महिलाएं ही नहीं, मर्दों को भी हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर

महिलाएं ही नहीं, मर्दों को भी हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर

जब भी 'ब्रेस्ट कैंसर' (Breast Cancer) शब्द का जिक्र होता है, तो आमतौर पर हमारे दिमाग में यही आता है कि यह केवल महिलाओं से जुड़ी एक स्वास्थ्य समस्या है। सदियों से समाज में यही धारणा बनी हुई है कि स्तन कैंसर केवल महिलाओं को ही अपनी चपेट में लेता है और पुरुषों को इस बीमारी से कोई खतरा नहीं होता। लेकिन चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) और ऑन्कोलॉजी के आंकड़े इस आम धारणा को पूरी तरह खारिज करते हैं। सच तो यह है कि महिलाओं की तुलना में भले ही पुरुषों में स्तन कैंसर के मामले बेहद कम (लगभग 1 प्रतिशत या उससे भी कम) आते हैं, लेकिन पुरुष शरीर में भी स्तन के ऊतक (Breast Tissue) मौजूद होते हैं, जिसके कारण पुरुषों को भी यह जानलेवा बीमारी हो सकती है। जानकारी के अभाव और इस गलतफहमी के कारण कि पुरुषों को ब्रेस्ट कैंसर नहीं हो सकता, अक्सर पुरुष शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे जब तक बीमारी का पता चलता है तब तक स्थिति काफी गंभीर हो चुकी होती है। आइए विस्तार से समझते हैं कि पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर क्यों होता है, इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं और समय रहते इसकी पहचान क्यों जरूरी है।

पुरुषों में स्तन कैंसर होने के प्रमुख कारण और जोखिम कारक क्या हैं?

पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के विकसित होने के पीछे कई आनुवंशिक, हार्मोनल और पर्यावरणीय कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। सबसे बड़ा जोखिम उन पुरुषों में होता है जिनके परिवार में या आनुवंशिक इतिहास (Family History) में किसी को ब्रैस्ट या ओवेरियन कैंसर रहा हो। इसके अलावा, शरीर में एस्ट्रोजन (Estrogen) हार्मोन का स्तर असामान्य रूप से बढ़ जाना और टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) का कम होना भी इसका एक प्रमुख कारण बनता है। जिन पुरुषों को 'क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम' (Klinefelter Syndrome) जैसी दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी होती है, उनमें स्तन के ऊतक अधिक विकसित होते हैं, जिससे कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त, मोटापा (Obesity), अत्यधिक शराब का सेवन, लीवर से जुड़ी गंभीर बीमारियां जैसे सिरोसिस, और छाती के हिस्से (Chest Area) में पहले कभी किसी अन्य बीमारी के इलाज के दौरान रेडिएशन थेरेपी का होना भी पुरुषों में इस खतरनाक बीमारी के जोखिम को बढ़ा देता है।

पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षण: इन संकेतों को कभी न करें नजरअंदाज

चूंकि पुरुष अपने शरीर में होने वाले ऐसे बदलावों को लेकर बहुत ज्यादा सतर्क नहीं रहते, इसलिए शुरुआती लक्षणों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। पुरुषों में स्तन कैंसर का सबसे पहला और मुख्य लक्षण निप्पल या उसके आसपास के हिस्से में बिना किसी दर्द के एक छोटी सी गांठ (Lump) या कड़ापन महसूस होना है। यह गांठ आमतौर पर निप्पल के ठीक नीचे होती है। इसके अलावा, अन्य शुरुआती लक्षणों में निप्पल का अंदर की तरफ मुड़ना (Nipple Inversion), निप्पल या उसके आसपास की त्वचा का लाल होना, पपड़ी जमना या उसमें से खून या किसी अन्य प्रकार का तरल पदार्थ (Discharge) निकलना शामिल है। छाती की त्वचा में सूजन, गड्ढे पड़ना या छाती के उस हिस्से में लगातार हल्का या तेज दर्द बने रहना भी इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर के अंदर कुछ गड़बड़ है। यदि ऐसा कोई भी लक्षण दो हफ्ते से अधिक समय तक बना रहे, तो इसे मामूली मानकर टालने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

डॉक्टर कैसे करते हैं पुरुष ब्रेस्ट कैंसर की जांच और डायग्नोसिस?

जब कोई पुरुष छाती में गांठ या असामान्य लक्षण लेकर डॉक्टर के पास पहुंचता है, तो डॉक्टर सबसे पहले उसकी शारीरिक जांच (Physical Examination) करते हैं। इसके बाद स्थिति को स्पष्ट करने के लिए मैमोग्राफी (Mammography) और छाती के उस हिस्से का अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) कराया जाता है। यदि स्कैन में कोई संदिग्ध गांठ या असामान्यता दिखाई देती है, तो 'बायोप्सी' (Biopsy) की जाती है, जिसमें उस गांठ से ऊतक का एक छोटा सा नमूना लेकर लैब में जांच की जाती है ताकि यह कंफर्म हो सके कि कोशिकाएं कैंसरयुक्त (Malignant) हैं या नहीं। कैंसर की पुष्टि होने पर डॉक्टर यह भी जांच करते हैं कि क्या यह शरीर के दूसरे अंगों में फैल चुका है या नहीं, जिसे स्टेजिंग कहा जाता है।

पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर का इलाज और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियां

पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर का इलाज काफी हद तक महिलाओं में होने वाले ब्रेस्ट कैंसर के इलाज जैसा ही होता है। हालांकि, चूंकि पुरुषों में स्तन के ऊतक बहुत कम मात्रा में होते हैं, इसलिए सर्जरी के दौरान अक्सर पूरे स्तन के ऊतक को हटाने की प्रक्रिया (Modified Radical Mastectomy) अपनाई जाती है। इसके साथ ही कैंसर के प्रकार और स्टेज के आधार पर डॉक्टर कीमोथेरेपी (Chemotherapy), रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy), हार्मोन थेरेपी (Hormone Therapy) और टार्गेटेड थेरेपी का सहारा लेते हैं। यदि समय रहते शुरुआती स्टेज में ही बीमारी का पता चल जाए, तो पुरुषों में भी इस कैंसर का इलाज पूरी तरह संभव है और मरीज एक लंबा और स्वस्थ जीवन जी सकता है।

सामाजिक झिझक को तोड़ें और समय रहते मेडिकल मदद लें: जागरूकता ही है बचाव

हमारे समाज में पुरुषों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं, खासकर ऐसी बीमारियों को लेकर एक अजीब सी झिझक या संकोच का माहौल रहता है, जिसके कारण लोग डॉक्टर के पास जाने में देरी कर देते हैं। यह बेहद जरूरी है कि इस सामाजिक टैबू (Social Taboo) को तोड़ा जाए और यह स्वीकार किया जाए कि कैंसर किसी को भी हो सकता है, चाहे वह पुरुष हो या महिला। पुरुषों को अपने शरीर में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव के प्रति जागरूक रहना चाहिए और छाती में गांठ या दर्द महसूस होने पर बिना किसी शर्म के तुरंत किसी अच्छे ऑन्कोलॉजिस्ट या सर्जन से सलाह लेनी चाहिए। समय पर की गई सही जांच और त्वरित इलाज न केवल जान बचा सकता है, बल्कि इस गंभीर बीमारी से पूरी तरह जंग जीतने में भी मदद करता है।