प्रोटेस्‍ट मार्च पर भड़के नंदकिशोर गुर्जर, बोले- राहुल गांधी को जेल में डाल देना चाहिए

प्रोटेस्‍ट मार्च पर भड़के नंदकिशोर गुर्जर, बोले- राहुल गांधी को जेल में डाल देना चाहिए

देश की राजनीति में विरोध प्रदर्शनों और प्रोटेस्ट मार्च को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है, लेकिन इस बार भारतीय जनता पार्टी के एक फायरब्रांड विधायक के बयान ने राजनीतिक तापमान को और ज्यादा बढ़ा दिया है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले की लोनी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर (Nandkishor Gurjar) अपने तीखे और बेबाक बयानों के लिए हमेशा सुर्खियों में रहते हैं। हाल ही में विपक्षी दलों और कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा निकाले गए प्रोटेस्ट मार्च को लेकर विधायक का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान राहुल गांधी और विपक्षी नेतृत्व पर बेहद आक्रामक और तीखा हमला बोलते हुए सीधे तौर पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर दी है।

विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने गाजियाबाद के एक कॉलेज परिसर में मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के नाम पर देश की सुरक्षा और न्यायपालिका को दबाव में लाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने विपक्षी दलों द्वारा हाल ही में किए गए प्रदर्शनों और मार्च का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह के कृत्यों से देश की छवि धूमिल होती है और आम जनजीवन प्रभावित होता है। उनके इस आक्रामक बयान के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है और विपक्षी दलों की ओर से भी इस पर कड़ी प्रतिक्रियाएं आने की संभावना जताई जा रही है।

#1 "राहुल गांधी को जेल में डाल देना चाहिए, फांसी की सजा होनी चाहिए"- विधायक का विवादित बयान

अपने आक्रामक तेवर के लिए पहचाने जाने वाले विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जिस प्रकार से देश विरोधी या संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने वाले प्रोटेस्ट आयोजित किए जा रहे हैं, उससे साफ जाहिर होता है कि इसके पीछे एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने मीडिया के सामने कड़े शब्दों में मांग करते हुए कहा कि राहुल गांधी को जेल में डाल देना चाहिए और उनके इस प्रकार के बयानों व गतिविधियों के लिए उन्हें फांसी की सजा तक की मांग होनी चाहिए।

विधायक का यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल होने लगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रही तनातनी में इस तरह के बयान राजनीतिक सरगर्मी को और अधिक भड़काते हैं। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब नंदकिशोर गुर्जर ने अपने बयानों से राजनीतिक हलकों में हलचल मचाई हो, वे इससे पहले भी कई बार अपने कड़े तेवरों के चलते चर्चा में रह चुके हैं।

#1 विपक्षी दलों की कार्यप्रणाली और विरोध प्रदर्शनों पर खड़े किए गंभीर सवाल

विपक्ष द्वारा निकाले जा रहे मार्च और विरोध प्रदर्शनों की आलोचना करते हुए भाजपा विधायक ने कहा कि विपक्ष के पास अब जनता से जुड़ा कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे केवल अराजकता फैलाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों और संस्थाओं के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी करना और सड़कों पर उतरकर दबाव की राजनीति करना लोकतंत्र के स्वस्थ विकास के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है।

उन्होंने कहा कि देश की जनता सब कुछ देख रही है और आने वाले समय में जनता ऐसे लोगों को पूरी तरह से नकार चुकी है। विधायक ने जोर देकर कहा कि देश में कानून का राज है और जो कोई भी कानून व्यवस्था को अपने हाथ में लेने की कोशिश करेगा, उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद से स्थानीय स्तर पर भी राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।

#1 राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू, क्या आगे तूल पकड़ेगा यह विवाद?

नंदकिशोर गुर्जर के इस तीखे बयान के बाद विपक्षी दलों के नेताओं ने भी पलटवार करना शुरू कर दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के पास अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए इस तरह के अनर्गल बयान देने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा है। जनता के अधिकारों और लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखने के लिए विरोध प्रदर्शन करना हर राजनीतिक दल और नागरिक का मौलिक अधिकार है, जिसे दबाने के लिए इस प्रकार की भाषा का उपयोग किया जा रहा है।

आने वाले दिनों में इस बयान को लेकर राजनीतिक मंचों पर और अधिक घमासान देखने को मिल सकता है। जहाँ एक तरफ बीजेपी के समर्थक विधायक के इस रुख को राष्ट्रहित और अनुशासन से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दे रहे हैं।