उत्तर कोरिया ने AI-गाइडेड टॉरपीडो Zam 2.0 का किया सफल परीक्षण
पूर्वी एशिया और कोरियाई प्रायद्वीप के सैन्य संतुलन में उस वक्त बहुत बड़ा और भयावह मोड़ आ गया जब उत्तर कोरिया ने अपने सबसे नए और खतरनाक एआई-गाइडेड अंडरवॉटर टॉरपीडो 'Zam 2.0' (Zam 2.0 AI-Guided Torpedo) का सफल परीक्षण करने का आधिकारिक दावा किया। प्योंगयांग द्वारा पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) दागने के ठीक 24 घंटे बाद किए गए इस दूसरे बड़े नौसैनिक हथियार परीक्षण ने अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के सैन्य मुख्यालयों में तहलका मचा दिया है। सर्वोच्च नेता किम जोन्ग उन की सीधी देखरेख में हुए इस गुप्त समुद्री परीक्षण ने यह साफ कर दिया है कि उत्तर कोरिया अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का इस्तेमाल कर समंदर की गहराइयों में छिपे दुश्मन के युद्धपोतों और पनडुब्बियों को अचूक तरीके से तबाह करने की क्षमता हासिल कर चुका है।
उत्तर कोरिया की नई नौसैनिक क्रांति: AI-गाइडेड टॉरपीडो Zam 2.0 की मारक क्षमता और खासियतें
उत्तर कोरियाई रक्षा अनुसंधान अकादमी द्वारा विकसित 'Zam 2.0' कोई साधारण टारपीडो नहीं है, बल्कि यह अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) और ऑटोनामस नेविगेशन सिस्टम से लैस एक स्टेल्थ अंडरवॉटर वेपन है। रक्षा विश्लेषकों के अनुसार यह टॉरपीडो पानी के भीतर लंबी दूरी तक तैरते हुए दुश्मन के जहाजों के सोनार (Sonar) और रडार सिग्नेचर को पहचान कर खुद अपना रास्ता तय करने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका एआई-गाइडेड हंटिंग मोड है, जो दुश्मन के नौसैनिक जहाजों द्वारा बिछाए गए भटकाने वाले डेकॉय (Decoy) और काउंटर-मेजर्स को चकमा देकर सटीक निशाने पर विस्फोट करता है। इस सफल परीक्षण के बाद उत्तर कोरियाई नौसेना की पानी के भीतर हमला करने की क्षमता कई गुना बढ़ गई है, जिसे भेद पाना पारंपरिक नौसैनिक रक्षा प्रणालियों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।
पनडुब्बी मिसाइल टेस्ट के ठीक 24 घंटे बाद परीक्षण: अमेरिका और सहयोगियों को सख्त रणनीतिक संदेश
उत्तर कोरिया द्वारा लगातार दो दिनों में दो बड़े और घातक नौसैनिक हथियारों का परीक्षण करना कोई संयोग नहीं है, बल्कि यह वाशिंगटन और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के लिए एक सुव्यवस्थित शक्ति प्रदर्शन है। महज एक दिन पहले उत्तर कोरिया ने अपनी नई पीढ़ी की परमाणु संचालित पनडुब्बी से लंबी दूरी की मिसाइल का सफल प्रक्षेपण किया था, और उसके तुरंत बाद Zam 2.0 का यह परीक्षण किया गया। प्योंगयांग का यह आक्रामक रुख अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के बीच चल रहे साझा नौसैनिक अभ्यासों का सीधा जवाब माना जा रहा है। किम जोन्ग उन ने इस परीक्षण के बाद अपने भाषण में साफ कहा कि उत्तर कोरिया अपनी समुद्री संप्रभुता की रक्षा के लिए परमाणु और एआई-आधारित नौसैनिक हथियारों का विस्तार बिना किसी रोक-टोक के जारी रखेगा।
एआई हथियार और पानी के भीतर परमाणु क्षमता का बढ़ता खतरा: विशेषज्ञों की गहरी चिंता
सैन्य विशेषज्ञों और नौसैनिक रणनीतिकारों का मानना है कि Zam 2.0 में भविष्य में छोटे आकार के सामरिक परमाणु हथियार (Tactical Nuclear Warheads) भी लगाए जा सकते हैं। यदि उत्तर कोरिया एआई-गाइडेड टॉरपीडो और अंडरवॉटर ड्रोन तकनीक को पूरी तरह से मास्टर कर लेता है, तो प्रशांत महासागर में तैनात अमेरिकी विमानवाहक पोतों (Aircraft Carriers) और परमाणु पनडुब्बियों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा। पारंपरिक टॉरपीडो के विपरीत एआई टॉरपीडो पानी की गहराई में बिना कोई आवाज किए लंबे समय तक घात लगाकर बैठा रह सकता है और आदेश मिलते ही खुद-ब-खुद हमले को अंजाम दे सकता है। प्योंगयांग की यह नई तकनीक पेंसिल्वेनिया और वाशिंगटन के रक्षा हलकों में भारी चिंता का सबब बन गई है।
पूर्वी एशिया में गहराता सुरक्षा संकट और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया
इस घातक परीक्षण के तुरंत बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने उत्तर कोरिया के इस कड़े कदम की तीखी आलोचना की है। टोक्यो और सोल ने अपनी नौसैनिक चौकसी और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (ASW) को हाई अलर्ट पर रख दिया है। वहीं अंतरराष्ट्रीय परमाणु और हथियार नियंत्रण निकायों का मानना है कि उत्तर कोरिया पर लगे कड़े प्रतिबंधों के बावजूद रूस या अन्य गुप्त तकनीकों के जरिए प्योंगयांग तक एआई चिप्स और एवियोनिक्स का पहुंचना बेहद खतरनाक ट्रेंड है। कोरियाई प्रायद्वीप में मंडराते युद्ध के बादलों के बीच अब यह देखना होगा कि अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र इस नए एआई-गाइडेड टॉरपीडो खतरे से निपटने के लिए क्या नए प्रतिबंध या रणनीतिक कदम उठाते हैं।