पीओके में प्रदर्शनकारियों पर बरपा पाक सेना का कहर
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थानीय नागरिकों और मानवाधिकारों का दमन करने की इंतहा पार हो चुकी है। रावलकोट इलाके में अपनी बुनियादी मांगों और अधिकारों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे निहत्थे नागरिकों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सेना ने भारी बर्बरता की हदें पार कर दी हैं। प्राप्त रिपोर्टों और सामने आए खौफनाक वीडियो के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने और उनकी आवाज को हमेशा के लिए दबाने के लिए सुरक्षा बलों ने न केवल ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं, बल्कि आसमान से ड्रोन का इस्तेमाल कर निगरानी और हमलों जैसी क्रूर कार्रवाइयों को भी अंजाम दिया। इस भीषण नरसंहार और बर्बर कार्रवाई में कई बेकसूर युवाओं के हताहत होने की खबर है, जिसके बाद से पूरे इलाके में तनाव चरम पर है और लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है।
रावलकोट में कैसे भड़की हिंसा और क्या है प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के रावलकोट में पिछले कुछ दिनों से हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए थे। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में हजारों की संख्या में स्थानीय लोग बिजली दरों में भारी बढ़ोतरी, भारी भरकम टैक्स, और मूलभूत सुविधाओं की कमी के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने हक की मांग कर रहे हैं और उनके हाथों में केवल सफेद झंडे थे। इसके बावजूद पाकिस्तानी प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने उनकी एक नहीं सुनी। जैसे ही यह जनसैलाब रावलकोट के मुख्य चौराहों और प्रमुख मार्गों की ओर बढ़ा, वैसे ही पुलिस और पाकिस्तानी सेना के जवानों ने बेरहमी से बल प्रयोग करना शुरू कर दिया, जिससे शांतिपूर्ण प्रदर्शन देखते ही देखते जंग के मैदान में तब्दील हो गया।
अंधाधुंध फायरिंग और ड्रोन निगरानी से दहशत का माहौल
इस हिंसक झड़प के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए भीड़ पर सीधी गोलियां बरसाईं। चश्मदीदों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए आधुनिक हथियारों के साथ-साथ ड्रोन तकनीक का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। हवा में उड़ते ड्रोन के जरिए प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर नजर रखी गई और फिर सुनियोजित तरीके से उन पर ताबड़तोड़ गोलियां दागी गईं। इस गोलीबारी में कई नौजवान लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़े। सोशल मीडिया और विभिन्न रिपोर्ट्स में सामने आए वीडियो इस खौफनाक मंजर की गवाही दे रहे हैं, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि कैसे सुरक्षाकर्मी निहत्थे नागरिकों पर जुल्म ढाह रहे हैं।
इंटरनेट और कम्युनिकेशंस ब्लैकआउट से सच्चाई छिपाने की कोशिश
इस पूरी बर्बर कार्रवाई के बाद पाकिस्तानी प्रशासन ने क्षेत्र में सूचना के आदान-प्रदान को पूरी तरह रोकने के लिए भारी सेंसरशिप लागू कर दी है। रावलकोट और आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवाओं और मोबाइल नेटवर्क को पूरी तरह से ठप (Blackout) कर दिया गया है ताकि अंदर की असली तस्वीरें और वीडियो बाहर दुनिया तक न पहुंच सकें। इसके बावजूद स्थानीय नागरिकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने किसी तरह इन खौफनाक वीडियो को बाहर साझा किया है, जिससे पाकिस्तान का असली चेहरा बेनकाब हो गया है। घायलों को समय पर अस्पताल न मिलने और अस्पतालों में चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी के कारण स्थिति और भी अधिक भयावह बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठी आवाजें और पाकिस्तान सरकार की चुप्पी
पीओके में हुई इस वीभत्स घटना के बाद दुनिया भर में रह रहे कश्मीरी समुदाय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों में भारी रोष व्याप्त है। प्रवासी कश्मीरियों ने पाकिस्तान के दूतावासों के बाहर प्रदर्शन कर इस जनसंहार के खिलाफ कड़ी नाराजगी जताई है और संयुक्त राष्ट्र (UN) से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान की सरकार और सेना हमेशा से पीओके के नागरिकों के अधिकारों का हनन करती आई है, लेकिन इस बार का दमन और उत्पीड़न पिछले तमाम रिकॉर्ड तोड़ चुका है। स्थानीय नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि गोलियों और ड्रोनों के डर से यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है, बल्कि यह दमनकारी नीतियों के खिलाफ और अधिक तीव्र होगा।