डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन और कड़ा चुनावी मुकाबला: क्या ओहायो के गवर्नर बन पाएंगे विवेक रामास्वामी
अमेरिकी राजनीति में अपनी एक अलग और तेजतर्रार पहचान बना चुके भारतीय-अमेरिकी उद्यमी और राजनेता विवेक रामास्वामी एक बार फिर से सुर्खियों के केंद्र में आ गए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कट्टर समर्थकों और उनके भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाने वाले विवेक रामास्वामी इस समय अमेरिका के ओहायो राज्य के गवर्नर पद के लिए चुनावी मैदान में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से गवर्नर पद के उम्मीदवार के रूप में उतरे रामास्वामी को देश के शीर्ष नेतृत्व और खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मजबूत राजनीतिक समर्थन हासिल है। हालांकि, उनके इस सियासी सफर की राह इतनी आसान भी नजर नहीं आ रही है, क्योंकि डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से राज्य की पूर्व स्वास्थ्य निदेशक और मजबूत उम्मीदवार एमी एक्टन (Amy Acton) उन्हें हर कदम पर कड़ी टक्कर दे रही हैं। चुनाव की तारीख नजदीक आते ही ओहायो के चुनावी मैदान में सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है और हर किसी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या रामास्वामी इस बाजी को अपने नाम कर पाते हैं या नहीं।
ओहायो गवर्नर चुनाव में विवेक रामास्वामी की स्थिति और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मास्टरस्ट्रोक समर्थन
प्रेसीडेंशियल प्राइमरी और सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) से जुड़े कार्यों के बाद विवेक रामास्वामी ने ओहायो के प्रांतीय स्तर की राजनीति में बड़ा कदम रखते हुए गवर्नर पद के लिए अपनी उम्मीदवारी मजबूत की है। रिपब्लिकन प्राइमरी में शानदार जीत हासिल करने के बाद अब वे जनरल इलेक्शन के कड़े मुकाबले में खड़े हैं। उनकी इस मुहिम को सबसे बड़ी ताकत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस आशीर्वाद से मिल रही है जिसमें ट्रंप ने खुलकर उनके नेतृत्व क्षमता की सराहना की है। रूढ़िवादी मतदाताओं के बीच रामास्वामी की छवि एक बेबाक व्यवसायी और वैचारिक रूप से मजबूत नेता की है जो 'वेक' कल्चर और अमेरिकी नीतियों पर खुलकर प्रहार करते हैं। ओहायो के ग्रामीण और उपनगरीय इलाकों में उनका जबरदस्त जनाधार है, जो रिपब्लिकन पार्टी के पारंपरिक वोटों को एकजुट करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन की कड़ी चुनौती और दोनों के बीच कांटे की टक्कर
दूसरी तरफ, डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार एमी एक्टन ने इस मुकाबले को बेहद रोमांचक और संघर्षपूर्ण बना दिया है। कोविड-19 महामारी के दौरान अपनी प्रशासनिक भूमिका से लाइमलाइट में आईं एक्टन को मध्यम वर्गीय परिवारों, शहरी मतदाताओं और लिबरल विचारधारा के लोगों का मजबूत समर्थन मिल रहा है। डेमोक्रेट्स ने ओहायो में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है क्योंकि वे इस महत्वपूर्ण राज्य में अपनी जीत दर्ज करने के लिए बेताब हैं। दोनों उम्मीदवारों के बीच प्रचार के दौरान तीखी बयानबाजी और विज्ञापनों के जरिए एक-दूसरे पर व्यक्तिगत व वैचारिक हमले भी देखने को मिले हैं, जिसके कारण यह चुनाव अमेरिका के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले और संवेदनशील प्रांतीय चुनावों में शुमार हो गया है।
ओपिनियन पोल्स और चुनावी सर्वे क्या कह रहे हैं: किसकी पलड़ा है भारी?
हाल ही में सामने आए विभिन्न ओपिनियन पोल्स और सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि ओहायो का गवर्नर चुनाव किसी एकतरफा नतीजे की ओर इशारा नहीं कर रहा है। कुछ प्रतिष्ठित सर्वेक्षणों में विवेक रामास्वामी को मामूली बढ़त मिलते हुए दिखाया गया है, जहां वे ग्रामीण और मध्यम आयु वर्ग के मतदाताओं के बीच आगे चल रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, कई अन्य सर्वे में एमी एक्टन और रामास्वामी के बीच का अंतर केवल एक या दो प्रतिशत का है, जो यह साबित करता है कि मुकाबला पूरी तरह से 'टॉस-अप' यानी कांटे का है। अनिर्णय की स्थिति में बैठे स्वतंत्र और मध्यमार्गी (Center) मतदाता ही इस चुनाव के असली किंगमेकर साबित होने वाले हैं, क्योंकि दोनों उम्मीदवारों का राजनीतिक भविष्य इसी वर्ग के वोटों के पाले में गिरने पर तय होगा।
ओहायो के मतदाताओं के मुख्य मुद्दे और आने वाले दिनों की चुनावी जंग की दिशा
इस हाई-प्रोफाइल चुनाव में केवल राजनीतिक चेहरे ही नहीं, बल्कि आम जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दे भी हावी हैं। अर्थव्यवस्था, महंगाई, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा प्रणाली और टैक्स सुधार ओहायो के मतदाताओं के लिए सबसे बड़े एजेंडे बने हुए हैं। विवेक रामास्वामी अपने कॉरपोरेट अनुभव और वित्तीय सुधारों के वादों के जरिए जनता को यह विश्वास दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे राज्य की आर्थिकी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। जैसे-जैसे मतदान का दिन नजदीक आ रहा है, दोनों दलों के दिग्गज नेता ओहायो के चप्पे-चप्पे पर रैलियां और जनसभाएं कर रहे हैं। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या डोनाल्ड ट्रंप का करिश्माई समर्थन और रामास्वामी की आक्रामक शैली उन्हें ओहायो का अगला गवर्नर की कुर्सी तक पहुंचा पाती है या डेमोक्रेट्स का यह दांव भारी पड़ता है।