सोने की आसमान छूती कीमतों ने फीकी की ज्वैलरी बाजार की चमक
देश के सर्राफा बाजार और त्योहारी सीजन से इस वक्त की एक बेहद चिंताजनक व्यापारिक खबर सामने आ रही है, जहां लगातार रिकॉर्ड तोड़ रहे सोने के ऊंचे दामों ने आम ग्राहकों की जेब पर भारी असर डालना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव और घरेलू मांग के कारण सोने की कीमतें अपने सर्वकालिक उच्च स्तर के करीब पहुंच चुकी हैं, जिसके चलते आभूषणों (ज्वैलरी) की खुदरा बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कभी शादियों और त्योहारों के सीजन में सोने की दुकानों पर ग्राहकों की लंबी कतारें नजर आती थीं, वहीं आज महंगाई के इस दौर में मध्यमवर्गीय परिवार सोने की खरीददारी करने से कतराने लगे हैं। इसके कारण देश भर के छोटे और बड़े सर्राफा व्यापारियों के चेहरों पर मायूसी छा गई है, क्योंकि करवा चौथ, धनतेरस और दीपावली जैसे सबसे बड़े त्योहारों के मुहाने पर खड़े होने के बावजूद बाजार में वह पारंपरिक रौनक और उत्साह गायब दिख रहा है, जिसकी उम्मीद हर साल कारोबारी करते हैं।
सोने के बढ़ते दामों का खुदरा बाजार पर सीधा असर, हल्के वजन के गहनों और डिजिटल गोल्ड की तरफ बढ़ा रुझान
बढ़ती कीमतों के इस दौर में ग्राहकों ने अपनी रणनीति में बदलाव करना शुरू कर दिया है। भारी-भरकम हार और सेट खरीदने के बजाय अब ग्राहक हल्के वजन के आधुनिक डिजाइन वाले इयरिंग्स, पेंडेंट और अंगूठियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके अलावा, जिन परिवारों में आगामी महीनों में शादियां हैं, वे भी जरूरत भर का ही सोना खरीद रहे हैं या फिर सोने के सिक्कों और डिजिटल गोल्ड में निवेश को अधिक सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं। सर्राफा एसोसिएशन के जानकारों का कहना है कि जब कीमतें अचानक इस तेजी से बढ़ती हैं, तो आम आदमी की क्रय शक्ति (Purchasing Power) प्रभावित होती है, जिसका सीधा असर ज्वैलरी की कुल बिक्री के आंकड़ों पर पड़ता है। हालांकि, व्यापारी इस बात से भी राहत महसूस कर रहे हैं कि भले ही वजन के हिसाब से बिक्री कम हुई हो, लेकिन सोने के ऊंचे भाव होने के कारण कुल कारोबार का वित्तीय मूल्य (Value Terms) अभी भी बना हुआ है, हालांकि मात्रा (Volume) के मामले में मुनाफा काफी घट गया है।
अब देश भर के सर्राफा कारोबारियों की निगाहें धनतेरस और आगामी त्योहारी सीजन पर टिकी हैं
त्योहारी सीजन किसी भी खुदरा व्यापार के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है, और इस बार सभी ज्वैलर्स की आखिरी उम्मीदें आने वाले धनतेरस और दीपावली के शुभ मुहूर्त पर टिकी हुई हैं। पारंपरिक रूप से भारतीय संस्कृति में धनतेरस के दिन सोना या चांदी खरीदना बेहद शुभ माना जाता है, और व्यापारियों को पूरी उम्मीद है कि इस पावन अवसर पर उपभोक्ता बाजार में जरूर लौटेंगे। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए इस बार कई बड़े और प्रतिष्ठित ज्वैलरी ब्रांड्स ने मेकिंग चार्ज (Making Charges) पर भारी छूट, विशेष कैशबैक ऑफर्स और आकर्षक एक्सचेंज स्कीमों की घोषणा की है ताकि त्योहारी जोश को फिर से जिंदा किया जा सके। उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि धनतेरस के दिन कीमतों में थोड़ा बहुत भी स्थिरीकरण देखने को मिलता है, तो रुकी हुई मांग अचानक बाहर आ सकती है और सुस्त पड़े सर्राफा बाजार को एक जबरदस्त बूस्ट मिल सकता है, जिससे व्यापारियों के नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सकती है।