बलूचिस्तान में बेकाबू हुए हालात: BLA ने 12 दिनों में किए 34 बड़े हमले

बलूचिस्तान में बेकाबू हुए हालात: BLA ने 12 दिनों में किए 34 बड़े हमले

पाकिस्तान के सबसे बड़े और संसाधन संपन्न प्रांत बलूचिस्तान से इस वक्त की सबसे बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है, जहां बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने सुरक्षा बलों पर अपने हमलों की रफ्तार बेहद तेज कर दी है। प्रतिबंधित संगठन बीएलए ने हाल ही में जारी किए गए अपने एक विस्तृत ब्योरे में दावा किया है कि उसने मात्र 12 दिनों के भीतर यानी 9 से 20 अक्टूबर के बीच बलूचिस्तान के अलग-अलग जिलों में कुल 34 सनसनीखेज और सुनियोजित हमले किए हैं। संगठन का दावा है कि इन ताबड़तोड़ ऑपरेशनों में पाकिस्तानी सेना के जवानों और सैन्य खुफिया विंग के अधिकारियों समेत कुल 23 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं। इस लगातार बढ़ती हिंसा और अशांति के बाद से पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान और सरकार के गलियारों में भारी खलबली मच गई है, क्योंकि बलूचिस्तान में विद्रोही लगातार सरकारी नियंत्रण को खुली चुनौती दे रहे हैं।

महज 12 दिनों में 34 हमलों का ब्योरा और पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान का दावा

बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने इन 12 दिनों के दौरान किए गए अपने हमलों का पूरा टाइमलाइन चार्ट दुनिया के सामने रखा है, जिससे पता चलता है कि किस प्रकार आतंकवाद विरोधी अभियानों और सैन्य चौकियों को निशाना बनाया गया। संगठन के मुताबिक, इन 34 ऑपरेशनों में पाकिस्तानी सेना के 14 नियमित जवान और सैन्य खुफिया एजेंसी के 9 सदस्य मौत के घाट उतार दिए गए हैं, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके अलावा संघर्ष के दौरान एक सक्रिय पाकिस्तानी सैनिक को बंधक बनाए जाने का भी दावा किया गया है। बीएलए के लड़ाकों ने कई प्रमुख राजमार्गों और व्यापारिक मार्गों पर अवरोधक लगाकर आवाजाही को अपने नियंत्रण में ले लिया तथा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के विभिन्न प्रोजेक्ट्स व सैन्य रसद ले जाने वाले वाहनों को रोककर उनमें तोड़फोड़ की। इस दौरान हुई आमने-सामने की भीषण मुठभेड़ों में बीएलए के भी 6 लड़ाकों के मारे जाने की पुष्टि की गई है, जिससे यह साफ होता है कि बलूचिस्तान की धरती पर सुरक्षा बल और विद्रोहियों के बीच जंग अब बेहद भीषण रूप ले चुकी है।

बलूचिस्तान में गहराता भू-राजनीतिक संकट और आर्थिक गलियारे पर मंडराता स्थायी खतरा

विद्रोही संगठनों द्वारा लगातार किए जा रहे इस प्रकार के हमलों ने पाकिस्तान की आर्थिक और सामरिक रीढ़ को हिलाकर रख दिया है। बलूचिस्तान में प्राकृतिक संसाधनों की बहुतायत होने के बावजूद वहां के स्थानीय लोग लंबे समय से अधिकारों और विकास से वंचित रहने का आरोप लगाते रहे हैं, जिसका फायदा उठाकर बलूच राष्ट्रवादी संगठन उग्रवादी मार्ग पर उतर आए हैं। इन हमलों के बाद से पाकिस्तान ने प्रांत में सुरक्षा बढ़ा दी है और लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद बलूच विद्रोहियों के हौसले पस्त होने का नाम नहीं ले रहे हैं। इस आंतरिक संघर्ष और अस्थिरता का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ग्वादर बंदरगाह और CPEC परियोजनाओं पर पड़ रहा है, जिससे विदेशी निवेशकों और चीन की चिंताएं भी काफी बढ़ गई हैं। यदि स्थिति पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो यह संघर्ष आने वाले समय में पाकिस्तान के लिए एक बहुत बड़ा राष्ट्रीय संकट साबित हो सकता है।