चीन से तनाव के बीच सेना के लिए 'लैंड वारफेयर डॉक्ट्रिन 2026' जारी
पूर्वी लद्दाख और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन के साथ लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद और वैश्विक स्तर पर तेजी से बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारतीय सेना ने अपनी ताकत को भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह मुस्तैद करने का ऐतिहासिक कदम उठाया है। नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय सेना कमांडरों के सम्मेलन के दौरान देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आधिकारिक तौर पर 'लैंड वारफेयर डॉक्ट्रिन 2026' (Land Warfare Doctrine 2026) का अनावरण किया है। यह नई युद्ध नीति और व्यापक फ्रेमवर्क विशेष रूप से आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक और पारंपरिक सीमाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस दौरान अगले 20 से 30 वर्षों के लिए एक लंबी रणनीतिक दृष्टि (Long-term Strategic Vision) अपनाने पर जोर देते हुए स्पष्ट किया कि भारत अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।
आधुनिक युद्ध की बदलती चुनौतियों और तकनीक आधारित हथियारों से निपटने की पुख्ता तैयारी
पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर के युद्ध क्षेत्रों (जैसे यूरोप और मध्य पूर्व) में जिस तरह से ड्रोन, सटीक मिसाइलें, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और साइबर हमलों का चलन बढ़ा है, उसने पारंपरिक सैन्य रणनीतियों को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। इसे ध्यान में रखते हुए 'लैंड वारफेयर डॉक्ट्रिन 2026' में इस बात पर विशेष बल दिया गया है कि भारतीय सेना को केवल संख्या बल के बजाय तकनीकी रूप से अत्यधिक उन्नत और चुस्त-दुरुस्त बनाया जाए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सेना को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्वायत्त प्रणालियों (Autonomous Systems), डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा और सुरक्षित संचार नेटवर्क के विकास में तेजी लानी होगी। यह नई डॉक्ट्रिन थल सेना को जल, थल, वायु, अंतरिक्ष और साइबर स्पेस जैसे सभी डोमेन में एक साथ मिलकर यानी 'मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस' (Multi-Domain Operations) को अंजाम देने में सक्षम बनाएगी।
चीन और पाकिस्तान की हरकतों पर पैनी नजर, थल सेना की भूमिगत और जमीनी ताकत का महत्व बरकरार
सीमा पर चीन की आक्रामक गतिविधियों और पाकिस्तान की तरफ से लगातार मिलने वाली चुनौतियों के बीच इस बात पर बहस छिड़ती रही है कि क्या आधुनिक युद्ध में थल सेना की भूमिका कम हुई है। इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि यद्यपि अंतरिक्ष, साइबर और समुद्री डोमेन का महत्व बढ़ रहा है, फिर भी ज़मीन पर पकड़ बनाने के लिए थल सेना और ग्राउंड फोर्सेज की भूमिका हमेशा से अपरिहार्य (Indispensable) बनी रहेगी और आगे भी बनी रहेगी। उन्होंने हालिया सैन्य ऑपरेशंस का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने हमेशा कठिन से कठिन परिस्थितियों में अपनी अद्भुत अनुकूलन क्षमता (Adaptability) का परिचय दिया है। ज़मीनी स्तर पर बंकरों, आधुनिक हथियारों, और त्वरित तैनाती की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए इस नई नीति में विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं ताकि दुश्मन की किसी भी दुस्साहसिक चाल को तुरंत नेस्तनाबूद किया जा सके।
'ऑपरेशन सिंदूर' का विशेष उल्लेख और भारतीय सेना की रणनीतिक तैयारी का दमदार उदाहरण
अपने संबोधन के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का विशेष रूप से उल्लेख किया और भारतीय सेना की उस ऑपरेशनल सफलता की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के सफल अभियान इस बात का पुख्ता सबूत हैं कि हमारे सैन्य बल आधुनिक परिस्थितियों, उन्नत हथियारों और बेहतरीन समन्वय के साथ काम करने में पूरी तरह माहिर हैं। 'ऑपरेशन सिंदूर' ने दुनिया को यह कड़ा संदेश दे दिया है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए किसी भी आवश्यक कदम को उठाने से पीछे नहीं हटेगा। यह नया डॉक्ट्रिन इसी तरह के ऑपरेशंस को भविष्य में और अधिक सटीकता, कम समय में और न्यूनतम नुकसान के साथ अंजाम देने के लिए सेना का मार्गदर्शक बनेगा।
रक्षा उत्पादन में रिकॉर्ड आत्मनिर्भरता: वित्त वर्ष 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग का आंकड़ा
किसी भी देश की सैन्य ताकत इस बात पर निर्भर करती है कि उसके हथियार और रक्षा उपकरण कितने स्वदेशी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' (Aatmanirbharta in Defence) के विजन को रेखांकित करते हुए रक्षा मंत्री ने गर्व के साथ बताया कि भारत का रक्षा उत्पादन लगातार नए मील के पत्थर छू रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान देश का कुल रक्षा उत्पादन बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया है, जबकि भारतीय रक्षा उपकरणों का निर्यात भी बढ़कर लगभग 38,000 करोड़ रुपये के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया है। भारत अब न केवल अपनी रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी ताकतों पर निर्भरता कम कर रहा है, बल्कि मित्र देशों को अत्याधुनिक हथियार भी निर्यात कर रहा है।
भविष्य के युद्धों के लिए पूरी तरह तैयार है भारत, मजबूत नेतृत्व और आधुनिक नीति से बढ़ेगा देश का मान
'लैंड वारफेयर डॉक्ट्रिन 2026' का जारी होना इस बात का प्रमाण है कि भारत की सैन्य और राजनीतिक लीडरशिप भविष्य के खतरों को भांपते हुए पूरी तरह प्रो-एक्टिव मोड में काम कर रही है। चीन के साथ लगी सीमाओं पर बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास, सीमावर्ती इलाकों में सड़कों और सुरंगों का जाल बिछाना और अब इस नए युद्ध सिद्धांत को अपनाना यह साबित करता है कि भारतीय सेना दुनिया की सबसे ताकतवर और आधुनिक सेनाओं में से एक बनने की राह पर तेजी से अग्रसर है। देश के ये कड़े और दूरदर्शी रक्षा निर्णय सीमा पर तैनात हमारे वीर जवानों का हौसला बढ़ाने के साथ-साथ दुश्मनों के मन में भारत की सामरिक शक्ति का एक मजबूत खौफ पैदा करने के लिए काफी हैं।