39 की उम्र में महान स्पिनर बिशन सिंह बेदी के ऐतिहासिक रिकॉर्ड की बराबरी
भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) से इस वक्त क्रिकेट के गलियारों से एक बेहद शानदार और प्रेरणादायक खबर सामने आ रही है। भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद ऑलराउंडर्स में शुमार और अपने अनुभव के दम पर लगातार जलवा बिखेर रहे अनुभवी स्पिनर जलज सक्सेना ने एक ऐसा ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया है, जिसके बाद से पूरे देश में उनकी चर्चा हो रही है। 39 साल की उम्र में भी जलज सक्सेना का जोश और मैदान पर उनका प्रदर्शन जरा भी फीका नहीं पड़ा है, बल्कि उन्होंने अपनी फिरकी के जादू से भारतीय क्रिकेट के महान पूर्व स्पिनर बिशन सिंह बेदी के एक महाकमान की बराबरी कर ली है। रणजी ट्रॉफी के इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट चटकाने और लगातार शीर्ष स्तर पर गेंदबाजी करने के मामले में जलज सक्सेना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उम्र सिर्फ एक संख्या है और असली जज्बा मैदान पर उनकी गेंदबाजी बोलती है। इस बड़ी उपलब्धि के बाद से देश भर के क्रिकेट प्रेमियों और विशेषज्ञों द्वारा उन्हें लगातार बधाइयां दी जा रही हैं।
जलज सक्सेना का घरेलू क्रिकेट में दबदबा, बिशन सिंह बेदी के रिकॉर्ड की बराबरी कर लिखा नया अध्याय
घरेलू क्रिकेट के पन्नों को पलटा जाए तो जलज सक्सेना का नाम उन चुनिंदा खिलाड़ियों में लिया जाता है जिन्होंने बिना टीम इंडिया की कैप पहने भी अपनी डोमिक्लियर गेंदबाजी और बल्लेबाजी से भारतीय क्रिकेट में अमिट छाप छोड़ी है। रणजी ट्रॉफी के एक और मुकाबले में अपनी घातक स्पिन गेंदबाजी का जलवा दिखाते हुए उन्होंने एक ऐसा मुकाम हासिल कर लिया जो अब तक केवल महान स्पिनर बिशन सिंह बेदी के नाम ही दर्ज था। जलज सक्सेना ने घरेलू क्रिकेट में अपने लंबे और शानदार करियर के दौरान लगातार विकेटों का अंबार लगाया है और अब वे उस मुकाम पर पहुंच चुके हैं जहां उनका नाम भारतीय घरेलू क्रिकेट के ऑल-टाइम महान गेंदबाजों की सूची में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जा रहा है। उनकी यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि घरेलू क्रिकेट में निरंतरता, अनुशासन और कड़ी मेहनत का क्या महत्व होता है, और यही वजह है कि आज की युवा पीढ़ी के खिलाड़ी उनसे बहुत कुछ सीखते हैं।
39 की उम्र में भी फिटनेस और खेल के प्रति गजब का समर्पण, युवा खिलाड़ियों के लिए बने सबसे बड़े रोल मॉडल
आज के आधुनिक और तेज-तर्रार टी20 क्रिकेट के दौर में जहां खिलाड़ी कम उम्र में ही लंबे फॉर्मेट से दूरी बनाने लगते हैं, वहीं 39 वर्ष की आयु में जलज सक्सेना का यह समर्पण और जुनून उन सभी युवाओं के लिए एक जीवंत मिसाल है जो फर्स्ट-क्लास क्रिकेट को अपना मुख्य लक्ष्य मानते हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष और अनुशासन को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि यदि आपके अंदर सीखने की ललक और मैदान पर पसीना बहाने की क्षमता है, तो उम्र कभी भी आपके रास्ते में रुकावट नहीं बन सकती। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि जलज सक्सेना जैसे खिलाड़ी ही भारतीय घरेलू क्रिकेट की असली रीढ़ हैं, जो अपनी टीमों को मुश्किल परिस्थितियों से निकालकर जीत दिलाना अच्छी तरह जानते हैं। रणजी ट्रॉफी के इस सीजन में उनके द्वारा बनाए गए इस नए कीर्तिमान के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वे आने वाले मैचों में इस रिकॉर्ड को और आगे ले जाते हुए इतिहास के पन्नों में अपना नाम सबसे ऊपर दर्ज करा पाते हैं या नहीं।