वेस्ट यूपी की शिक्षक और स्नातक विधान परिषद सीटों पर 18 उम्मीदवार

वेस्ट यूपी की शिक्षक और स्नातक विधान परिषद सीटों पर 18 उम्मीदवार

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक मंच पर विधान परिषद (MLC) की स्नातक और शिक्षक कोटे की सीटों को लेकर सियासी घमासान अपने चरम पर पहुंच गया है। वेस्ट यूपी के महत्वपूर्ण मेरठ खंड स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से कुल 18 उम्मीदवारों ने अपनी दावेदारी पक्की कर ली है। नामांकन वापसी और पत्रों की जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है। यद्यपि चुनावी मैदान में निर्दलीय प्रत्याशी भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों और जमीनी माहौल के मुताबिक असली और कड़ा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) के बीच ही देखने को मिल रहा है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 6 से अधिक प्रमुख जिलों में फैले इस निर्वाचन क्षेत्र में शिक्षित मतदाताओं, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों का खासा दबदबा है। यही वजह है कि दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दल इस चुनाव को आगामी बड़े राजनीतिक बदलावों और अपनी पकड़ को मजबूत करने के लिटमस टेस्ट के रूप में देख रहे हैं। भाजपा और सपा दोनों ने ही अपने मजबूत रणनीतिकारों और कैडर को मैदान में उतार दिया है ताकि मतदाताओं को अपने पाले में किया जा सके।

#1 स्नातक और शिक्षक कोटे के प्रत्याशी: बीजेपी और सपा ने किन चेहरों पर दांव लगाया?

इस हाई-प्रोफाइल चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी ने बेहद सोच-समझकर अपने उम्मीदवारों का चयन किया है। भाजपा ने जहां अपनी संगठनात्मक पकड़ और पुराने कैडर के अनुभवों पर भरोसा जताते हुए अपने कद्दावर और अनुभवी उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, वहीं समाजवादी पार्टी ने भी शिक्षित और युवाओं से जुड़ाव रखने वाले चेहरों को आगे कर चुनावी लड़ाई को बेहद रोचक बना दिया है।

स्नातक सीट पर जहां भाजपा के प्रत्याशी अपने पिछले कार्यकाल के विकास कार्यों, शिक्षा नीतियों और डबल इंजन सरकार के सुशासन के नाम पर वोट मांग रहे हैं, वहीं सपा के उम्मीदवार महंगाई, बेरोजगारी, पुरानी पेंशन योजना (OPS) और शिक्षित युवाओं की समस्याओं को जोर-शोर से उठा रहे हैं। दूसरी तरफ शिक्षक सीट पर शिक्षकों के सेवा संबंधी मुद्दों, मानदेय, पेंशन और सहायता प्राप्त विद्यालयों की मांगों को लेकर दोनों दलों के प्रत्याशी आमने-सामने हैं।

#1 निर्दलीय प्रत्याशियों की चुनौती: क्या बिगाड़ेंगे दिग्गजों का खेल?

हालांकि मुख्य मुकाबला भाजपा और सपा के बीच ही माना जा रहा है, लेकिन मैदान में डटे निर्दलीय उम्मीदवार भी बड़े राजनीतिक दलों की नींद उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। वेस्ट यूपी के विभिन्न शिक्षक संघों, अधिवक्ता मंडलों और स्थानीय डिग्री कॉलेजों से जुड़े कई स्वतंत्र प्रत्याशियों ने लंबे समय से स्नातकों और शिक्षकों के बीच व्यक्तिगत जनसंपर्क अभियान चला रखा है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि एमएलसी चुनावों में दलगत निष्ठा के साथ-साथ उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि, पहुंच और जातीय/पेशेवर जुड़ाव भी बेहद अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में अगर निर्दलीय प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्रों में अच्छा वोट बैंक हासिल करने में कामयाब रहते हैं, तो वे प्रमुख दलों के वोट गणित को प्रभावित कर सकते हैं। यही कारण है कि भाजपा और सपा के शीर्ष नेता किसी भी स्तर पर कोई जोखिम नहीं लेना चाहते।

#1 वेस्ट यूपी में क्यों अहम है यह चुनाव? 2027 के विधानसभा चुनाव का पूर्वाभ्यास

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधान परिषद की इन सीटों का अपना एक विशेष महत्व है। मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा), बुलंदशहर, बागपत और हापुड़ जैसे आर्थिक और राजनीतिक रूप से समृद्ध जिलों के स्नातक व शिक्षक मतदाता इसमें हिस्सा लेते हैं। इस चुनाव को राज्य के आगामी बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों और 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले क्षेत्र के मिजाज को भांपने का एक बड़ा माध्यम माना जा रहा है।

भारतीय जनता पार्टी जहां वेस्ट यूपी के अपने अजेय किले को बरकरार रखने के लिए बूथ स्तर पर 'मतदाता प्रमुख' बनाकर सघन जनसंपर्क अभियान चला रही है, वहीं समाजवादी पार्टी भी इस चुनाव के जरिए पश्चिमी यूपी में अपने जनाधार को और मजबूत साबित करने में जुटी है। दोनों ही खेमों के वरिष्ठ नेता और विधायक लगातार जनसभाएं और बैठकें कर वोटरों को साध रहे हैं।

#1 मतदान और मतगणना की तैयारियां पूरी: प्रशासनिक महकमा अलर्ट मोड पर

विधान परिषद की सीटों के लिए होने वाले मतदान को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए निर्वाचन आयोग और मंडल प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। सभी जिलों में पोलिंग बूथ बनाए गए हैं जहाँ मतदाता पहचान पत्र और वैध दस्तावेजों के साथ वोट डाल सकेंगे। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के साथ ही फर्जी मतदान को रोकने के लिए डिजिटल चेकिंग की व्यवस्था की जा रही है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि वेस्ट यूपी का शिक्षित और जागरूक मतदाता वर्ग किस दल के वादों और दावों पर अपनी मुहर लगाता है। क्या भाजपा अपनी जीत का परचम लहराएगी या सपा बाजी मारेगी, इसका फैसला मतगणना के दिन सामने आएगा।