अबू धाबी के शाही परिवार के डरावने काले कारनामे
दुनिया की सबसे अमीर और ताकतवर रियासतों में शुमार संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी का शाही परिवार 'अल नाहयान' अपनी अकूत दौलत और आलीशान जिंदगी के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। लेकिन इस चकाचौंध से भरे महल की दीवारों के पीछे एक ऐसा खौफनाक सच छिपा है, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। एक तरफ जहां इस राजवंश के पास अरबों-खरबों डॉलर के साम्राज्य का मालिकाना हक है, वहीं दूसरी तरफ इस परिवार पर बंधक मजदूरी, इंसानों के कत्ल की कोशिश, टॉर्चर टेप और गुलाम बनाकर अत्याचार करने जैसे बेहद संगीन अंतरराष्ट्रीय आरोप लगे हैं। आइए एक स्वतंत्र ग्राउंड रिपोर्टर की नजर से समझते हैं कि आखिर इस शाही महल के पीछे कौन-कौन से सनसनीखेज काले कारनामे छुपे हुए हैं।
लीक्ड टॉर्चर टेप का वो काला सच जिसने हिला दी दुनिया
अबू धाबी शाही परिवार का सबसे बड़ा विवाद उस समय पूरी दुनिया के सामने आया, जब एक बेहद दर्दनाक और क्रूर 'टॉर्चर टेप' अंतरराष्ट्रीय मीडिया में लीक हो गया। इस वीडियो में अबू धाबी के शेख ईसा बिन जायेद अल नाहयान को एक अफगानी व्यापारी के साथ अमानवीय और खौफनाक हरकत करते हुए रंगे हाथों देखा गया। लीक्ड वीडियो की जो तस्वीरें सामने आईं, वे किसी भी इंसान को अंदर तक झकझोर सकती हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शेख ईसा उस बेबस व्यापारी पर गोलियां बरसा रहे थे, उसके शरीर के संवेदनशील हिस्सों में मवेशियों को दिए जाने वाले इलेक्ट्रिक शॉक लगा रहे थे और लोहे की कीलों से लगे लकड़ी के डंडे से उस व्यापारी को अधमरा होने तक पीट रहे थे। यही नहीं, दरिंदगी की सारी हदें पार करते हुए व्यापारी के जख्मों पर नमक छिड़का गया और उसे जिंदा जलाने की भी कोशिश की गई। इस टेप के सार्वजनिक होने के बाद पूरी दुनिया में यूएई के कानून और मानवाधिकार व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।
जब बेल्जियम के आलीशान होटल में राजकुमारियों ने बनाए गुलाम नौकर
शाही परिवार की दबंगई और क्रूरता की कहानियां सिर्फ मध्य पूर्व तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि यह यूरोप की सड़कों और लग्जरी होटलों तक फैली हुई हैं। साल 2017 में यूरोपीय न्याय प्रणाली ने अबू धाबी शाही परिवार की 8 राजकुमारियों को मानव तस्करी और नौकरों को गुलामों की तरह रखने के जुर्म में दोषी करार दिया था।
दरअसल, शेखा हमदा अल-नाहयान अपनी सात बेटियों के साथ ब्रुसेल्स के प्रसिद्ध 'कॉनराड होटल' का पूरा एक फ्लोर किराए पर लेकर लगभग आठ महीने रुकी थीं। वे अपने साथ 20 से भी अधिक विदेशी घरेलू नौकरों को लाई थीं। अदालत में यह साबित हुआ कि इन कर्मचारियों को होटल के कमरों में कैद करके रखा जाता था, उनका पासपोर्ट छीन लिया गया था और उन्हें बासी या राजकुमारियों के खाने से बचा हुआ जूठा खाना खाने पर मजबूर किया जाता था। होटल के निजी सुरक्षाकर्मियों के कड़े पहरे के कारण कोई बाहर भाग नहीं सकता था। जब एक साहसी नौकर जान बचाकर भागने में कामयाब हुआ, तब जाकर यूरोपीय मानवाधिकार एजेंसी और पुलिस ने छापेमारी कर इस अमानवीय गुलामी का पर्दाफाश किया।
कफाला सिस्टम के नाम पर आधुनिक गुलामी का भयानक जाल
अबू धाबी और संयुक्त अरब अमीरात में चल रहा 'कफाला सिस्टम' विदेशी कर्मचारियों के लिए एक तरह से कानूनी गुलामी का लाइसेंस बन चुका है। एशियाई और अफ्रीकी देशों से आने वाले गरीब मजदूर, जो अपने परिवारों का पेट पालने के सपने लेकर खाड़ी देशों में कदम रखते हैं, वे अक्सर इन शाही रसूखदारों के जाल में फंस जाते हैं।
कफाला प्रणाली के तहत जब कोई मजदूर यूएई पहुंचता है, तो उसके नियोक्ता उसका पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेज तुरंत जब्त कर लेते हैं। दिन में 18 से 20 घंटे बिना किसी आराम के काम कराना, समय पर खाना न देना और मजदूरी मांगने पर प्रताड़ित करना यहां की आम कहानियों में से एक बन चुका है। यदि कोई पीड़ित मजदूर अपनी जान बचाकर भागने की कोशिश करता है, तो उस पर 'absconding' यानी फरार होने का केस दर्ज करवाकर पुलिस से गिरफ्तार करा दिया जाता है।
रसूख के आगे कैसे हार जाती है न्याय व्यवस्था?
इन तमाम डरावने वाकयों के बाद सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी शाही सदस्यों पर अक्सर कोई बड़ा कानूनी शिकंजा नहीं कस पाता। टॉर्चर टेप मामले में अंतरराष्ट्रीय दबाव बनने के बाद अदालती ड्रामा तो हुआ, लेकिन स्थानीय अदालत ने मेडिकल ग्राउंड और मानसिक स्थिति का हवाला देते हुए शेख को बरी कर दिया, जबकि उल्टे उस शख्स को ही सजा सुना दी गई जिसने इस अत्याचार का वीडियो लीक किया था।
इसी तरह यूरोपीय अदालतों में भी मामूली आर्थिक जुर्माना और सस्पेंडेड सजा के बाद शाही सदस्य आसानी से बच निकलते हैं। दौलत, तेल के अकूत भंडार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के दम पर अबू धाबी का शाही परिवार लगातार अपने काले कारनामों को छिपाने की कोशिश करता आ रहा है। लेकिन लीक्ड टेप्स और पीड़ित नौकरों के बयानों ने दुनिया के सामने यह साबित कर दिया है कि उनकी बेहिसाब दौलत के पीछे अमानवीय क्रूरता और खौफनाक सच छुपा हुआ है।