देश में सबसे तेजी से पांव पसार रहा है ये घातक कैंसर: सर्वे में हुआ बड़ा खुलासा

देश में सबसे तेजी से पांव पसार रहा है ये घातक कैंसर: सर्वे में हुआ बड़ा खुलासा

भारत में पुरुषों की सेहत को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और गंभीर रिपोर्ट सामने आई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और हालिया राष्ट्रीय सर्वेक्षण के आंकड़ों ने एक ऐसी खामोश बीमारी की ओर ध्यान आकर्षित किया है जो देश में बहुत तेजी से पैर पसार रही है। हम बात कर रहे हैं प्रोस्टेट कैंसर (Prostate Cancer) की, जो पुरुषों में पाया जाने वाला सबसे आम लेकिन सबसे ज्यादा नजरअंदाज किया जाने वाला कैंसर बनता जा रहा है। हाल ही में 45 वर्ष और उससे अधिक आयु के 1,036 पुरुषों पर किए गए एक व्यापक अध्ययन में पाया गया कि लगभग 84 प्रतिशत पुरुषों को यह जानकारी ही नहीं है कि उनकी प्रोस्टेट कैंसर की जांच कभी हुई है या नहीं, या फिर वे इसे जरूरी ही नहीं समझते। स्वास्थ्य जागरूकता के लिहाज से यह आंकड़ा किसी बड़े खतरे की घंटी से कम नहीं है।

सर्वे के आंकड़े उड़ा देंगे आपके होश: 10 में से 6 पुरुषों को टेस्ट की खबर तक नहीं

इस सर्वेक्षण के नतीजों ने मेडिकल जगत को चिंता में डाल दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में शामिल 60.8 प्रतिशत पुरुषों यानी 10 में से लगभग 6 पुरुषों को यह बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि उनकी नियमित मेडिकल जांच के दौरान कभी प्रोस्टेट स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग की गई है या नहीं। इसके अलावा, केवल 16 प्रतिशत पुरुषों ने ही स्वीकार किया कि उन्होंने कभी प्रोस्टेट कैंसर से जुड़ा कोई टेस्ट करवाया है। बाकी बचे विशाल हिस्से को या तो इस जांच के बारे में कोई स्पष्टता नहीं थी या वे मानते थे कि उन्हें किसी तरह के कैंसर टेस्ट की आवश्यकता ही नहीं है। यह स्थिति तब है जब इनमें से दो-तिहाई पुरुष हर साल रूटीन हेल्थ चेकअप करवाने के दावे करते हैं।

क्या हैं जोखिम कारक? 69% भारतीय पुरुष पूरी तरह से बेखबर

प्रोस्टेट कैंसर के प्रसार का एक प्रमुख कारण इसके प्रति जागरूकता का अभाव है। सर्वेक्षण में शामिल 68.9 प्रतिशत पुरुष प्रोस्टेट कैंसर के एक भी जोखिम कारक (Risk Factor) की पहचान नहीं कर सके। केवल 13.2 प्रतिशत लोगों को यह मालूम था कि पारिवारिक इतिहास (Family History) इस बीमारी का एक बड़ा कारण हो सकता है। मैक्स हेल्थकेयर के वरिष्ठ विशेषज्ञों के अनुसार, जब देश की आबादी का इतना बड़ा हिस्सा बीमारी के शुरुआती लक्षणों और कारणों से अनजान होगा, तो सही समय पर इलाज मिल पाना नामुमकिन सा हो जाता है।

PSA टेस्ट से दूरी और संकोच: डॉक्टरों से बात करने में हिचकिचाते हैं पुरुष

प्रोस्टेट कैंसर की पहचान के लिए 'PSA' (प्रोस्टेट-विशिष्ट एंटीजन) ब्लड टेस्ट सबसे प्राथमिक और प्रभावी माध्यम माना जाता है। हालांकि, सर्वे के दौरान सिर्फ 31 प्रतिशत लोगों ने ही कभी PSA टेस्ट का नाम सुना था और केवल 14 प्रतिशत पुरुषों ने खुद से डॉक्टर से इस टेस्ट की मांग की थी। इसका बड़ा कारण यह है कि भारतीय समाज में पुरुष अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्याओं पर खुलकर बात करने में संकोच करते हैं। आंकड़े बताते हैं कि 59.5 प्रतिशत पुरुष प्रोस्टेट स्क्रीनिंग या इसके इलाज के बारे में डॉक्टर से चर्चा करने में असहज महसूस करते हैं, जबकि केवल 18 प्रतिशत ही खुद पहल करके इस विषय पर परामर्श लेते हैं।

विशेषज्ञ की राय: क्या सही समय पर संभव है इलाज?

कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोस्टेट कैंसर यदि शुरुआती स्टेज में पकड़ा जाए, तो आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों की मदद से इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है और मरीज को गुणवत्तापूर्ण जीवन दिया जा सकता है। परेशानी यह है कि ज्यादातर मामलों में मरीज तब यूरालिजिस्ट के पास पहुंचते हैं जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। चौंकाने वाली बात यह भी है कि सर्वे में शामिल 67 प्रतिशत लोग डॉक्टरों पर पूरा भरोसा तो जताते हैं, लेकिन उनमें से केवल 36 प्रतिशत को यह पता था कि प्रोस्टेट संबंधी समस्याओं के लिए 'यूरोलॉजिस्ट' (Urologist) ही सही विशेषज्ञ होते हैं।

कैसे पहचानें प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती संकेत?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक 45 से 50 वर्ष की आयु पार कर चुके हर पुरुष को प्रोस्टेट स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यदि आपको नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई भी संकेत दिखाई दे, तो तुरंत यूरोलॉजिस्ट से सलाह लें:

  • पेशाब करने में कठिनाई या बार-बार पेशाब आने की समस्या होना (खासकर रात के समय)।

  • पेशाब की धार कमजोर पड़ना या रुक-रुक कर आना।

  • पेशाब या वीर्य में खून के लक्षण दिखना।

  • निचले पीठ, कूल्हे या जांघों के ऊपरी हिस्से में लगातार दर्द महसूस होना।

जागरूकता ही बचाव है: नियमित स्क्रीनिंग अपनाएं

इस राष्ट्रीय सर्वे के नतीजे स्पष्ट संदेश देते हैं कि पुरुषों को अपने सामान्य वार्षिक स्वास्थ्य जांच (Annual Health Checkup) में प्रोस्टेट स्क्रीनिंग और PSA टेस्ट को अनिवार्य रूप से शामिल करना चाहिए। डॉक्टरों और स्वास्थ्य संस्थाओं की ओर से सलाह दी जा रही है कि 45 वर्ष की उम्र के बाद बिना किसी संकोच के डॉक्टर से प्रोस्टेट हेल्थ पर खुलकर चर्चा करें। शुरुआती जांच और सही समय पर कदम उठाकर इस घातक बीमारी के बढ़ते खतरे से बचा जा सकता है।