फैशन के चक्कर में शरीर पर भारी पड़ सकती हैं हाई हील्स

फैशन के चक्कर में शरीर पर भारी पड़ सकती हैं हाई हील्स

आज के दौर में स्टाइल, ग्लैमर और पर्सनालिटी को निखारने के लिए हाई हील्स (High Heels) महिलाओं के दैनिक जीवन और फैशन का एक बेहद अहम हिस्सा बन चुकी हैं। कॉर्पोरेट दफ्तरों से लेकर शादियों, पार्टियों और इवेंट्स तक हर जगह हाई हील्स का जलवा साफ देखने को मिलता है। हालांकि, लंबे समय तक स्टाइलिश दिखने की इस होड़ में हम अक्सर अपने शरीर द्वारा दिए जा रहे चेतावनी के संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं। ऑर्थोपेडिक डॉक्टरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऊंची एड़ी वाले जूते या सैंडल लगातार पहनने से मानव शरीर के प्राकृतिक ढांचे (Natural Body Posture) पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। यह दबाव न केवल पैरों तक सीमित रहता है, बल्कि रीढ़ की हड्डी (Spine), हिप जॉइंट्स (Hip Joints), घुटनों और लोअर बैक को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह आदत आगे चलकर गंभीर मस्कुलोस्केलेटल समस्याओं और क्रॉनिक पेन (पुरानी बीमारी) का रूप ले सकती है।

जब भी कोई व्यक्ति समतल यानी फ्लैट जूते पहनकर चलता है, तो उसके शरीर का पूरा वजन दोनों पैरों पर पूरी तरह से समान रूप से बंट जाता है। लेकिन जैसे ही आप हील्स पहनते हैं, आपके शरीर का पूरा संतुलन बिगड़ जाता है और वजन का लगभग 70 से 90 प्रतिशत हिस्सा आपके पंजों (Forefoot) की छोटी हड्डियों पर केंद्रित हो जाता है। शरीर के संतुलन को बनाए रखने के लिए पेल्विस (Pelvis) यानी हिप बोन आगे की तरफ झुक जाती है। इस अप्राकृतिक झुकाव के कारण हिप्स और पेल्विक रीजन की मांसपेशियों को शरीर को संभाले रखने के लिए दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। लंबे समय तक हिप्स का यह गलत एलाइनमेंट न केवल पेल्विक पेन का कारण बनता है, बल्कि हिप जॉइंट्स में घर्षण बढ़ाकर समय से पहले आर्थराइटिस और कार्टिलेज के घिसने के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।

हील्स पहनकर चलने से रीढ़ की हड्डी का प्राकृतिक 'S' आकार का कर्व असामान्य रूप से मुड़ जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में 'लॉर्डोसिस' (Lordosis) कहा जाता है। जब पेल्विस आगे झुकता है, तो लोअर बैक (पीठ के निचले हिस्से) की मांसपेशियों पर अत्यधिक तनाव पैदा होता है। इसके परिणामस्वरूप रीढ़ की हड्डी की वर्टेब्रा (Vertebrae) और डिस्क पर असामान्य दबाव पड़ने लगता है। यही मुख्य कारण है कि नियमित रूप से हाई हील्स पहनने वाली महिलाओं में लोअर बैक पेन, स्लिप डिस्क और साइटिका (Sciatica) जैसी नसों से जुड़ी समस्याओं की शिकायत सबसे ज्यादा पाई जाती है। रीढ़ की हड्डी में आने वाला यह अप्राकृतिक खिंचाव धीरे-धीरे गर्दन और कंधों तक पहुंच जाता है, जिससे सर्वाइकल और सिरदर्द जैसी दिक्कतें भी जन्म लेने लगती हैं।

हाई हील्स का असर केवल हिप्स और स्पाइन तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि यह घुटनों और पिंडलियों की मांसपेशियों पर भी बेहद बुरा प्रभाव डालता है। हील्स पहनने पर घुटने थोड़ा मुड़े रहते हैं, जिससे नी जॉइंट (Knee Joint) पर दबाव बढ़ जाता है। ऑर्थोपेडिक स्टडीज के मुताबिक, ऊंची एड़ी पहनने से घुटनों के जोड़ों पर दबाव लगभग 26% तक बढ़ जाता है, जिससे कम उम्र में ही ऑस्टियोआर्थराइटिस होने का खतरा पैदा हो जाता है। इसके अलावा, पिंडलियों (Calf Muscles) की मांसपेशियां लगातार खिंचाव की स्थिति में रहने के कारण छोटी और सख्त हो जाती हैं। पैरों के पंजों में 'प्लांटर फैसाइटिस' (Plantar Fasciitis), बर्नियन (Bunions), और नसों में सूजन जैसी दिक्कतें आम बात हो जाती हैं, जिससे चलने-फिरने में तीव्र दर्द का सामना करना पड़ता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आपको फैशन को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है, बल्कि थोड़ी सी सावधानी और समझदारी अपनाकर शरीर को नुकसान से बचाया जा सकता है। अगर आपको किसी खास मौके पर हाई हील्स पहननी भी पड़े, तो हील की ऊंचाई 1.5 से 2 इंच से ज्यादा न रखें और ब्लॉक हील्स या वेजेस (Wedges) का चुनाव करें, जो पतली स्टिलेटोज (Stilettos) के मुकाबले बेहतर सपोर्ट देती हैं। रोजाना हील्स पहनने से बचें और जब भी मौका मिले अपने पैरों, पिंडलियों और लोअर बैक की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें। दफ्तरों या लंबे सफर के दौरान अपने साथ कम्फर्टेबल फ्लैट्स या स्नीकर्स रखें। अपने पैरों और रीढ़ की सेहत का ख्याल रखना ही असली फैशन है, क्योंकि एक स्वस्थ शरीर ही आपको लंबे समय तक ऊर्जावान और खूबसूरत बनाए रख सकता है।