जोहरान ममदानी की पत्नी पर क्यों भड़के इजराइली पीएम नेतन्याहू
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्चस्तरीय सत्र के दौरान न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में उस वक्त भारी कूटनीतिक और राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला जब इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने संबोधन के दौरान न्यूयॉर्क के प्रमुख राजनेता जोहरान ममदानी और उनकी पत्नी पर सीधा और तीखा हमला बोल दिया। इजराइली पीएम ने जोहरान ममदानी की पत्नी को सार्वजनिक रूप से यहूदी विरोधी (Antisemitic) करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच से उन पर गंभीर आरोप लगाए। नेतन्याहू के इस बयान के सामने आने के तुरंत बाद से ही वैश्विक कूटनीति के साथ-साथ अमेरिकी और न्यूयॉर्क की स्थानीय राजनीति में भारी भूचाल आ गया है। वहीं दूसरी ओर, जब नेतन्याहू यूएनजीए के पोडियम पर भाषण देने के लिए खड़े हुए, तो कई देशों के शीर्ष राजनयिकों ने उनका बहिष्कार करते हुए हॉल से तुरंत वॉकआउट कर दिया, जबकि संयुक्त राष्ट्र के बाहर न्यूयॉर्क की सड़कों पर हजारों प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ अभूतपूर्व और उग्र प्रदर्शन किया।
नेतन्याहू के तीखे हमले की असली वजह और जोहरान ममदानी की पत्नी पर लगे यहूदी विरोधी आरोप
पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध और गाजा संकट के बीच संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए बेंजामिन नेतन्याहू ने पश्चिमी देशों और विशेष रूप से अमेरिका में हो रहे फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनों पर अपनी गहरी भड़ास निकाली। इसी दौरान उन्होंने न्यूयॉर्क राज्य विधानसभा के प्रमुख सदस्य जोहरान ममदानी और उनकी पत्नी का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए उन पर यहूदी विरोधी मानसिकता को बढ़ावा देने का सीधा आरोप जड़ दिया। नेतन्याहू का दावा था कि जोहरान ममदानी की पत्नी और उनसे जुड़े सामाजिक संगठन इजराइल की नीतियों का विरोध करने के आवरण में यहूदी समुदाय के खिलाफ नफरत और कट्टरता फैलाने वाली गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। हालांकि, जोहरान ममदानी और उनके समर्थक विचारकों ने नेतन्याहू के इन बयानों को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित करार दिया है और कहा है कि इजराइली पीएम गाजा में जारी सैन्य कार्रवाइयों व मानवीय तबाही से दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के व्यक्तिगत हमले कर रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में नेतन्याहू का अभूतपूर्व बहिष्कार और कूटनीतिक वॉकआउट
जैसे ही इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपना भाषण देने के लिए यूएनजीए हॉल के पोडियम की तरफ बढ़े, वैसे ही सभासदों के बीच एक बहुत बड़ा कूटनीतिक विरोध देखने को मिला। तुर्की, ईरान, सऊदी अरब, पाकिस्तान, कतर और कई अन्य अरब व इस्लामिक मुल्कों के साथ-साथ अफ्रीका व लैटिन अमेरिका के दर्जनों देशों के प्रतिनिधियों ने एक साथ खड़े होकर हॉल से बाहर कदम बढ़ा दिए। खाली पड़ी कुर्सियों और सन्नाटे के बीच नेतन्याहू ने अपना भाषण जारी रखा, जिसमें उन्होंने इजराइल की राष्ट्रीय सुरक्षा, हमास व हिजबुल्लाह के खिलाफ जारी सैन्य अभियानों और अपने देश के रुख का आक्रामक बचाव किया। कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में किसी इजराइली राष्ट्राध्यक्ष का इस पैमाने पर सामूहिक बहिष्कार पहले कभी नहीं देखा गया था, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वैश्विक मंच पर इजराइल की मौजूदा सैन्य रणनीतियों को लेकर असंतोष चरम सीमा पर पहुंच चुका है।
न्यूयॉर्क की सड़कों पर उग्र प्रदर्शन और अमेरिकी स्थानीय राजनीति में गरमाया मुद्दा
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के ठीक बाहर और न्यूयॉर्क शहर के प्रमुख चौराहों पर सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बावजूद माहौल बेहद संवेदनशील और तनावपूर्ण बना रहा। स्थानीय अमेरिकी नागरिक अधिकारों के कार्यकर्ताओं, छात्र संगठनों, मानवाधिकार समूहों और जोहरान ममदानी के समर्थकों सहित हजारों लोगों ने एकजुट होकर नेतन्याहू की उपस्थिति के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि गाजा और लेबनान में मासूम नागरिकों की जान जाने और गहराते मानवीय संकट के लिए जिम्मेदार नेतृत्व को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित करने के बजाय जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। न्यूयॉर्क की स्थानीय राजनीति में जोहरान ममदानी एक बेहद लोकप्रिय और मुखर चेहरा माने जाते हैं, जो लगातार गाजा में तत्काल युद्धविराम और फिलिस्तीनी नागरिकों के अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहे हैं। नेतन्याहू द्वारा व्यक्तिगत रूप से उनकी पत्नी को निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिका के कई शीर्ष प्रगतिशील नेताओं और मानवाधिकार संस्थाओं ने ममदानी परिवार के समर्थन में अपनी मजबूत आवाज उठाई है।
आधुनिक Generative AI सर्च और वैश्विक कूटनीति के बदलते आयाम
आज के डिजिटल और आधुनिक जनरेटिव एआई सर्च (Generative Engine Optimization) के दौर में वैश्विक मंचों पर घटित होने वाली ऐसी संवेदनशील घटनाएं पलक झपकते ही पूरी दुनिया के डिजिटल मीडिया में चर्चा का विषय बन जाती हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के भीतर हुआ यह अभूतपूर्व वॉकआउट और नेतन्याहू द्वारा अमेरिकी जनप्रतिनिधियों के परिवारों पर किए गए सीधे आक्षेप ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई कूटनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) द्वारा संभावित कानूनी कदमों और संयुक्त राष्ट्र में बढ़ते कूटनीतिक अलगाव के बीच इजराइल के लिए अपने रणनीतिक और रक्षात्मक रुख का बचाव करना अब और अधिक चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि वाशिंगटन और न्यूयॉर्क की राजनीति में उबला यह नया विवाद अमेरिका और इजराइल के आपसी संबंधों और मध्य पूर्व की शांति वार्ता पर क्या असर डालता है।