'हम इनका पीछा करेंगे': अमेरिका ने भारतीय कपल और 9 कंपनियों पर लगाए कड़े प्रतिबंध
वैश्विक कूटनीति और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के मोर्चे पर एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय (US Department of the Treasury) ने एक बेहद सख्त कदम उठाते हुए भारत के एक दंपति (पति-पत्नी) और उनसे जुड़ी 9 भारतीय व अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। वाशिंगटन का आरोप है कि इस भारतीय दंपति और उनकी कंपनियों ने एक विशाल आपराधिक नेटवर्क चलाकर फर्जी झंडों (Fraudulent Maritime Registrations) और मैरीटाइम प्रमाणपत्रों के जरिए प्रतिबंधों का सामना कर रहे ईरान के 'शैडो ऑयल बेड़े' (Shadow Fleet) को तेल परिवहन में सीधी मदद पहुंचाई है। अमेरिकी अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि जो भी संस्थाएं या व्यक्ति ईरान के आर्थिक नेटवर्क या सैन्य संगठनों की मदद करेंगे, अमेरिका उनका पीछा करेगा और उन पर सख्त कार्रवाई जारी रखेगा।
अमेरिका का 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' और भारतीय दंपति पर गंभीर आरोप
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कार्रवाई 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' (Operation Economic Outcast) के तहत की गई है। इस कार्रवाई के केंद्र में चंडीगढ़ से जुड़े भारतीय व्यवसायी सुनील कुमार शर्मा, उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद और उनके दो अन्य सहयोगी हैं। अमेरिका का आरोप है कि इस दंपति ने डोमिनिका, अरूबा, निकारागुआ और सिंट मार्टन जैसे द्वीपीय देशों के फर्जी मैरीटाइम फ्लैग रजिस्ट्रेशन और कागजात तैयार किए। इन फर्जी रजिस्ट्रेशनों का इस्तेमाल उन तेल टैंकरों और जहाजों पर किया गया, जो अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए ईरान के पेट्रोलियम उत्पादों को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में ले जा रहे थे।
नेटवर्क से जुड़ी 9 कंपनियां और फर्जी रजिस्ट्रेशन का खौफनाक ताना-बाना
अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने जांच के बाद जिन 9 संस्थाओं को प्रतिबंधित सूची में डाला है, उनमें भारत स्थित 8 कंपनियां और सिंगापुर स्थित एक अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग कंपनी शामिल है। जांच में सामने आया है कि 'ओशिएनिक टेक्नोलॉजीज इंडिया' (Oceaniek Technologies India) नामक कंपनी के जरिए फर्जी शिप रजिस्ट्री नेटवर्क तैयार किए जाते थे। जब अमेरिकी और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों का दबाव बढ़ा, तो प्रबंधन की कमान पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद ने संभाल ली और नई शेल कंपनियों का गठन किया। अमेरिकी रिपोर्ट का दावा है कि इस नेटवर्क ने न केवल सामान्य व्यापारिक जहाजों बल्कि ईरान की सेना और उसके समर्थित सशस्त्र गुटों के लिए काम करने वाले तेल टैंकरों (जैसे लताफा, बाइनरी स्टार और वेरा) को भी नकली झंडे और सुरक्षा प्रमाणपत्र प्रदान किए।
अमेरिकी प्रतिबंधों का क्या होगा असर और कंपनियों की स्थिति
अमेरिका द्वारा घोषित इन कड़े प्रतिबंधों के तहत प्रतिबंधित दंपति और नौ कंपनियों की अमेरिका में मौजूद या अमेरिकी नियंत्रण वाली सभी संपत्तियों को तुरंत प्रभाव से फ्रीज (Asset Blocked) कर दिया गया है। इसके साथ ही, किसी भी अमेरिकी नागरिक या विदेशी संस्था को इन कंपनियों के साथ किसी भी प्रकार का वित्तीय लेनदेन करने से रोक दिया गया है। अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग और शिपिंग नेटवर्क से कट जाने के कारण इन कंपनियों का वैश्विक कारोबार ठप्प हो सकता है। अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेट और अन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति या बैंक इन प्रतिबंधित संस्थाओं की मदद करेंगे, उन्हें भी अमेरिकी प्रतिबंधों और आपराधिक जांच का सामना करना पड़ेगा।
भारत-अमेरिका संबंधों और समुद्री सुरक्षा पर इस कार्रवाई के मायने
यद्यपि अमेरिका द्वारा लगाए गए ये प्रतिबंध अमेरिकी घरेलू कानूनों (Executive Order 13902) के तहत तय किए गए हैं और भारत की किसी अदालत या जांच एजेंसी ने अभी तक इनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया है, लेकिन इस घटनाक्रम ने अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। जानकारों का मानना है कि वैश्विक शिपिंग क्षेत्र में फर्जी झंडों का यह खेल अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। भारत सरकार और संबंधित नियामक एजेंसियां अमेरिकी आरोपों के इस नए दस्तावेज का बारीक अध्ययन कर सकती हैं ताकि यह समझा जा सके कि क्या भारतीय धरती का इस्तेमाल अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और प्रतिबंधों को ठगने के लिए किया जा रहा था।