मालदीव राजनीति: भारत के करीबी पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद गिरफ्तार
हिंद महासागर के सामरिक और राजनीतिक पटल पर एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। मालदीव के पूर्व विदेश मंत्री, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के पूर्व अध्यक्ष और मुख्य विपक्षी दल मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) के वरिष्ठ नेता अब्दुल्ला शाहिद को मालदीव पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। भारत के साथ मजबूत और नजदीकी संबंधों की वकालत करने वाले अब्दुल्ला शाहिद की इस अचानक गिरफ्तारी से न केवल मालदीव की घरेलू राजनीति में भारी भूचाल आ गया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में भी चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
मालदीव पुलिस की कार्रवाई और लगे आरोप
मालदीव पुलिस प्रशासन द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अब्दुल्ला शाहिद को गंभीर आरोपों की जांच के तहत हिरासत में लिया गया है। पुलिस की ओर से जारी बयान में बताया गया कि यह मामला एक नाबालिग के खिलाफ यौन उत्पीड़न/हिंसा से जुड़ी जांच से संबंधित है।
हालांकि, विपक्षी दलों और उनके समर्थकों का मानना है कि वर्तमान सरकार राजनीतिक प्रतिशोध की भावना के तहत मुख्य विपक्षी चेहरों को निशाना बना रही है। अब्दुल्ला शाहिद पिछले काफी समय से देश में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की नीतियों और विदेश नीति के रुख की तीखी आलोचना कर रहे थे। उनकी गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब विपक्षी दल देश की राजनीति में एकजुट होकर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर रहे थे।
भारत के करीबी और 'इंडिया फर्स्ट' नीति के पक्षधर
अब्दुल्ला शाहिद को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में मालदीव के सबसे अनुभवी और प्रभावशाली राजनेताओं में से एक माना जाता है। इब्राहिम मोहम्मद सोलिह की सरकार में विदेश मंत्री रहते हुए उन्होंने भारत और मालदीव के संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया था। उन्होंने कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से भारत को मालदीव का "पहला उत्तरदाता" (First Responder) और सबसे विश्वसनीय पड़ोसी करार दिया था।
उनकी इस विदेश नीति के कारण भारत के साथ मालदीव के बुनियादी ढांचे, रक्षा सहयोग और वित्तीय मदद से जुड़े कई बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे। यही वजह है कि उनकी गिरफ्तारी की खबर के बाद नई दिल्ली सहित पूरे दक्षिण एशिया के राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें माले के घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।
मालदीव में सत्ता परिवर्तन और बदलती भू-राजनीति
मालदीव में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही घरेलू राजनीति में भारी अस्थिरता और तनाव देखा जा रहा है। सत्ताधारी गठबंधन और विपक्षी एमडीपी (MDP) के बीच खींचतान लगातार बढ़ती जा रही है। अब्दुल्ला शाहिद विपक्षी खेमे के सबसे बड़े चेहरों में से एक हैं, जो संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष पद को संभालकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मालदीव का नाम स्थापित कर चुके हैं।
ऐसे में एक वरिष्ठ विपक्षी नेता और पूर्व राजनयिक पर हुई इस कड़ी कानूनी कार्रवाई से देश का राजनीतिक माहौल काफी गरमा गया है। समर्थकों का आरोप है कि लोकतंत्र की आवाज़ को दबाने के लिए प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि जांच एजेंसियों का कहना है कि मामला पूरी तरह से कानूनी और जांच के दायरे में है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठते सवाल और भावी दिशा
अब्दुल्ला शाहिद की गिरफ्तारी के बाद मालदीव की विधिक प्रक्रिया और मानवाधिकारों को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सवाल उठने की संभावना जताई जा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि अदालत में इस मामले की क्या सुनवाई होती है और विपक्ष इस कानूनी व राजनीतिक चुनौती का सामना किस प्रकार करता है। फिलहाल, माले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और पूरे क्षेत्र की नजरें इस राजनीतिक घटनाक्रम पर बनी हुई हैं।