उस्ताद की एक शर्त और मां की कसम ने बदल दी जिंदगी, जानिए अनसुनी कहानी

उस्ताद की एक शर्त और मां की कसम ने बदल दी जिंदगी, जानिए अनसुनी कहानी

भारतीय संगीत जगत में अपनी बुलंद आवाज, ऊर्जावान गानों और भांगड़ा की धमाकेदार धुनों से पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले मशहूर पॉप किंग दलेर मेहंदी की प्रोफेशनल लाइफ जितनी शानदार रही है, उतनी ही दिलचस्प और प्रेरणादायक उनकी व्यक्तिगत जिंदगी से जुड़ी कहानियां भी हैं। आज के समय में जहां मनोरंजन उद्योग के अधिकांश सितारे पार्टियों और शराब की महफिलों से घिरे नजर आते हैं, वहीं दलेर मेहंदी ने अपने पूरे जीवन में कभी भी शराब या किसी भी तरह के नशे को हाथ तक नहीं लगाया है। एक इंटरव्यू के दौरान खुद दलेर मेहंदी ने इस राज से पर्दा उठाया था कि आखिर क्यों उन्होंने ताउम्र शराब से दूरी बनाए रखने की कसम खाई थी। इसके पीछे उनके जीवन से जुड़ी दो ऐसी बड़ी घटनाएं और शख्सियतें थीं, जिन्होंने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। इसमें उनके संगीत गुरु यानी उस्ताद की एक बेहद सख्त शर्त और उनकी मां की एक पवित्र मन्नत शामिल थी, जिन्होंने न सिर्फ उन्हें नशे की दुनिया से दूर रखा बल्कि उन्हें संगीत साधना के उस रास्ते पर अग्रसर किया जहां से उन्होंने शोहरत की बुलंदियों को छुआ।

उस्ताद की वह सख्त शर्त जिसने हमेशा के लिए तय कर दी दलेर मेहंदी की संगीतमय राह

दलेर मेहंदी के बचपन से ही संगीत के प्रति अटूट प्रेम और लगन को देखते हुए उनके परिवार ने उन्हें शास्त्रीय संगीत की तालीम दिलाने का फैसला किया था। जब दलेर मेहंदी ने एक महान और प्रतिष्ठित उस्ताद से संगीत की विधिवत शिक्षा लेनी शुरू की, तो उनके गुरु ने उनके सामने कुछ कड़े और स्पष्ट नियम रखे थे। उस्ताद ने साफ शब्दों में कहा था कि यदि तुम्हें संगीत की इस पवित्र साधना में महारत हासिल करनी है और अपने गले को हमेशा सुरीला व दमदार रखना है, तो तुम्हें किसी भी प्रकार के नशे, खासकर शराब और मांस-मछली से पूरी तरह तौबा करनी होगी। गुरु का यह निर्देश दलेर मेहंदी के दिलो-दिमाग में इस कदर बैठ गया कि उन्होंने इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा और अटल नियम बना लिया। उस दौर में जहां कई युवा कलाकारों पर संगति का बुरा असर पड़ने का खतरा रहता था, दलेर मेहंदी ने अपने गुरु की उस एक शर्त को अपने जीवन का मंत्र बना लिया और कभी भी अपने रास्ते से नहीं भटके। उनका मानना था कि संगीत एक साधना है और साधना करने वाले के शरीर और मन दोनों का पवित्र होना सबसे पहली शर्त है, और इसी अनुशासन ने उनके करियर को आज इस मुकाम पर पहुंचाया है।

मां की मन्नत और दुआओं का असर: कैसे एक मां के आशीर्वाद ने ढाल बनकर की रक्षा

उस्ताद की शर्तों के अलावा दलेर मेहंदी के जीवन को पूरी तरह से संवारने में उनकी मां की दुआओं और मन्नतों का बहुत बड़ा हाथ रहा है। दलेर मेहंदी ने खुद एक बार साझा किया था कि उनके परिवार में संगीत और संस्कारों को बहुत ऊंचा स्थान दिया जाता था, और उनकी मां हमेशा चाहती थीं कि उनका बेटा देश और दुनिया में नाम कमाए लेकिन गलत संगति से हमेशा दूर रहे। मां ने अपने बेटे के उज्जवल भविष्य और उसे हर तरह की बुरी बलाओं व नशों से दूर रखने के लिए भगवान से विशेष मन्नत मांगी थी। मां के उस असीम स्नेह और पवित्र आशीर्वाद का ही असर था कि दलेर मेहंदी ने कभी शराब या किसी अन्य नशे को अपनी जिंदगी के करीब भी नहीं फटकने दिया। जब भी उनके सामने कभी ऐसी स्थितियां आईं जहां लोग उन्हें पार्टी या महफिलों में नशे के लिए प्रेरित करते थे, उन्हें अपनी मां की दुआएं और उनके गुरु की सीख तुरंत याद आ जाती थी। आज जब वे पीछे मुड़कर देखते हैं तो उन्हें इस बात का बेहद सुकून है कि उन्होंने अपने जीवन का हर पल पूरी साफ-सुथरी सोच, ऊर्जा और संगीत के प्रति समर्पण के साथ जिया है। उनकी यह प्रेरणादायक कहानी आज की युवा पीढ़ी और उभरते कलाकारों के लिए एक बहुत बड़ा सबक है कि बिना किसी नशे या शॉर्टकट के भी अपनी मेहनत और अनुशासन के दम पर दुनिया के शिखर को छुआ जा सकता है।