पाकिस्तान में 25 लाख रुपये के लालच में 3 साल की मासूम की 60 साल के अधेड़ जीजा से निकाह
पड़ोसी देश पाकिस्तान से मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी खौफनाक और घिनौनी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया के इंसानी जमीर को झकझोर कर रख दिया है। पैसों की हवस और सामाजिक पतन की सारी हदें पार करते हुए एक पिता ने महज 25 लाख पाकिस्तानी रुपये के लालच में अपनी तीन साल की मासूम सी बच्ची का निकाह साठ साल के अपने ही अधेड़ उम्र के जीजा के साथ तय कर दिया और उसकी शादी भी करवा दी। इस जघन्य अपराध की भनक जब स्थानीय सामाजिक संगठनों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं को लगी, तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और भारी मात्रा में जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। मामला मीडिया में आने और चौतरफा तीव्र आलोचना होने के बाद हरकत में आई स्थानीय पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दरिंदे पिता को गिरफ्तार कर लिया है और मासूम बच्ची को सुरक्षित संरक्षण में ले लिया है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर पाकिस्तानी समाज में महिलाओं और बच्चियों की असुरक्षित स्थिति और कुप्रथाओं के भयानक चेहरे को उजागर कर दिया है।
पैसों के लालच मेंवानियत की हदें पार: क्या है इस शर्मनाक घटना की पूरी सच्चाई?
यह दिल दहला देने वाली घटना पाकिस्तान के एक दूरदराज इलाके से सामने आई है जहां गरीबी और दहेज के लोभ में इंसानियत का सौदा सरेआम किया गया। आरोपी पिता ने अपनी पारिवारिक और आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए अपनी महज तीन साल की कली जैसी मासूम बेटी की जिंदगी को एक साठ साल के बुजुर्ग के हाथों बेच डाला। उस बुजुर्ग व्यक्ति ने सौदेबाजी के तहत पच्चीस लाख रुपये की रकम उस पिता को दी, जिसके बाद बिना किसी कानूनी या नैतिक संकोच के उस छोटी सी बच्ची का निकाह उस उम्रदराज रिश्तेदार यानी जीजा के साथ पढ़वा दिया गया। बाल विवाह जैसी कुप्रथाएं दुनिया के कई हिस्सों में कानूनन अपराध हैं, लेकिन पाकिस्तान के कुछ पिछड़ों इलाकों में आज भी इस तरह की सामंती और दानवी मानसिकता खुलेआम फल-फूल रही है। जब इस कुकृत्य की तस्वीरें और खबरें सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म्स पर वायरल हुईं, तो मानवाधिकार आयोग और महिला सुरक्षा संगठनों ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन से तत्काल सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
बाल अधिकारों का घोर उल्लंघन और स्थानीय जनता का भयंकर आक्रोश
इस अमानवीय घटना के उजागर होने के बाद से ही पूरे क्षेत्र में भारी तनाव और गुस्से का माहौल बना हुआ है। स्थानीय निवासियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने थाने के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और मांग की कि इस घिनौने अपराध में शामिल सभी दोषियों को फांसी या उम्रकैद की सजा दी जानी चाहिए। बाल विवाह निषेध कानून की धज्जियां उड़ाते हुए जिस तरह से एक तीन साल की बच्ची के बचपन को रौंदा गया है, उसने हर संवेदनशील नागरिक के दिल को अंदर तक झकझोर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान में कानून और व्यवस्था की स्थिति इतनी कमजोर हो चुकी है कि वहां इस प्रकार के अपराधियों के मन में पुलिस और कानून का कोई खौफ नहीं बचा है। इस मामले में जब प्रशासन पर चौतरफा दबाव बढ़ा, तब पुलिस हरकत में आई और मुख्य आरोपी पिता को धर दबोचा, हालांकि मुख्य खरीदार यानी वह साठ साल का व्यक्ति अभी भी कानून की पकड़ से दूर बताया जा रहा है जिसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।
समाज के माथे पर कलंक: धार्मिक और सामाजिक संगठनों की कड़ी निंदा
इस शर्मनाक वाकये ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आधुनिक युग में भी कुछ लोग कितनी गिरी हुई मानसिकता का शिकार हैं। देश और दुनिया के तमाम प्रमुख धार्मिक, सामाजिक और मानवाधिकार संगठनों ने इस घटना की एक स्वर में तीव्र भर्त्सना की है। उनका कहना है कि यह केवल एक बच्ची के साथ अत्याचार नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के माथे पर एक ऐसा कलंक है जिसे कभी मिटाया नहीं जा सकता। धर्म की आड़ में इस तरह के कुकर्मों को अंजाम देने वाले लोग समाज के सबसे बड़े दुश्मन हैं। बच्ची को बाल कल्याण समिति और चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट की देखरेख में सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम उसकी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की लगातार जांच कर रही है। इस घटना ने एक बार फिर इस बात की सख्त जरूरत को रेखांकित किया है कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए और अधिक कठोर कानून बनाए जाने चाहिए और उनका कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में फिर कभी कोई पिता अपनी ही संतान के साथ ऐसा घिनौना सौदा करने की हिम्मत न जुटा सके।