देहरादून: राजघाट पर अंकिता भंडारी की मां से पुलिस की बदसलूकी का आरोप
उत्तराखंड के बहुचर्चित और दिल नहला देने वाले अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की आस लगाए बैठे परिजनों के साथ देश की राजधानी दिल्ली में जो कुछ भी हुआ, उसने एक बार फिर प्रशासनिक संवेदनशीलता और पुलिसिया तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिटिया को इंसाफ दिलाने की मांग को लेकर दिल्ली पहुंचे अंकिता के परिजनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ बुधवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि स्थल राजघाट पर पुलिस की कार्रवाई का मामला सामने आया है। प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना ने दिल्ली पुलिस पर बेहद संगीन आरोप लगाते हुए कहा है कि शांतिपूर्ण तरीके से न्याय की गुहार लगा रही अंकिता की मां सोनी देवी को महिला पुलिसकर्मियों द्वारा घसीटा गया और जबरन हिरासत में लेने की कोशिश की गई, जिसके चलते अत्यधिक मानसिक और शारीरिक तनाव के कारण वे मौके पर ही गश खाकर बेहोश हो गईं। इस घटनाक्रम का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक जनआक्रोश की एक नई लहर दौड़ गई है।
न्याय की आस में दिल्ली पहुंचे परिजन और राजघाट पर पुलिस का कड़ा पहरा
अंकिता भंडारी हत्याकांड के मुख्य आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी, मां सोनी देवी और दर्जनों सामाजिक कार्यकर्ता लंबे समय से संघर्षरत हैं। उत्तराखंड में आंदोलन के विभिन्न चरणों के बाद, परिजन अपनी आवाज को केंद्रीय स्तर तक पहुंचाने और न्याय की गुहार लगाने के इरादे से दिल्ली पहुंचे थे। बुधवार को परिजनों ने बापू की समाधि राजघाट पर जाकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित करने की योजना बनाई थी। हालांकि, जैसे ही अंकिता के परिजन और उनके समर्थक राजघाट परिसर के पास एकत्र हुए, वहां पहले से भारी संख्या में तैनात दिल्ली पुलिस के जवानों ने उन्हें रोक दिया। पुलिस प्रशासन का कहना था कि क्षेत्र में धारा 144 लागू है और बिना पूर्व अनुमति के किसी भी प्रकार के प्रदर्शन या एकत्र होने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
योगिता भयाना का पुलिस पर गंभीर आरोप: मां को घसीटा और हिरासत में लेने की कोशिश की
घटनास्थल पर मौजूद प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना ने मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की। योगिता भयाना ने आरोप लगाया कि एक पीड़ित मां, जिसने अपनी मासूम बेटी को खोया है और जो केवल अपनी बच्ची के कातिलों को सजा दिलवाने के लिए दर-दर भटक रही है, उसके साथ दिल्ली पुलिस ने बेहद अमानवीय व्यवहार किया। उन्होंने बताया कि जब परिजनों ने राजघाट पर शांतिपूर्ण तरीके से बैठने का प्रयास किया, तो महिला पुलिसकर्मियों ने सोनी देवी को जबरन गाड़ी में बिठाने और हिरासत में लेने की कोशिश की। इस धक्का-मुक्की और हाथापाई के दौरान अंकिता की मां को घसीटा गया, जिससे उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वे राजघाट के मुख्य गेट के बाहर ही बेहोश होकर गिर पड़ीं। उन्हें तुरंत इलाज के लिए पास के अस्पताल ले जाना पड़ा।
उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक जनआक्रोश: नेताओं और सामाजिक संगठनों ने साधा निशाना
राजघाट पर अंकिता की मां के साथ हुई इस कथित बदसलूकी और पुलिसिया कार्रवाई की खबर जैसे ही आग की तरह फैली, उत्तराखंड के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। उत्तराखंड के विभिन्न छात्र संगठनों, महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जो सरकार बेटियों के सम्मान और न्याय का दावा करती है, उसी के शासन में एक पीड़ित मां को अपनी बेटी के इंसाफ मांगने पर घसीटा जा रहा है। सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि अंकिता के परिवार के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार बंद नहीं हुआ और उन्हें न्याय नहीं मिला, तो यह आंदोलन केवल उत्तराखंड तक सीमित न रहकर पूरे देश की सड़कों पर उग्र रूप धारण कर लेगा।
अंकिता भंडारी हत्याकांड की पृष्ठभूमि और न्याय की अधूरी लड़ाई
गौरतलब है कि सितंबर 2022 में उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित वनंतरा रिसॉर्ट में रिसीप्शनिस्ट के रूप में काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि रिसॉर्ट के मालिक और उसके साथियों ने अंकिता पर अनैतिक काम करने का दबाव बनाया था और इनकार करने पर उसे चिल्ला नहर में धक्का दे दिया था। इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी पुलकित आर्य और उसके सहयोगियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, लेकिन अंकिता के परिजन लगातार इस केस में शामिल 'वीआईपी' (VIP) के नाम का खुलासा करने और सीबीआई (CBI) जांच की मांग कर रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि जांच एजेंसियां सत्ता संरक्षण प्राप्त रसूखदारों को बचाने का प्रयास कर रही हैं, जिसके कारण उन्हें इतने महीनों बाद भी दिल्ली आकर न्याय की भीख मांगनी पड़ रही है।