मेक इन इंडिया' के शानदार 12 साल पूरे: देश में आया रिकॉर्ड 843 अरब डॉलर का एफडीआई

मेक इन इंडिया' के शानदार 12 साल पूरे: देश में आया रिकॉर्ड 843 अरब डॉलर का एफडीआई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में साल 2014 में शुरू किए गए देश के सबसे महत्वाकांक्षी और क्रांतिकारी अभियान 'मेक इन इंडिया' (Make in India) ने आज अपनी सफलता के ऐतिहासिक 12 साल पूरे कर लिए हैं। पिछले एक दशक से अधिक समय में इस अभियान ने भारतीय अर्थव्यवस्था, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और वैश्विक व्यापार के नक्शे पर भारत की एक बिल्कुल नई और मजबूत तस्वीर पेश की है। सरकार द्वारा जारी किए गए ताजा और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 12 वर्षों के दौरान भारत में कुल मिलाकर 843 अरब डॉलर (USD 843 Billion) से अधिक का रिकॉर्ड प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया है, जो इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि दुनिया भर की ग्लोबल कंपनियां भारत की आर्थिक क्षमता और विकास दर पर कितना अटूट भरोसा कर रही हैं। इसके साथ ही, केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन यानी पीएलआई (PLI) योजनाओं के माध्यम से देश के भीतर लगभग 14.6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नए रोजगार के अवसरों का सृजन हुआ है, जिससे देश के युवाओं को अपने ही देश में हुनर दिखाने और आत्मनिर्भर बनने का एक सुनहरा मौका मिला है।

जब साल 2014 में 'मेक इन इंडिया' की शुरुआत की गई थी, तब देश का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर कई तरह की पुरानी लाल फीताशाही, नीतिगत अड़चनों और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों से जूझ रहा था। लेकिन पिछले 12 सालों में सरकार द्वारा उठाए गए सुधारवादी कदमों, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने, सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम और कॉरपोरेट टैक्स में ऐतिहासिक कटौती जैसे फैसलों ने भारत को दुनिया भर के निवेशकों के लिए 'मैन्युफैक्चरिंग हब' में बदल दिया है। कभी रक्षा उपकरणों, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक सामानों के लिए पूरी तरह विदेशों पर निर्भर रहने वाला भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता देश बन चुका है। 'मेड इन इंडिया' के लेबल वाले स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, डिफेंस प्रोडक्ट्स और सेमीकंडक्टर चिप्स अब अमेरिका और यूरोप समेत दुनिया के कोने-कोने में निर्यात किए जा रहे हैं, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को भी एक जबरदस्त मजबूती मिली है।

पीएलआई (PLI) स्कीम का जादू: घरेलू उत्पादन और निर्यात में ऐतिहासिक उछाल

'मेक इन इंडिया' अभियान की सफलता में पिछले कुछ वर्षों में जोड़ी गई 'प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव' यानी पीएलआई (PLI) योजना ने गेमचेंजर की भूमिका निभाई है। इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सोलर पीवी मॉड्यूल्स और टेक्सटाइल जैसे 14 प्रमुख क्षेत्रों में लाई गई इस योजना के तहत कंपनियों को भारत में उत्पादन बढ़ाने पर सरकार की ओर से भारी वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है। इसका परिणाम यह हुआ कि एप्पल (Apple) जैसी दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों ने भारत में अपने आईफोन का बड़े पैमाने पर उत्पादन और निर्यात शुरू कर दिया है। आज भारत से होने वाले कुल निर्यात में हाई-टेक और मैन्युफैक्चरिंग गुड्स की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है, जो इस बात को साबित करती है कि भारत अब केवल एक 'उपभोक्ता बाजार' नहीं रह गया है, बल्कि दुनिया की एक प्रमुख 'उत्पादन शक्ति' के रूप में उभर चुका है।

भविष्य की चुनौतियां और 'विकसित भारत 2047' का बड़ा संकल्प

मेक इन इंडिया के इन 12 सफल वर्षों का जश्न मनाते हुए नीति निर्माताओं और उद्योग जगत का यह मानना है कि यह तो अभी एक शुरुआत मात्र है। भारत सरकार का यह लक्ष्य है कि देश को साल 2047 तक एक 'विकसित राष्ट्र' (Developed Nation) बनाया जाए, जिसके लिए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की जीडीपी (GDP) में हिस्सेदारी को और अधिक बढ़ाना अनिवार्य है। आने वाले समय में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, ग्रीन हाइड्रोजन, एविएशन और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई और बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। जिस प्रकार से ग्लोबल सप्लाई चेन में चीन का विकल्प तलाश रही बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत का रुख कर रही हैं, उससे यह पूरी तरह स्पष्ट है कि आने वाला दशक भारत के औद्योगिक और आर्थिक इतिहास का सबसे स्वर्णिम काल साबित होने वाला है, जिससे देश के करोड़ों युवाओं के लिए रोजगार और समृद्धि के नए द्वार खुलेंगे।