गाजियाबाद में सिर्फ 2 किलोमीटर के दायरे में 4 गुना बदला हवा का मिजाज

गाजियाबाद में सिर्फ 2 किलोमीटर के दायरे में 4 गुना बदला हवा का मिजाज

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में शामिल उत्तर प्रदेश का औद्योगिक शहर गाजियाबाद इन दिनों एक बेहद अजीबोगरीब और चिंताजनक पर्यावरणीय स्थिति से जूझ रहा है। शहर के अंदर महज दो किलोमीटर के छोटे से दायरे में हवा की गुणवत्ता (Air Quality) और प्रदूषण के स्तर में चार गुना तक का भारी अंतर दर्ज किया जा रहा है। एक तरफ जहां शहर का कोई इलाका थोड़ा राहत की सांस ले रहा है, वहीं उसके बिल्कुल करीब की दूसरी ही कॉलोनी या चौराहा 'बहुत खराब' या 'गंभीर' श्रेणी की जहरीली हवा की चपेट में आ रहा है। पर्यावरण वैज्ञानिकों, मौसम विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों के लिए यह फेनोमेनन अब गहरी चिंता का विषय बन चुका है। हवा के इस बदलते मिजाज के कारण गाजियाबाद के वसुंधरा, इंदिरापुरम, कौशम्बी, साहिबाबाद, लोनी और मोहन नगर जैसे प्रमुख इलाकों में रहने वाले लोगों को सांस लेने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और अस्पताल में श्वास रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

माइक्रोकलाइमेट और स्थानीय कारणों से बदल रहा है हवा का मिजाज

गाजियाबाद के इस छोटे से दायरे में प्रदूषण के स्तर में चार गुना तक के इस उतार-चढ़ाव के पीछे कई वैज्ञानिक और भौगोलिक कारण जिम्मेदार हैं। पर्यावरणविदों के अनुसार, इसे 'माइक्रोकलाइमेट वेरिएशन' (Microclimate Variation) कहा जाता है, जहां स्थानीय परिस्थितियां हवा की गुणवत्ता को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं। गाजियाबाद देश के सबसे बड़े औद्योगिक और परिवहन केंद्रों में से एक है, जहां लगातार भारी कमर्शियल वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। एनएच-9 (NH-9), दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और जीटी रोड जैसे प्रमुख राजमार्गों के किनारे स्थित इलाकों में वाहनों से निकलने वाला धुएं का गुबार और धूल के कण हवा में सीधे घुल रहे हैं। इसके अलावा, शहर के विभिन्न हिस्सों में चल रहे बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य (Construction Activities), सड़क किनारे उड़ने वाली धूल और कचरा जलाने की घटनाएं स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के गुब्बारे तैयार कर रही हैं। जब हवा की गति (Wind Speed) कम होती है, तो यह सारा प्रदूषण एक ही स्थान पर ट्रैप होकर उस विशेष दो किलोमीटर के दायरे को गैस चैंबर में बदल देता है।

गाजियाबाद के अलग-अलग इलाकों में क्या है एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) का हाल?

गाजियाबाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के लाइव डेटा के अनुसार, शहर के विभिन्न मॉनिटरिंग स्टेशनों पर एक ही समय में भारी विषमता देखने को मिलती है। लोनी और साहिबाबाद के औद्योगिक क्षेत्रों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) अक्सर 400 से 450 के खतरनाक 'सीवियर' स्तर को पार कर जाता है, जबकि इसके मुकाबले कुछ ही किलोमीटर दूर पॉश मानी जाने वाली सोसाइटियों के पास यह स्तर 150 से 200 के बीच रिकॉर्ड किया जाता है। हवा की दिशा और तापमान का व्युत्क्रमण (Temperature Inversion) इस अंतर को और अधिक बढ़ा देता है। सर्दियों और अक्टूबर-नवंबर के इस मौसम में जब तापमान गिरता है, तो भारी प्रदूषक तत्व जमीन के करीब आकर जम जाते हैं। गाजियाबाद की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यह दिल्ली की सीमा से सटा होने के कारण पड़ोसी क्षेत्रों से आने वाले प्रदूषण के बहाव को भी झेलता है, जिससे यहां का स्थानीय वायुमंडल और अधिक दूषित हो जाता है।

स्वास्थ्य पर पड़ रहा है गंभीर असर, बुजुर्गों और बच्चों के लिए जारी की गई खास चेतावनी

हवा के इस खतरनाक मिजाज का सबसे बुरा असर शहर के आम नागरिकों, बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। गाजियाबाद के स्थानीय अस्पतालों के पल्मोनोलॉजिस्ट (Chest Physicians) का कहना है कि ओपीडी में पिछले कुछ दिनों में अस्थमा, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, आंखों में जलन, गले में खराश और सांस फूलने की समस्या के मरीजों की संख्या में 35 से 40 फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हवा में मौजूद पीएम 2.5 (PM 2.5) और पीएम 10 (PM 10) के सूक्ष्म जहरीले कण फेफड़ों की झिल्ली को पार करके सीधे खून में मिल रहे हैं, जो दीर्घकालिक रूप से कार्डियोवैस्कुलर और रेस्पिरेटरी डिजीज का कारण बन सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने गाजियाबाद के निवासियों को सलाह दी है कि सुबह और देर शाम के समय जब स्मॉग का असर ज्यादा होता है, तब बाहर वॉक करने या एक्सरसाइज करने से बचें। यदि घर से बाहर निकलना अनिवार्य हो, तो हमेशा अच्छी क्वालिटी के एन95 (N95) मास्क का उपयोग करें और घरों में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।

प्रशासन के कड़े कदम और प्रदूषण से राहत पाने के लिए उठाए जा रहे स्थानीय उपाय

गाजियाबाद जिला प्रशासन, गाजियाबाद नगर निगम (GMC) और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) ने इस बिगड़ती स्थिति से निपटने के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के नियमों को कड़ाई से लागू करना शुरू कर दिया है। शहर की प्रमुख सड़कों पर धूल उड़ाने से रोकने के लिए नियमित रूप से एंटी-स्मॉग गन (Anti-Smog Guns) और पानी के टैंकरों से छिड़काव किया जा रहा है। इसके अलावा, निर्माण स्थलों पर नियमों का उल्लंघन करने वाले बिल्डरों और डेवलपर्स पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ काम रोकने के निर्देश दिए गए हैं। ट्रैफिक पुलिस उन वाहनों की कड़ी चेकिंग कर रही है जो तय मानकों से अधिक धुआं छोड़ रहे हैं। प्रशासन ने शहरवासियों से अपील की है कि वे अपनी निजी गाड़ियों का कम से कम इस्तेमाल करें और पब्लिक ट्रांसपोर्ट या कारपूलिंग को बढ़ावा दें। जब तक मौसम में कोई बड़ा बदलाव या तेज हवाएं नहीं चलतीं, तब तक स्थानीय नागरिकों को इस जहरीले प्रदूषण से बचने के लिए खुद भी पूरी सतर्कता बरतनी होगी।