बीबीएयू में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन, स्वास्थ्य शासन, डिजिटल हेल्थ और सामाजिक समानता पर हुआ मंथन
लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ के अंबेडकर स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के लोक प्रशासन विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का गुरुवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) द्वारा प्रायोजित इस संगोष्ठी का विषय 'Reimagining Health Governance for Viksit Bharat @2047' रहा। 29 और 30 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के शिक्षाविदों, कुलपतियों, वरिष्ठ प्रशासकों, नीति विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के कुलपति एवं मुख्य संरक्षक प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में स्वास्थ्य शासन की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। प्रत्येक नागरिक तक सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया। वहीं, डीन प्रो. शूरा दारापुरी ने सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े समुदायों के स्वास्थ्य अधिकारों को प्राथमिकता देने की बात कही। संगोष्ठी में आयुष्मान भारत, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज, डिजिटल हेल्थ, टेलीमेडिसिन, महामारी प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य, वृद्धजनों की देखभाल, लैंगिक समानता और आयुष चिकित्सा जैसे विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल विभाजन समाप्त करने, प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाने और सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता बताई। संयोजक डॉ. प्रदीप कुमार सिंह और सह-संयोजक प्रो. ओ.पी.बी. शुक्ला के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में शोधार्थियों ने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। आयोजन सचिव डॉ. विभूति नारायण ने धन्यवाद ज्ञापित किया। आयोजकों ने बताया कि चयनित शोध-पत्रों को संदर्भित पुस्तक अथवा प्रतिष्ठित राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित कराया जाएगा।