जापान ने कर दिया कमाल, 10 महीने में आए 1 लाख करोड़; 10 साल में 7 लाख करोड़ का टारगेट

जापान ने कर दिया कमाल, 10 महीने में आए 1 लाख करोड़; 10 साल में 7 लाख करोड़ का टारगेट

एशिया की दो सबसे बड़ी और मजबूत अर्थव्यवस्थाओं के बीच आपसी व्यापारिक और रणनीतिक रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में एक ऐसी बुलंदी पर पहुंच चुके हैं, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। भारत और जापान की दोस्ती केवल कूटनीतिक बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अब जमीन पर ठोस आर्थिक आंकड़ों और भारी-भरकम निवेश के रूप में साफ दिखाई देने लगी है। हाल ही में जापान की ओर से जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने यह साबित कर दिया है कि जापानी निवेशकों और कंपनियों का भारत के विकास मॉडल पर अटूट विश्वास बन चुका है। जापान ने एक बार फिर से आर्थिक मोर्चे पर बड़ा कमाल दिखाते हुए यह साबित कर दिया है कि भारत उनके लिए सबसे भरोसेमंद और आकर्षक वैश्विक बाजार बनता जा रहा है। दोनों देशों के बीच मजबूत होते व्यापारिक संबंधों का यह नया दौर आने वाले समय में रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा करने और एशिया में आर्थिक स्थिरता लाने की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।

महज 10 महीनों में भारत में आया 1 लाख करोड़ रुपये का भारी निवेश

जापान की ओर से जारी ताजा आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, जापानी निवेशकों ने असाधारण गति दिखाते हुए महज 10 महीनों के भीतर भारत में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) झोंक दिया है। यह आंकड़ा इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि वैश्विक मंदी और अन्य भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद जापानी कंपनियां भारतीय बाजार की असीम संभावनाओं को लेकर कितनी आश्वस्त हैं। जापान द्वारा किया जाने वाला यह निवेश मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर, रिन्यूएबल एनर्जी और रेलवे जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आ रहा है। जब दुनिया के अन्य देश आर्थिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहे हैं, तब भारत में इस पैमाने पर जापानी पूंजी का आना इस बात को रेखांकित करता है कि भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया के लिए एक ब्राइट स्पॉट (Bright Spot) बनी हुई है और निवेशकों का भरोसा रिकॉर्ड स्तर पर है।

अगले 10 वर्षों में 7 लाख करोड़ रुपये निवेश करने का महा-टारगेट

वर्तमान सफलता से एक कदम आगे बढ़ते हुए जापान सरकार और वहां के प्रमुख उद्योग संगठनों ने आने वाले दशक के लिए एक बहुत ही बड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। जापान ने अगले 10 वर्षों में भारत के अंदर कुल 7 लाख करोड़ रुपये (लगभग 5 ट्रिलियन येन) का विशाल निवेश करने का महा-टारगेट सेट किया है। इस दीर्घकालिक योजना के तहत जापान भारत के मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटी जैसे राष्ट्रीय अभियानों के साथ अपनी टेक्नोलॉजी को जोड़कर एक मजबूत सहूलियत तैयार कर रहा है। जापानी तकनीक और भारत के विशाल बाजार तथा कुशल श्रमशक्ति का यह अनूठा संगम दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस महा-टारगेट के पूरा होने से भारत में विश्व स्तर की औद्योगिक इकाइयों की स्थापना होगी और भारतीय उत्पादों की ग्लोबल मार्केट में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता में जबर्दस्त इजाफा होगा।

भारत में जापानी कंपनियों का विस्तार और मेक इन इंडिया की सफलता

आज भारत के कोने-कोने में मारुति सुजुकी से लेकर टोयोटा, डाइकिन, हिटाची, पैनासोनिक और सॉफ्टबैंक जैसी दिग्गज जापानी कंपनियां अपने कारोबार का तेजी से विस्तार कर रही हैं। भारत सरकार द्वारा इज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों, टैक्स सुधारों और पीएलआई (PLI) स्कीम्स ने विदेशी निवेशकों के लिए यहां काम करना बेहद आसान बना दिया है। जापानी निवेशकों का मानना है कि भारत की युवा आबादी, तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग और मजबूत राजनीतिक नेतृत्व उन्हें अपने कारोबार को बढ़ाने का सबसे बेहतरीन मंच प्रदान करता है। जापान द्वारा किया जा रहा यह निवेश केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भारत के छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को भी ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बनने का सुनहरा अवसर मिल रहा है, जिससे देश के विनिर्माण क्षेत्र को अभूतपूर्व गति मिल रही है।

भारत-जापान की यह रणनीतिक साझेदारी भविष्य के लिए पेश कर रही है मिसाल

जापान और भारत के बीच का यह आर्थिक सहयोग केवल व्यापारिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों की गहरी दोस्ती और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा स्थिरता की साझा प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। 10 महीने में 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश और आने वाले 10 साल में 7 लाख करोड़ रुपये का टारगेट इस बात का सबूत है कि आने वाला समय एशिया की इन दो प्रमुख शक्तियों का है। भारत की विकास यात्रा में जापान एक अहम साथी के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है, जिससे देश के युवाओं को रोजगार मिलने के साथ-साथ अत्याधुनिक तकनीक तक सीधी पहुंच भी मिल रही है। आर्थिक कूटनीति के इस नए दौर ने यह साबित कर दिया है कि जब दूरदर्शी नीतियां और आपसी विश्वास आपस में मिलते हैं, तो असंभव लगने वाले लक्ष्य भी आसानी से हासिल किए जा सकते हैं, और भारत-जापान की यह जोड़ी ग्लोबल इकोनॉमी में एक नई इबारत लिख रही है।