चेहरे, हाथ या पैर में अचानक सुन्नपन? इसे मामूली थकान समझने की भूल बिल्कुल न करें
भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली, काम का भारी तनाव, अनियंत्रित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी ने आज के समय में इंसानी सेहत के सामने कई ऐसी गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं जिनके बारे में कुछ साल पहले लोग सोचते भी नहीं थे। अक्सर हम अपने शरीर में होने वाली छोटी-मोटी अड़चनों, जैसे अचानक हाथ या पैर सुन्न हो जाना, चेहरे पर हल्का खिंचाव महसूस होना या थोड़ी सी कमजोरी को काम की थकान या कमजोरी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह मामूली सी लापरवाही आपको मौत के मुंह में धकेल सकती है या जिंदगी भर के लिए बिस्तर पर ला सकती है? जी हाँ, चिकित्सा विशेषज्ञों और न्यूरोलॉजिस्ट्स का यह साफ तौर पर कहना है कि चेहरे, हाथ या पैर में अचानक आने वाला सुन्नपन या कमजोरी किसी साधारण थकान का नहीं, बल्कि घातक 'ब्रेन अटैक' यानी स्ट्रोक (Brain Attack Symptoms) का सबसे पहला और स्पष्ट चेतावनी संकेत होता है। समय रहते यदि इस खतरे को भांप लिया जाए, तो किसी की जान बचाई जा सकती है, वरना यह छोटी सी अनदेखी बहुत भारी पड़ सकती है। आइए आज इस गंभीर विषय पर विस्तार से जानते हैं कि ब्रेन अटैक के शुरुआती लक्षण क्या हैं और इनसे समय रहते कैसे बचा जा सकता है।
क्या होता है ब्रेन अटैक या स्ट्रोक और क्यों बनता है यह जानलेवा?
मेडिकल साइंस की भाषा में स्ट्रोक या ब्रेन अटैक तब होता है जब मस्तिष्क (Brain) के किसी हिस्से में रक्त का संचार अचानक बाधित हो जाता है या फिर दिमाग की कोई रक्त वाहिका (Blood Vessel) फट जाती है। ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति रुकने के कारण मस्तिष्क की कोशिकाएं तेजी से मरने लगती हैं। दिमाग हमारे पूरे शरीर के संचालन का मुख्य केंद्र होता है, इसलिए जब इसका कोई हिस्सा काम करना बंद कर देता है, तो शरीर के अंगों पर से नियंत्रण खोने लगता है। यह स्थिति दो प्रकार की होती है—पहला इस्कैमिक स्ट्रोक (जब खून का थक्का जम जाता है) और दूसरा हेमरेजिक स्ट्रोक (जब नस फट जाती है)। दोनों ही स्थितियां बेहद खतरनाक होती हैं और यदि पीड़ित व्यक्ति को शुरुआती 'गोल्डन ऑवर्स' यानी पहले एक घंटे के भीतर उचित चिकित्सीय सहायता न मिले, तो उसकी जान भी जा सकती है या वह हमेशा के लिए लकवा (Paralysis) का शिकार हो सकता है।
चेहरे, हाथ या पैर का सुन्न होना ब्रेन अटैक का सबसे बड़ा शुरुआती संकेत
अक्सर लोग यह सोचते हैं कि ब्रेन अटैक आने पर अचानक बेहोशी छा जाती है, लेकिन असलियत इसके उलट है। स्ट्रोक आने से कुछ समय पहले या शुरुआती क्षणों में शरीर बहुत सूक्ष्म और स्पष्ट संकेत देता है। यदि अचानक आपके चेहरे का एक हिस्सा लटकने लगे, मुस्कुराते वक्त मुंह टेढ़ा हो जाए, या फिर शरीर का कोई एक तरफ का हाथ या पैर अचानक पूरी तरह सुन्न पड़ जाए और उसमें जान न रहे, तो यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि आपके दिमाग के उस हिस्से में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पा रही है जो शरीर के उस अंग को नियंत्रित करता है। कई बार लोगों को अचानक बोलने में कठिनाई होने लगती है, जुबान लड़खड़ाने लगती है या सामने वाले की बात समझ नहीं आती। इसके अलावा अचानक तेज सिरदर्द चक्कर आना और आंखों से धुंधला दिखाई देना भी इसी गंभीर खतरे के लक्षण हैं। इन संकेतों को कभी भी कम आंककर घरेलू नुस्खों के भरोसे नहीं बैठना चाहिए।
'FAST' फॉर्मूला अपनाकर पहचानें ब्रेन अटैक के लक्षण और बचाएं जान
मेडिकल एक्सपर्ट्स दुनिया भर में स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानने के लिए 'FAST' नामक एक बहुत ही आसान और असरदार फॉर्मूले का प्रचार करते हैं, जिससे आम आदमी भी तुरंत खतरे को भांप सके।
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F का मतलब Face Drooping है, यानी चेहरे का एक तरफ झुकना या टेढ़ा होना।
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A का मतलब Arm Weakness है, यानी हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना और उसे उठाने में असमर्थता।
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S का मतलब Speech Difficulty है, यानी बोलते समय जुबान का लड़खड़ाना या स्पष्ट बोल न पाना।
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T का मतलब Time to Call Ambulance है, यानी यदि इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो एक पल भी गंवाए बिना तुरंत नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में संपर्क करना। समय ही इस बीमारी में सबसे बड़ा जीवन रक्षक होता है, इसलिए अस्पताल पहुंचने में जितनी देर होगी, रिकवरी की संभावना उतनी ही कम होती जाती है।
जीवनशैली में सुधार और सावधानी से रोक सकते हैं इस गंभीर खतरे को
ब्रेन अटैक या स्ट्रोक कोई ऐसी बीमारी नहीं है जो अचानक आसमान से टपक पड़ती है, बल्कि यह हमारे खराब खानपान, उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure), डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और तनावपूर्ण जीवनशैली का परिणाम होती है। इस घातक खतरे से खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए यह बेहद जरूरी है कि हम अपने ब्लड प्रेशर और शुगर के स्तर को नियमित रूप से मॉनिटर करें। अपने भोजन में हरी सब्जियों, ताजे फलों और फाइबर युक्त आहार को शामिल करें तथा जंक फूड, अत्यधिक नमक और तली-भुनी चीजों से दूरी बनाएं। नियमित रूप से योग, प्राणायाम, टहलना या हल्की एक्सरसाइज करने से रक्त संचार बेहतर रहता है और धमनियों में ब्लॉकेज का खतरा कम होता है। धूम्रपान और शराब के सेवन से पूरी तरह तौबा कर लेना ही समझदारी है। सेहत से बढ़कर इस दुनिया में कुछ भी नहीं है, इसलिए शरीर के द्वारा दिए जाने वाले किसी भी छोटे-बड़े चेतावनी संकेत को नजरअंदाज करने की भूल कभी न करें और हमेशा स्वस्थ एवं सतर्क जीवन जिएं।