटनीतिक तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है।
ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट का कड़ा बयान और वैश्विक अर्थव्यवस्था से ईरान को पूरी तरह अलग करने की योजना
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने इस अभियान की घोषणा करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका अब ईरान के खतरे को केवल मैनेज नहीं कर रहा, बल्कि उसे हमेशा के लिए खत्म करने की राह पर है। उन्होंने इस अभियान की तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के ऐतिहासिक 'डी-डे' (D-Day) अभियान से करते हुए इसे 'इकोनॉमिक डी-डे' करार दिया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इस नए ऑपरेशन के तहत ईरान के पांच सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों को निशाना बनाया गया है, जिनका इस्तेमाल तेहरान सरकार अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए करती रही है। इन क्षेत्रों में डिजिटल एसेट्स, आधुनिक तकनीक, सोना, विमानन (Aviation) और शिपिंग सेक्टर मुख्य रूप से शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन का साफ कहना है कि जो भी देश या संस्थाएं ईरान के साथ किसी भी प्रकार का आर्थिक या व्यावसायिक संबंध जारी रखेंगी, उन्हें वाशिंगटन की कड़ी पाबंदियों और वित्तीय प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।
दुनिया भर के देशों और कंपनियों के लिए अमेरिका की दो टूक चेतावनी
इस नए अमेरिकी अभियान के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद दुनिया भर के कई शीर्ष नेताओं से संपर्क साध रहे हैं और उन्हें ईरान के साथ सभी प्रकार के व्यावसायिक रिश्ते तुरंत खत्म करने के स्पष्ट निर्देश दे रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ईरान की मदद करने वाले या उसके काले धन को सफेद करने में सहयोग करने वाले किसी भी विदेशी बैंक या वित्तीय संस्थान को अमेरिकी डॉलर प्रणाली (U.S. Dollar System) से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। इसके साथ ही, ईरान के प्रमुख बैंक 'बैंक मेल्ली' की सभी विदेशी शाखाओं को पूरी तरह से बंद करने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने दुनिया के विभिन्न देशों को चेतावनी दी है कि उनके पास अब अमेरिका और ईरान में से किसी एक को चुनने का समय आ गया है, और जो देश ईरान का समर्थन जारी रखेंगे, उन्हें भी वैश्विक वित्तीय अलगाव का शिकार होना पड़ेगा।
घरेलू मोर्चे पर भारी दबाव और आर्थिक तंगी से जूझता ईरान
अमेरिका के इस चौतरफा आर्थिक प्रहार से ईरान की अर्थव्यवस्था पहले ही चरमरा गई है और वहां के हालात तेजी से बद से बदतर होते जा रहे हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरानी मुद्रा रियाल की कीमत अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच चुकी है, जिससे देश के भीतर महंगाई आसमान छू रही है। खाने-पीने की बुनियादी चीजों और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम बेतहाशा बढ़ने से आम जनता का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और अन्य वैश्विक आर्थिक एजेंसियों ने भी अनुमान जताया है कि इस कड़े प्रतिबंधात्मक दौर के बाद ईरान की जीडीपी (GDP) में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी। ईरानी हुक्मरानों के सामने अब अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि एक तरफ आंतरिक असंतोष बढ़ रहा है तो दूसरी तरफ अमेरिका की तरफ से लगातार कसे जा रहे आर्थिक शिकंजे ने उनके लिए हर तरफ से रास्ते बंद कर दिए हैं।
ईरान की तीखी प्रतिक्रिया और वैश्विक राजनीति पर पड़ने वाले दूरगामी प्रभाव
अमेरिका के इस आक्रामक 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के जवाब में ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ईरानी सुरक्षा और कूटनीतिक हलकों ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस आर्थिक दबाव को कम नहीं करते हैं, तो इसके गंभीर क्षेत्रीय परिणाम हो सकते हैं। ईरान ने फारस की खाड़ी और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) के रास्ते होने वाले तेल निर्यात को बाधित करने या पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दी है, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है। जानकारों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही यह आर्थिक और कूटनीतिक जंग आने वाले दिनों में न केवल मध्य पूर्व के समीकरणों को प्रभावित करेगी, बल्कि वैश्विक व्यापार, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की दिशा भी पूरी तरह तय करेगी।