सेंसेक्स 880 अंक धड़ाम और निफ्टी 22,900 के नीचे फिसला

सेंसेक्स 880 अंक धड़ाम और निफ्टी 22,900 के नीचे फिसला

भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) के लिए आज का दिन निवेशकों के लिए किसी बुरे सपने से कम साबित नहीं हुआ, क्योंकि हफ्ते के पहले ही कारोबारी सत्र में बाजार खुलते ही दलाल स्ट्रीट पर भूचाल आ गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स (Sensex) शुरुआती कारोबार में ही 880 अंकों से अधिक की भारी-भरकम गिरावट के साथ धड़ाम हो गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty 50) भी गोता लगाते हुए मनोवैज्ञानिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 22,900 के स्तर से नीचे लुढ़क गया। इस अचानक और तेज बिकवाली के कारण निवेशकों की संपत्ति यानी मार्केट कैप से महज कुछ ही घंटों के भीतर लगभग 6 लाख करोड़ रुपये पानी की तरह बह गए, जिससे निवेशकों के चेहरों पर भारी मायूसी छा गई। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली और घरेलू मोर्चे पर उपजे आर्थिक दबावों के कारण बाजार में यह हाहाकार मचा है। आइए इस विस्तृत रिपोर्ट में गहराई से जानते हैं कि भारतीय शेयर बाजार में अचानक आई इस ऐतिहासिक और भयानक गिरावट के पीछे की मुख्य वजहें कौन सी हैं और क्या आने वाले दिनों में बाजार और अधिक गोता लगाएगा या फिर संभलने की कोई उम्मीद है।

वैश्विक बाजारों से मिले बेहद कमजोर संकेत और अमेरिकी बाजारों का दबाव

भारतीय शेयर बाजार में आज की इस भारी गिरावट का सबसे बड़ा और प्राथमिक कारण वैश्विक बाजारों (Global Markets) से मिल रहे लगातार सुस्त और नकारात्मक संकेत रहे हैं। पिछले सप्ताह अमेरिकी शेयर बाजारों (Wall Street) में टेक शेयरों की भारी बिकवाली और वहां के केंद्रीय बैंक (US Federal Reserve) के ब्याज दरों को लेकर आए तीखे बयानों के बाद दुनिया भर के निवेशकों में जोखिम उठाने की क्षमता कम हो गई है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रही बढ़ोतरी और डॉलर इंडेक्स के मजबूत होने के कारण वैश्विक निवेशक उभरते बाजारों (Emerging Markets) जैसे भारत से अपना पैसा तेजी से निकालकर सुरक्षित ठिकानों की तरफ शिफ्ट कर रहे हैं। एशियाई बाजारों में भी जापान के निक्केई और हांगकांग के हेंगसेंग सूचकांक लाल निशान के साथ कारोबार कर रहे थे, जिसका सीधा मनोवैज्ञानिक प्रभाव भारतीय निवेशकों और फंड हाउस पर पड़ा और बाजार खुलते ही ताबड़तोड़ बिकवाली का दौर शुरू हो गया।

FIIs की भारी निकासी और घरेलू संस्थागत निवेशकों पर बढ़ता दबाव

भारतीय पूंजी बाजार में पिछले कुछ हफ्तों से विदेशी संस्थागत निवेशकों (Foreign Institutional Investors - FIIs) द्वारा लगातार बिकवाली की जा रही है, जिसने बाजार की कमर तोड़ कर रख दी है। विदेशी निवेशक लगातार भारतीय शेयरों में अपने पोर्टफोलियो को हल्का कर रहे हैं और बिकवाली का यह सिलसिला आज सुबह बाजार खुलते ही और अधिक आक्रामक हो गया। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (Domestic Institutional Investors - DIIs) ने अपनी ओर से बाजार को संभालने की पूरी कोशिश की और हर बड़ी गिरावट पर खरीदारी का सहारा दिया, लेकिन FIIs की बिकवाली का दबाव इतना भारी था कि घरेलू खरीदार बाजार को गिरने से रोक पाने में असफल रहे। जब तक विदेशी निवेशकों का यह पैसा भारतीय बाजार से बाहर जाता रहेगा, तब तक बाजार में इसी तरह के उतार-चढ़ाव और अस्थिरता का माहौल बने रहने की पूरी आशंका बनी हुई है, जिससे छोटे खुदरा निवेशकों को अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

तिमाही नतीजों और कॉर्पोरेट आय को लेकर बाजार की चिंताएं

देश की बड़ी कंपनियों के हालिया तिमाही वित्तीय नतीजे (Quarterly Corporate Earnings) और भविष्य के अनुमान भी उस उम्मीद पर खरे नहीं उतरे हैं जिसकी बाजार ने उम्मीद की थी। कई प्रमुख सेक्टर्स जैसे ऑटोमोबाइल, बैंकिंग, आईटी और धातु (Metals) क्षेत्र की कंपनियों के मार्जिन पर महंगाई और वैश्विक सुस्ती का असर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है, जिससे निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर हुआ है। जब ब्लू-चिप कंपनियों (Blue-chip Companies) के मुनाफे की रफ्तार धीमी पड़ती है, तो बड़े फंड हाउस और निवेशक अपने शेयरों की वैल्यूएशन को लेकर चिंतित हो जाते हैं और मुनाफावसूली (Profit Booking) करना शुरू कर देते हैं। आज की इस गिरावट में भी कई दिग्गज शेयरों में बिकवाली का भारी दबाव देखा गया, जिसके कारण सेंसेक्स और निफ्टी अपने सपोर्ट लेवल को तोड़ते हुए नीचे फिसलते चले गए।

भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उठापटक

मध्य पूर्व और दुनिया के अन्य हिस्सों में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) ने कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में एक बार फिर अनिश्चितता पैदा कर दी है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, और यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दाम बढ़ते हैं, तो देश में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है और राजकोषीय घाटा भी बिगड़ सकता है। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये (Indian Rupee) में आई कमजोरी ने भी निवेशकों की चिंताओं को और अधिक बढ़ा दिया है। इन सभी बाहरी और आंतरिक आर्थिक कारकों ने मिलकर आज बाजार के माहौल को पूरी तरह नकारात्मक बना दिया, जिसके परिणामस्वरूप निवेशकों की गाढ़ी कमाई के 6 लाख करोड़ रुपये चंद मिनटों में स्वाहा हो गए।