हूती हमलों के बीच सऊदी अरब में अमेरिकी राजनयिकों को दूतावास छोड़ने का आदेश

हूती हमलों के बीच सऊदी अरब में अमेरिकी राजनयिकों को दूतावास छोड़ने का आदेश

मध्य पूर्व के कूटनीतिक और सामरिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है, जहां लाल सागर और यमन की तरफ से लगातार बढ़ रहे हूती विद्रोहियों के खतरनाक हमलों के बीच सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी दूतावास को लेकर एक कड़ा निर्देश जारी किया गया है। वाशिंगटन ने सुरक्षा के मद्देनजर रियाद स्थित अपने अमेरिकी राजनयिकों और गैर-जरूरी कर्मचारियों को तुरंत दूतावास छोड़ने और देश से सुरक्षित बाहर निकलने का सख्त आदेश दे दिया है। इस अचानक आए बड़े कूटनीतिक फैसले के बाद से पूरी दुनिया में यह कयास लगाए जाने लगे हैं कि क्या अमेरिका और खाड़ी देशों के बीच चल रहा यह तनाव अब किसी भीषण और सर्वनाशक पूर्णकालिक युद्ध में बदलने वाला है। इस घटना ने एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नींद उड़ा दी है, क्योंकि जब भी महाशक्तियां अपने राजनयिकों को इस तरह से वापस बुलाती हैं, तो उसके पीछे बेहद गंभीर खुफिया इनपुट और आसन्न खतरे की आशंका होती है, जो आने वाले दिनों में पूरे पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से हिलाकर रख सकती है।

लाल सागर में हूती विद्रोहियों का कहर और अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मंडराता बड़ा खतरा

पिछले कुछ महीनों से लाल सागर, अदन की खाड़ी और सऊदी अरब के आसमान में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा दागे जाने वाले ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों की वारदातों में तेजी से इजाफा हुआ है। हूती लगातार अमेरिकी युद्धपोतों, पश्चिमी जहाजों और खाड़ी देशों में स्थित सामरिक ठिकानों को अपना निशाना बना रहे हैं, जिससे वैश्विक व्यापार का यह मुख्य मार्ग भारी खतरे की जद में आ चुका है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को इस बात के पुख्ता इनपुट मिले थे कि हूती विद्रोही आने वाले दिनों में सऊदी अरब और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किसी बहुत बड़े और समन्वित आतंकवादी या मिसाइल हमले को अंजाम देने की फिराक में हैं। इसी आसन्न और गंभीर खतरे को भांपते हुए जो बाइडन प्रशासन ने बिना कोई जोखिम उठाए तुरंत अपने राजनयिकों और उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कड़ा कदम उठाया है। इस बीच खाड़ी देशों के अन्य अमेरिकी मिशनों को भी हाई अलर्ट पर रख दिया गया है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

क्या अमेरिका और उसके सहयोगी देश मध्य मिडिल ईस्ट में शुरू करने वाले हैं कोई निर्णायक सैन्य अभियान

इस पूरे घटनाक्रम के बाद वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिकारों का मानना है कि अमेरिका और उसके प्रमुख सहयोगी देश अब हूती विद्रोहियों और उनके पीछे छिपी ताकतों के खिलाफ किसी बहुत बड़े और निर्णायक सैन्य अभियान की रूपरेखा तैयार कर चुके हैं। रियाद से अमेरिकी राजनयिकों की यह निकासी इस बात का साफ संकेत है कि आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में भारी गोलाबारी, हवाई हमले और सैन्य संघर्ष अपने चरम पर पहुंच सकते हैं, जिसके चलते सामान्य नागरिकों और राजनयिकों का वहां रुकना जानलेवा साबित हो सकता है। यदि अमेरिका यमन और ईरान समर्थित इन मिलिशिया समूहों के खिलाफ कोई बड़ा पूर्ण सैन्य आक्रमण शुरू करता है, तो इसका असर केवल लाल सागर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर इसका बेहद गहरा और नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। बारूद के ढेर पर बैठे मध्य पूर्व में इस ताज़ा तनाव ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि दुनिया एक बार फिर से किसी बड़े और विनाशकारी भू-राजनीतिक संकट की मुहाने पर खड़ी है, जिस पर हर देश की पैनी नजर टिकी हुई है।