किस्मत ही नहीं, सेहत भी संवारती है कलर थेरेपी; जानिए कैसे रंगों का सही इस्तेमाल बीमारियों को करता है छूमंतर

किस्मत ही नहीं, सेहत भी संवारती है कलर थेरेपी; जानिए कैसे रंगों का सही इस्तेमाल बीमारियों को करता है छूमंतर

रंग हमारे जीवन में सिर्फ खुशियां और खूबसूरती ही नहीं लाते, बल्कि ये हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को भी पूरी तरह नियंत्रित करते हैं। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में अक्सर भाग्य चमकाने और ग्रहों को शांत करने के लिए रंगों के इस्तेमाल की सलाह दी जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आधुनिक और प्राचीन चिकित्सा पद्धति में इसे क्रॉमोथेरेपी (Chromotherapy) या कलर थेरेपी (Color Therapy) के नाम से जाना जाता है? यह एक ऐसी जादुई हीलिंग थेरेपी है, जो बिना किसी दवा के केवल रंगों की ऊर्जा और तरंगों (Vibrations) के जरिए शरीर की गंभीर से गंभीर बीमारियों को ठीक करने की ताकत रखती है। आइए जानते हैं कि कौन सा रंग आपकी सेहत के लिए कितना फायदेमंद है और यह थेरेपी कैसे काम करती है।

कैसे काम करती है यह प्राकृतिक कलर थेरेपी?

विज्ञान के मुताबिक, हर रंग की अपनी एक वेवलेंथ (Wavelength) और ऊर्जा होती है। जब ये रंग हमारी आंखों और त्वचा के संपर्क में आते हैं, तो ये हमारे शरीर के चक्रों (Chakras) और पीनियल ग्रंथि को प्रभावित करते हैं। शरीर में किसी भी रंग की कमी या अधिकता होने से हम बीमार पड़ जाते हैं। कलर थेरेपी के तहत रंगीन रोशनी, रंगीन बोतलों में चार्ज किया गया पानी, रंग-बिरंगे कपड़े और प्राकृतिक रंगों के जरिए शरीर के ऊर्जा केंद्रों को संतुलित किया जाता है, जिससे बॉडी खुद को प्राकृतिक रूप से हील करने लगती है।

लाल और पीला रंग: सुस्ती दूर भगाकर पाचन तंत्र को करता है मजबूत

अगर आप हमेशा थका हुआ महसूस करते हैं या लो ब्लड प्रेशर (Low BP) की समस्या है, तो लाल रंग आपके लिए एनर्जी बूस्टर का काम करता है। लाल रंग शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है और सुस्ती को तुरंत दूर करता है। वहीं दूसरी ओर, पीला रंग डिप्रेशन और मानसिक तनाव को कम करने में रामबाण माना जाता है। यह रंग सीधे आपके नर्वस सिस्टम और पाचन क्रिया (Digestion) को सक्रिय करता है। जिन लोगों को पेट से जुड़ी समस्याएं या लिवर की तकलीफ होती है, उनके लिए पीले रंग का संपर्क बेहद फायदेमंद साबित होता है।

नीला और हरा रंग: हाई बीपी और तनाव से दिलाता है तुरंत राहत

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अगर आप हाई ब्लड प्रेशर (High BP), गुस्सा और अनिद्रा (Insomnia) जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो नीला रंग आपके लिए एक बेहतरीन हीलर है। नीले रंग में एंटी-इन्फ्लेमेटरी और कूलिंग प्रॉपर्टीज होती हैं, जो दिमाग को शांत करती हैं और माइग्रेन के दर्द में राहत देती हैं। इसके साथ ही, प्रकृति का रंग यानी हरा रंग हमारी आंखों और दिल के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है। हरा रंग शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है, इम्युनिटी बढ़ाता है और अल्सर जैसी बीमारियों को ठीक करने में मदद करता है।

दैनिक जीवन में कैसे शामिल करें कलर थेरेपी?

कलर थेरेपी का लाभ उठाने के लिए आपको किसी क्लिनिक में जाने की जरूरत नहीं है, इसे आप अपने घर पर ही बेहद आसानी से आजमा सकते हैं। इसके लिए आप सुबह के समय उगते सूरज की सतरंगी किरणों के सामने 10-15 मिनट बैठ सकते हैं। इसके अलावा, रंगीन कांच की बोतलों में पानी भरकर धूप में 6-8 घंटे तक चार्ज करके पीने से भी शरीर को उस विशेष रंग के औषधीय गुण मिलते हैं। अपने बेडरूम की दीवारों, पर्दों और कपड़ों के रंगों का चुनाव अपनी शारीरिक और मानसिक जरूरत के हिसाब से करके भी आप एक स्वस्थ और संतुलित जीवन जी सकते हैं।