रामलीला मैदान रैली में अनुपस्थिति पड़ी भारी: इंडियन यूथ कांग्रेस का बड़ा एक्शन

रामलीला मैदान रैली में अनुपस्थिति पड़ी भारी: इंडियन यूथ कांग्रेस का बड़ा एक्शन

नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक रामलीला मैदान में विपक्षी एकजुटता और 'वोट बचाओ, देश बचाओ' आंदोलन के तहत आयोजित विशाल जनसभा में न पहुंचना भारतीय युवा कांग्रेस (Indian Youth Congress) के नेताओं को बेहद महंगा पड़ गया है। संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाते हुए 7 प्रमुख राज्यों के 200 से भी अधिक राज्य स्तरीय पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से पद से निलंबित कर दिया है। युवा कांग्रेस द्वारा की गई इस ऐतिहासिक और अब तक की सबसे बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई से पार्टी के आंतरिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। संगठन का स्पष्ट संदेश है कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा दिए गए राष्ट्रीय कार्यक्रमों एवं निर्देशों की अनदेखी या संगठनात्मक उदासीनता को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

डिजिटल ऐप अटेंडेंस से खुली पोल और 7 राज्यों में गिरी गाज

युवा कांग्रेस नेतृत्व ने रामलीला मैदान की इस महारैली के लिए विशेष रूप से अत्याधुनिक तकनीक और डिजिटल निगरानी प्रणाली तैयार की थी। रैली स्थल और दिल्ली के मिंटो रोड जैसे प्रमुख प्रवेश द्वारों पर क्यूआर बारकोड स्कैनिंग काउंटर लगाए गए थे, जहां हर पदाधिकारी को युवा कांग्रेस के आधिकारिक ऐप 'With IYC' पर लॉगिन कर अपनी और अपने समर्थकों की उपस्थिति दर्ज करानी थी। रैली संपन्न होने के तुरंत बाद शीर्ष नेतृत्व ने जब डिजिटल डेटा की गहन समीक्षा की, तो पाया गया कि बड़ी संख्या में प्रदेश उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव और जिलाध्यक्ष स्तर के पदाधिकारी बिना किसी पूर्व सूचना या वैध कारण के गायब थे। अनुपस्थित नेताओं से स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन जब कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर निलंबन पत्र जारी कर दिया गया। कार्रवाई की जद में सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश के 60 पदाधिकारी आए हैं। इसके अलावा गुजरात के 49, झारखंड के 32, पश्चिम बंगाल के 26, तेलंगाना के 14, उत्तर प्रदेश (मध्य क्षेत्र) के 11 और हरियाणा के 10 वरिष्ठ पदाधिकारी निलंबित किए गए हैं।

इंटरनेट की गति या जानबूझकर अनदेखी? निलंबन पर बंटी राय

संगठन द्वारा की गई इस त्वरित और सख्त कार्रवाई के बाद निलंबित नेताओं के गुट में भारी खलबली मची हुई है। कुछ प्रभावित पदाधिकारियों ने दबी जुबान में अपनी बात रखते हुए दावा किया है कि कनॉट प्लेस और रामलीला मैदान के आसपास भारी भीड़ की वजह से मोबाइल इंटरनेट नेटवर्क पूरी तरह से ठप था। इसके कारण वे शारीरिक रूप से रैली में मौजूद रहने के बावजूद ऐप पर डिजिटल उपस्थिति (QR Check-in) दर्ज कराने में असफल रहे। हालांकि, भारतीय युवा कांग्रेस के केंद्रीय अनुशासन पैनल ने इस दलील को खारिज कर दिया है। संगठन के सूत्रों का कहना है कि जो नेता वास्तव में अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ दिल्ली पहुंचे थे, उनकी मौजूदगी का रिकॉर्ड ग्राउंड टीमों द्वारा भी दर्ज किया गया है। जो लोग दिल्ली आए ही नहीं, उन्होंने केवल इंटरनेट का बहाना बनाने की कोशिश की, जिसे जांच में पकड़ लिया गया।

राजनीतिक बयानबाजी तेज: बीजेपी ने साधा निशाना तो यूथ कांग्रेस ने दिया करारा जवाब

युवा कांग्रेस के भीतर हुए इस बड़े अंदरूनी फेरबदल और थोक के भाव निलंबन के बाद देश की सियासत भी गरमा गई है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस मुद्दे को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे पर जोरदार हमला बोला है। बीजेपी के प्रवक्ताओं ने चुटकी लेते हुए कहा कि जिस नेता की बात सुनने और समर्थन करने के लिए खुद उनकी पार्टी के युवा कार्यकर्ता और पदाधिकारी तक दिल्ली आने को तैयार नहीं हैं, उनकी बातों पर देश का युवा कैसे भरोसा करेगा? बीजेपी ने इस कार्रवाई को कांग्रेस की आपसी फूट और जनाधार में आ रही गिरावट का नतीजा बताया। दूसरी ओर, भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि अनुशासन ही किसी भी कैडर आधारित संगठन की असली रीढ़ होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश इस समय बदलाव के मुहाने पर खड़ा है और संगठन में निष्क्रिय या केवल पद लेकर बैठने वाले लोगों के लिए कोई जगह नहीं है। जो काम करेगा वही पद पर रहेगा, अन्यथा नए और ऊर्जावान युवाओं को आगे का रास्ता दिखाया जाएगा।

भावी रणनीतिक कमान और संगठन में बड़े बदलाव के संकेत

रामलीला मैदान की रैली के बाद हुए इस बड़े एक्शन से यह पूरी तरह साफ हो गया है कि कांग्रेस अपने अग्रिम संगठनों को चुनावी मोड में चुस्त-दुरुस्त करना चाहती है। आने वाले महीनों में होने वाले विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों को देखते हुए नेतृत्व किसी भी स्तर पर ढिलाई के मूड में नहीं है। सूत्रों के अनुसार, अभी यह कार्रवाई का पहला चरण है और जांच का दायरा आगे भी बढ़ाया जा सकता है। कुछ अन्य राज्यों के समीक्षा आंकड़े जुटाए जा रहे हैं और निष्कासन या निलंबन की संख्या 500 तक भी पहुंच सकती है। रिक्त हुए इन 200 से अधिक पदों पर अब जमीनी स्तर पर निष्ठा से काम करने वाले और रैलियों में भीड़ जुटाने वाले कर्मठ कार्यकर्ताओं की जल्द ही पदोन्नति की जाएगी, जिससे संगठन को नई गति और धार मिलेगी।