अमेरिकी सांसद को भारतीय राजदूत का करारा जवाब, SIR पर उठाया था सवाल

अमेरिकी सांसद को भारतीय राजदूत का करारा जवाब, SIR पर उठाया था सवाल

विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की संप्रभुता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर उंगली उठाने की कोशिश करने वाले विदेशी राजनेताओं को भारत ने एक बार फिर करारा जवाब दिया है। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल की भारत के मतदाता सूचियों में सुधार यानी 'विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया पर की गई विवादित टिप्पणी को सिरे से खारिज करते हुए इसे भारत के आंतरिक मामलों में पूरी तरह से अस्वीकार्य हस्तक्षेप करार दिया है। भारतीय कूटनीतिक हलकों में राजदूत के इस सख्त रुख की जमकर तारीफ हो रही है। आइए एक निष्पक्ष ग्राउंड रिपोर्टर की नजर से समझते हैं कि आखिर इस पूरे विवाद की वजह क्या है और भारतीय राजदूत ने किस तरह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सदस्य को आईना दिखाया है।

क्या है SIR विवाद और अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल का बेबुनियाद दावा?

दरअसल, यह पूरा मामला उस समय गरमा गया जब वाशिंगटन से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सदस्य प्रमिला जयपाल ने भारत में चल रहे विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से कथित तौर पर करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाए जाने की मीडिया खबरों पर सार्वजनिक चिंता जताई थी। अमेरिकी सांसद ने बिना जमीनी हकीकत जाने भारत के चुनावी और राजनीतिक ताने-बाने को लेकर सवाल खड़े कर दिए थे।

भारत में जारी राजनीतिक बहस और विपक्षी दलों की आपत्तियों के बीच किसी विदेशी प्रतिनिधि द्वारा इस मुद्दे पर सीधे टिप्पणी करना भारत की स्वतंत्र चुनावी प्रणाली पर हमला माना गया। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पहले ही साफ कर चुका है कि SIR प्रक्रिया के तहत किसी भी वैध मतदाता का नाम गलती से हटने पर फॉर्म-6 तथा दावे और आपत्तियों के संवैधानिक माध्यमों से पुनः नाम जोड़ने की पारदर्शी व्यवस्था मौजूद है। इसके बावजूद अमेरिकी गलियारों से आई टिप्पणी ने भारत सरकार और कूटनीतिक तंत्र को आक्रामक रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया।

भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा की अमेरिकी सांसद को दोटूक नसीहत

अमेरिकी सांसद के इस गैर-जिम्मेदाराना बयान के तुरंत बाद अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर बेहद कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दर्ज कराई। क्वात्रा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय चुनावी और राजनीतिक प्रक्रियाओं पर प्रमिला जयपाल की टिप्पणी भारत के अंदरूनी मामलों में सीधा और अस्वीकार्य हस्तक्षेप है।

भारतीय राजदूत ने दुनिया को संदेश देते हुए दोहराया कि भारत एक अत्यंत जीवंत और परिपक्व लोकतंत्र है, जहां मजबूत, स्वतंत्र और निष्पक्ष संवैधानिक संस्थाएं कुशलतापूर्वक कार्य कर रही हैं। भारत का स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने का एक लंबा और गौरवशाली इतिहास रहा है, जिस पर किसी बाहरी देश या सांसद के प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। क्वात्रा ने यह भी जोड़ा कि यदि अमेरिकी सांसद के मन में किसी भी प्रकार की गलतफहमी या भ्रम है, तो भारतीय दूतावास उनकी गलतफहमियों को दूर करने के लिए बातचीत के लिए हमेशा तैयार है।

भारत की मजबूत कूटनीति और विदेशी दखलंदाजी पर 'जीरो टॉलरेंस'

यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी या पश्चिमी देशों के नेताओं ने भारत के घरेलू और संवैधानिक मुद्दों पर बयानबाज़ी करने की कोशिश की है। इससे पहले भी कृषि कानूनों, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) या आंतरिक सुरक्षा के मुद्दों पर कई विदेशी नेताओं ने टिप्पणी की थी, जिन पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने हमेशा कड़ा रुख अपनाया है।

भारतीय विदेश नीति अब अपने रणनीतिक हितों और आंतरिक संप्रभुता को लेकर अत्यंत सख्त और स्पष्ट रुख रखती है। वैश्विक मंच पर भारत का संदेश बहुत साफ है कि देश के लोकतांत्रिक अधिकारों, चुनावी सुधारों और संवैधानिक प्रक्रियाओं से जुड़े फैसले सिर्फ और सिर्फ भारत की जनता और यहां की स्वतंत्र संस्थाएं करेंगी। किसी भी बाहरी मुल्क या विदेशी प्रतिनिधि को भारत के घरेलू नीतिगत मामलों में उपदेश देने या दखलंदाजी करने का कोई हक नहीं है।